मुँहचुपा चुप-चुपा मनोज,रवि,कुणाल और नगमा

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लोकतंत्र का महापर्व शुरू हो चूका है, इस चुनावी मौसम मे भोजपुरी फ़िल्म इंडस्ट्री कैसे अछूता रह सकता है, अभिनेता मनोज तिवारी, रवि किशन, कुणाल सिंह और अभिनेत्री नगमा मैदान मे उतर चुके है। पिछले लोकसभा चुनाव मे मनोज तिवारी ने समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर गोरखरपुर से भारतीय जनता पार्टी के दबंग संसद योगी आदित्य नाथ से अपनी जमानत जप्त करा चुके है और इस बार पाला बदल कर भाजपा के टिकट पर उतर-पूर्वी दिल्ली से चुनाव मैदान मे है। पिछले चुनाव मे कांग्रेस के लिए प्रचार करने वाले रवि किशन जौनपुर (उतर प्रदेश) और अभिनेत्री नगमा मेरठ ( उतर प्रदेश) से मैदान मे है। वही इंडस्ट्री के सबसे सीनियर अभिनेता व बिहार कांग्रेस के सांस्कृतिक सेल के अध्यक्ष् कुणाल सिंह पटना साहिब (बिहार) से चुनावी मैदान मे है।

एक पत्रिका को दिए हुए वक्तव्य मे दिनेश लाल यादव ने भी चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी हो सकता है वह अगला लोकसभा चुनाव लड़े. अच्छा है हर कोई अपना कैरियर फ़िल्म लाइन से ख़त्म हो चूका या होने के कगार पर दूसरे फील्ड है मे अब हाथ अजमा रहे है, लेकिन इंडस्ट्री के लोग इन लोगों से एक सवाल कर रहे है क्या उस सवाल का जवाब है इनके लोगों के पास ? भोजपुरी फ़िल्म इंडस्ट्री की हालत से सब वाकिफ है फिर इस हालत को ठीक करने के लिए इन लोगों ने क्या किया ? जानवर भी अपना पेट और परिवार पाल लेता है तो फर्क क्या रह जाता है ? जिस इंडस्ट्री ने इन लोगों को नेम और फेम दिया उस इंडस्ट्री के लिए आज तक कुछ नही किये तो चुनाव जितने पर जनता का क्या भला करेंगे आप समझ सकते है ? क्यों नही ये लोग आज तक बिहार और उतर प्रदेश सरकार से समस्यों के समाधान हेतु बात किये ? अगर आप लोग इतना ही कंगाल हो तो हम लोग चंदा मिला के आप लोगों के मुम्बई से पटना और लखनऊ आने जाने का किराया व रहने खाने का पैसा देने के लिए तैयार है आप लोग तैयार हो तो बताये ?

*ऐसे शब्दों के लिए माफी चाहूंगा*
सांभर: मधुप श्रीवास्तव (भोजपुरी फ़िल्म इंडस्ट्री की आवाज के फेसबुक वॉल से)

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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