जुगाड़ पर फिल्में बनती हैं और जुगाड़ी निर्देशक बन जाते हैं : राजेश पाण्डे

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इन दिनों भोजपुरी सिनेमा में स्क्रिप्ट राइटर के रूप में एक नाम तेजी से उभर रहा है, वह नाम है राजेश पाण्डे का। राजेश पाण्डे मूलतः बिहार, छपरा जिला के बसंतपुर गांव के रहनेवाले हैं। हाल ही में हमारी मुलाकात राजेश पाण्डे से हुई, पेश है उनसे हुई बातचीत के कुछ खास अंश-

आपके लेखन की शुरुआत कैसे हुई?

मैंने अपना लेखन कविताओं और गज़लों से की जो देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं मंे प्रकाशित हुई। इसके अलावा मैंने 25 भोजपुरी एलबम के गाने लिखे। स्क्रिप्ट लेखन की शुरुआत पटना दूरदर्शन के एक छोटी सी नाटिका के साथ हुई। उसके बाद मैं मुंबई आ गया और यहां लगभग 10 भोजपुरी फिल्में लिखी।

उन फिल्मों के बारे में बताना चाहेंगे?

हां, ज़रूर! भोजपुरी में मैंने “प्रेम लगन”, “खुद्दार”, “खेला”, “डॉन”, “अंखिया तोहार कमाल कइले बा”, “दिल लागल गांव की गोरी से” लिखी जिसमें से “प्रेम लगन” और “खुद्दार” रिलीज हो चुकी हैं। अन्य फिल्में निर्माणाधीन हैं जिसमें “हमरे नाव से जिला हिलेला” भी है जो बहुत जल्द प्रदर्शित होनेवाली है। दिनेश लाल यादव “निरहुआ” एवं मोनालिसा अभिनीत और रवि सिन्हा निर्देशित फिल्म “जंजीर” लिखा जो इसी महीने प्रदर्शित होने जा रही है, इसके अलावा पवन सिंह और मोनालिसा अभिनीत तथा राजकुमार पाण्डे निर्देशित फिल्म ‘संईया जी दिलवा मांगे ले’ की शूटिंग चल रही है। रवि सिन्हा निर्देशित फिल्म “सन ऑफ बिहार” लिख रहा हूं, इसके अलावा दो अनाम फिल्म जो बहुत जल्द घोषित होगी उसका लेखन चल रहा है। नेशनल दूरदर्शन के लिए एक धारावाहिक
भी लिख रहा हूं। भोजपुरी में बने शो “के बनी करोड़पति” जिसका होस्ट शत्रुघ्न सिन्हा ने किया था उसकी स्क्रिप्ट भी मैंने ही लिखी थी।

स्क्रिप्ट लेखन के साथ-साथ आप गीत भी लिख रहे हैं?

जी हां, गीत लेखन का भी कार्य चल रहा है। नीतू चंद्रा की फिल्म “देशवा” में एक गीत “सौतनवा जर मरे…” भी लिखा था, जिसे सुनिधि चैहान ने गाया था। एक फिल्म “बीडी.ओ. साहब” जिसकी शूटिंग चल रही है, उसके गाने भी लिखे हैं, जिसे कुमार सानू, अनुराधा पौडवाल और मो.अजीज के साथ इंदु सोनाली ने गाये हैं।

भोजपुरी फिल्मों में हिन्दी फिल्मों का रिमेक और हिन्दी फिल्मों के नाम का प्रयोग इन दिनों काफी हो रहा है। इस बारे में आप क्या सोचते हैं?

देखिए, अगर भोजपुरी सिनेमा के स्तर को बढ़ाना है तो कथा वस्तु से हिन्दी सिनेमाओं का रिमेक और हिन्दी फिल्मों के नाम का प्रयोग हटाना होगा।

आपको ऐसा नहीं लगता कि आज भी भोजपुरी फिल्मों में अच्छे लेखक और निर्देशक का अभाव है?

बिल्कुल सही कहा आपने। अच्छे लेखक और निर्देशक का अभी भी अभाव है। जुगाड़ पर फिल्में बनती हैं और जुगाड़ी निर्देशक बन जाते हैं।


आज भोजपुरी सिनेमा की जो स्थिति है, उसे देखते हुए आप क्या कहना चाहेंगे?

वर्तमान स्थिति को देखते हुए किसी बड़े स्टार की कीमत 10 लाख से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। नायिकाओं और खलनायकों का मेहनताना सही है। मुझे डर है कि
भोजपुरी स्टारों की बढ़ती कीमत कहीं इस भोजपुरी सिनेमा के तीसरे दौर को फिर बंद न कर दे।

भोजपुरी सिनेमा में अश्लील गानों की भी खूब भरमार हो रही है, क्या कहना चाहेंगे?

देखिये, भोजपुरी सिनेमा को तभी लम्बी उम्र प्रदान होगा जब हम अश्लील गानों से बचेंगे।

जुगाड़ पर फिल्में बनती हैं और जुगाड़ी निर्देशक बन जाते हैं : राजेश पाण्डे

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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