जिनगी के परछाहीं – भोजपुरी कहानी संग्रह

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कथा कहानी कवनो नावतुंग चीझ ना ह। आदमी जवन जी रहल बा, भोग रहल बा कहानी ओही मे से जनमेले। जिनगी हर छन एगो कथा ह , हर धड़कन गीत ह, मन के हर मुचकन कहानी ह। तन के हर बेबसी व्यथा ह – व्यथा के भोग कथा ह। जिनगी कहानी , कहानी जिनगी। गावं के अमराई में कहानी खेलेले , धुरा में लोटेले आ नदी किनारे जिनगी के परछाई देख -हेर के आँखि में सपना के काजर करेले।

शहर के हर रास्ता, सड़क; खेत के हर बाट, ड़रेर कहानी के गोर से धनंगाइल बा आ रँगाईल बा ओकरा महावर से इतिहास के गाल। आदमी के मन के प्रेम, घृणा जिनगी के अंग ह। अँजोर आ अन्हार से साउनाइल इहे रूप – इहे परछाही कहानी के प्रेणना ह।

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