पागल कहेला ना मेरे जीवन का बहुत ही महत्वपूर्ण निर्गुण रहेगा: कल्पना पटवारी

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“पागल कहेला ना” मेरे जीवन का बहुत ही महत्वपूर्ण निर्गुण रहेगा। वर्षों पूर्व भी महत्वपूर्ण ही था, इसलिए भी क्योंकि यह व्यावसायिक दृष्टिकोण से काफी हिट रहा। उस समय की 23 वर्षीय कल्पना को बस यही व्यावसायिक दृष्टिकोण ही समझ में आया था। लेकिन आज 16 साल बाद मेरे मन में ‘पागल कहेला ना’ गीत के एक-एक शब्द से संगीत के कुछ अलग प्रकार के नये आयाम उत्पन्न हो रहे हैं।

कबीर द्वारा रचित इस निर्गुण को 16 वर्षों बाद समझने की कोशिश कर रही हूँ। ये जानकर मैं हैरान हूं कि संत कबीर भोजपुरी के आदि कवि थे। बिहार का चम्पारण संत कबीर का प्रथम उपदेश स्थान था। अब सवाल ये है कि संत कबीर की मूल भाषा भोजपुरी ही थी या नहीं? बताईएगा जरूर।

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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