काँच ही बाँस के बहँगिया, बहँगी लचकत जाय

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काँच ही बाँस के बहँगिया, बहँगी लचकत जाय…
स्वर: कल्पना पटवारी

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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