कान छोड़ दे हमहुं हो गइलीं सेआन रे माई

विमल कुमार जी
विमल कुमार जी

रहलीं लइका त नोचलीस तेहुं कान रे माई
कान छोड़ दे हमहुं हो गइलीं सेआन रे माई।

देखि देखि हँसतारे गँउवा के लोगवा
कान ध के नोचतारिस सभके सोझवा
हमरा उमिरिया के राखु तनीं धेआन रे माई
कान छोड़ दे हमहुं हो गइलीं सेआन रे माई।

खा लेनीं खइनीं त कवन गलती कइलीं
बाबुजी भईया के देखि के सिख गइलीं
झूठ बोलत नइखीं बतिया तेहुं मान रे माई
कान छोड़ दे हमहुं हो गइलीं सेआन रे माई।

लागेला लाज मेहरी करत रहे नाज
बनल इजतिया के खुल गइल राज
बनि देखाइब हमु सूरूज अउर चान रे माई
कान छोड़ दे हमहुं हो गइलीं सेआन रे माई।

खातानीं किरिआ जनि करु फिकिरिआ
कहु त देखाईं हमुं चीर के शरीरिया
नाज करबे तेहुं बनम निमन इंसान रे माई
कान छोड़ दे हमहुं हो गइलीं सेआन रे माई।

विमल कुमार
ग्राम +पोस्ट-जमुआँव
थाना-पीरो,भोजपुर [बिहार]

रउवा खातिर:
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देहाती गारी आ ओरहन
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