खेसारी लाल यादव भोजपुरी सिनेमा के बेताज बादशाह

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कहल बा कि भगवान ओकरे मदद करेले, जे अपना लक्ष्य के पावे खाती पूरा ईमानदारी आ पूरा क्षमता से मेहनत करेला। भोजपुरी फिल्म जगत के आज के दौर के में एह बात के खेसारी लाल यादव सच क के देखा दिहले।

बिहार के छपरा (सारण) ज़िला के एगो छोटी-मूटी गाँव – बिर्ती टोला के एगो अति साधारण परिवार में जन्म लेवेवाला शत्रुध्न प्रसाद उर्फ़ खेसारी लाल यादव आज पहचान के मोहताज नईखन। खेसारी अपना मेहनत के दम प अपना परिवार, गाँव, ज़िला समेत समाज में एगो खास स्थान बना लेले बाड़े।
भोजपुरी लोकप्रिय गीत-संगीत के गायक के तौर प एगो नाया पारी के शुरुआत करेवाला खेसारी लाल यादव 2010 में आईल ‘सइयाँ अरब गइले ना …’ से लगातार कामयाबी के नाया ऊंचाई तय करत रहले। खेसारी लाल यादव ए विधा के गायकी में लगातार चर्चा बटोरत रहले।

लेकिन, ए सभसे अलग, खेसारी के मन में कुछ अवुरी लक्ष्य बनत रहे। कुछ सपना रहे, जावना के पूरा करे के रहे। अपना लक्ष्य के पीछा करत खेसारी के 2011 में निर्माता आलोक कुमार अवुरी निर्देशक प्रेमांशु सिंह के फिल्म ‘साजन चले ससुराल’ मिलल। निर्माता जहां ‘सइयाँ अरब गइले ना …’ के भंजावे के सोचत रहले, उहें खेसारी ए फिल्म के संगे अपना खाती एगो नया मंज़िल तय क लिहले। फिल्म रिलीज भईल अवुरी इतिहास बना देलस। एक मौका के तलाश में भटक्त खेसारी लाल यादव खाली स्टार ना, सुपरस्टार हो बन गईल रहले। ए फिल्म के कामयाबी के बाद त खेसारी के भीरी फिल्म के लाइन लाग गईल। लेकिन, कामयाबी के नशा अभियो खेसारी के माथा प ना चढ़ल रहे। खेसारी फिल्म के चुनाव में पूरा सावधान रहले अवुरी एही साल (2011) के अंत में निर्देशक राजकुमार पांडेय के फिल्म ‘नागिन’ में अपना अभिनय क्षमता के जबर्दस्त परिचय दिहले।

खेसारी जब भोजपुरी सिनेमा में अपना पारी के शुरुआत करत रहले, तब मनोज तिवारी, पवन सिंह, रवि किशन अवुरी निरहुआ के परचम लहरात रहे। अधिकांश लोग मानत रहले कि, भोजपुरी सिनेमा के छोट बाज़ार में फिलहाल एगो अवुरी स्टार के खाती जगह नईखे। लेकिन, ए बड़े-बड़े नाम के बीच ओ समय मात्र 23 साल उमर के खेसारी अपना अभिनय के बल प अपना खाती एगो खास जगह बना लिहले। फिल्म ‘नागिन’ के सफलता के बाद ‘लहू के दो रंग’, ‘जान तेरे नाम’, ‘सपूत’, अवुरी ‘देवरा पे मनवा डोले’ से मिलल लगातार कामयाबी खेसारी के भोजपुरी सिनेमा के सबसे बड़ स्टार बना देलस।

एकरा बाद शुरू भईल मंदी के दौर। 2012 अवुरी 2013 में एक ओर भोजपुरी सिनेमा के बड़े-बड़े स्टार के फिल्म लगातार फ्लॉप होखे लागल। समय अयीसन आईल कि ‘सुपरस्टार’ कहाए वाला लोग से निर्माता दूर भागे लगले। लेकिन खेसारी लाल यादव ए दौर में ‘दिल ले गइल ओढ़निया वाली’, ‘प्रतिज्ञा-2’, ‘संसार’, ‘तेरी कसम’, ‘ऐ बलमा बिहारवाला’, ‘प्यार झुकता नहीं’ जईसन फिल्म के सफलता के बल प आगे बढ़ले। खेसारी अब सिनेमा जगत के बहुत नजदीक से जान गईल रहले। अभिनेता खेसारी लाल यादव 2014 में निर्माता खेसारी लाल यादव बनले अवुरी पहिला फिल्म आईल ‘लाडला’। हालांकि, बॉक्स ऑफिस प ए फिल्म के साधारण मिलल लेकिन खेसारी के निजी जीवन प आधारित ए फिल्म के समीक्षक बहुत सरहले।
अब भोजपुरी सिनेमा में खेसारी के तूति बोलत रहे। 2014 में ‘लाड़ला’ के संगे-संगे ‘साथिया’, ‘चरणों की सौगंध’, ‘तू मेरा हीरो’, ‘बेताब’ अवुरी ‘खून भरी मांग’ इनिका के भोजपुरी सिनेमा के बेताज बादशाह बना देलस।

खेसारी अपना पांच साल के फिल्मी जीवन में ‘लौंड़ा के नाच’, पारिवारिक अवुरी जबर्दस्त एक्शन समेत एगो भरल-पुरल अभिनेता के हरेक गुण के परिचय दे चुकल बाड़े। सिनेमा के पर्दा प हीरोइन संगे उनुकर रोमांस होखे, चाहे खलनायक संगे मारधाड़, चाहे हंसी-ठिठोली – आज हरेक अभिनेता कमोबेस इनिकर नकल करत देखाई देता।

निर्माता, निर्देशक अवुरी वितरक के पहिला पसंद कहाए वाला खेसारी 2016 में असलम शेख के ‘खिलाड़ी’, निर्देशक मंजुल ठाकुर के ‘दबंग आशिक’ अवुरी ‘दूध का कर्ज’ में देखाई दिहले, जबकि ‘साजन चले ससुराल भाग 2’, ‘जानम 2’, ‘दिलवाला’, ‘साथिया साथ निभाना’, अवुरी ‘मेहँदी लगा के रखना’ रिलीज खाती तैयार बिया।

आशा बा कि, खेसारी आगे अपना जीवन में नाया ऊंचाई के छूईंहे अवुरी सिनेमा के एगो नाया ऊंचाई दिहे।

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