जगदीश खेतान जी के लिखल मोबाइल महिमा

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नया खेलवना आईल बा।
येकर नाम मोबाइल बा।

बजता खेते खरीहाने मे।
बाग बगईचा सीवाने मे।
बजता होटल मयखाने मे।
आफिस मे आ जेलखाने मे।
येकर अइसन नसा चढल बा
येही मे सभे भुलाईल बा।
नया खेलवना आईल बा।
येकर नाम मोबाईल बा।

सहत मोबाइल महंग मोबाइल।
सबके अलग-अलग इस्टाइल।
लाल पीअर आ उजर मोबाइल।
लमहर छोट आ मोट मोबाइल।
जेकर जेतना महंग मोबाइल
ऊ ओतने इतराइल बा।
नया खेलवना आइल बा।
येकर नाम मोबाइल बा।

इंटरनेट के पैक भराव।
होसियारन मे नाम लिखाव।
देस विदेस मे मीत बनाव।
आपन बियाह आप फरीआव।
येकर महिमा का बतलाईं
सब कुछ येमे समाईल बा।
नया खेलवना आईल बा।
येकर नाम मोबाइल बा।

येही मे बाटे सिनेमा हाल।
देख समुन्दर आ पाताल।
घर मे बैठ के सब कुछ देख
सुन ल सब संगीत के ताल।
जे के चलावे ना आवेला
मनवे मन खिसीआईल बा।
नया खेलवना आईल बा।
येकर नाम मोबाइल बा।

मोबाइल ह बडा शिकारी।
राखें येके कुली भिखारी।
किन्नर राखें आ नर नारी।
राखें येके पुलिस जुआरी।
अपराधीन के धरवइले मे
हरदम अउअल आईल बा।
नया खेलवना आईल बा।
येकर नाम मोबाइल बा।

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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