नाच ना जाने ऑंगनवे टेढ़ – भोजपुरी कहावत विश्लेषण

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शारदानन्द प्रसाद के ‘नाच ना जाने ऑंगनवे टेढ़‘ भोजपुरी लोकोक्ति भा कहावत के दोसरका संग्रह ह जवना में कहावतन के विवेचन भोजपुरी में कइल गइल बाटे। एकरा में कुल तीन सौ सताइस गो लोकोक्ति विवेचना के साथ संकलित बा। एह ३२७ गो में से २३२ गो अइसन लोकोक्ति बा जे शास्त्री सर्वेन्द्रपति त्रिपाठी के संग्रह ‘वाणी के बोल’ में संकलित नइखे। एह से, भोजपुरी कहावत के संग्रह-विश्लेषण के दिसाई शारदानन्द जी के एह पुस्तक के महत्व बनल रही।

एह संग्रह के ९५ कहावतन में से अधिकांश में कुछ ना कुछ पाठ भेद पावल जाता। भोजपुरी चूंकि बहुते बड़ भूखण्ड में फइलल वाचिक परम्परा के भाषा ह, एह से थोड़े – बहुत अइसन पाठ-भेद अस्वाभाविक नइखे। तेहु पर यह दुनु पुस्तक में २५ गो अइसन कहावत बा जवना में तात्विक पाठ-भेद द्रिष्टिगोचर होता। कुछ कहावतन के व्याख्या में भी तात्विक अन्तर मिलत बा। भोजपुरी लोकोक्ति के अद्येयता विद्वान लोगन के अइसन कहावतन के साहित्य में गृहीत होखे लायक मान्य स्वरुप आ ओकर सही निहितार्थ पर विचार करे के चाहीं।

हिंदी आ भोजपुरी के माध्यम से भोजपुरी के कहावत के संग्रह के जे भी काम अबले भइल बा, ऊ कुल सामग्री मिला के, भोजपुरी के संकलित कहावतन के गिनती ५ हजार से ऊपर हो गइल होई. बाकिर वाचिक भोजपुरी में त कहावतन के अघना भण्डार बा। एह से संग्रह-विवेचना के ई किताब, बूँदे-बूँदे तलब भरे के दिसाईं, एगो विशिष्ट आ महत्वपूर्ण अवदान मानल जाई।

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