निर्माता धीरेन्द्र चैबे से एक मुलाकात

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भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में जबरदस्त कदम रखने वाले धीरेंद्र चैबे ने बताया कि भोजपुरी फिल्मों से लगाव व निर्देशक राज कुमार आर पांडेय (राजू) के प्यार व मित्रता ने मुझे निर्माता बनाया। “छोरा गंगा किनारे वाला” भोजपुरी फीचर फिल्म लेकर एक बार फिर दर्शकों के बीच आने की तैयारी में लगे निर्माता धीरेन्द्र चैबे से “देवरा भईल दीवाना” के सेट पर एक खास मुलाकात: –

चैबे जी नमस्कार!

चैबे जी: जी नमस्कार!

सबसे पहले आप अपने विषय में बतायें।
चैबे जी: मैं धीरेन्द्र चैबे, उत्तर प्रदेश इटावा का रहने वाला हूँ मैं सर्वप्रथम समाजसेवी हूँ और उसके बाद राजनीति, (भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ) अर्थात पत्रकारिता में प्रान्तीय महासचिव हूँ व व्यवसाय से जुड़ा हूँ और अब निर्माता भी हूँ।

आपकी बतौर निर्माता पहली फिल्म कौन सी है?

चैबे जी: हमारी पहली फिल्म “नागिन” है जो राजकुमार आर पांडेय के निर्देशन में बनी थी। इससे पूर्व भी काफी फिल्मों से किसी न किसी
रुप से जुडा़ रहा हूँ।

अगली फिल्म कब तक हमारे दर्शकों को देखने को मिलेगी?

चैबे जी: बहुत जल्द! ‘छोरा गंगा किनारे वाला’ बहुत जल्द ही बनाने जा रहा हूँ, जिसकी शूटिंग की तैयारी चल रही है। आटिस्टों की
डेट फाइनल होते ही सूटिंग शुरु हो जायेगी।

आपकी फिल्म ‘नागिन’ बहुत सफल रही, क्या अगली फिल्म “छोरा गंगा किनारे वाला” भी सफलता की रिकार्ड बनायेगी?

चैबे जी: जी हूँ, आपने बिल्कुल सही फरमाया, नागिन ने बहुत अच्छा व्यवसाय किया था, कई जगह रिपीट लगी और सवाल “छोरा गंगा किनारे वाला” का है तो मेरी स्पष्ट सोच है फिल्म निर्माण के प्रति और वो यह है कि फिल्म दर्शकों को निराश ना करें अर्थात दर्शकों का पूर्ण मनोरंजन हो और मुझे पूर्ण विश्वास है कि “छोरा गंगा किनारे वाला” भी सफलता के मामले में “नागिन” से उपर रहेगी।

एक तरफ जहाँ आपके साथ पत्रकारिता, समाजसेवा व व्यवसाय जुड़ा है, दूसरी तरफ ये फिल्म निर्माण कैसे जुड़ गया।

चैबे जी: देखिये मैं तो यही कहूँगा कि फिल्मों से लगाव व निर्देशक राजकुमार आर पांडेय की मित्रता ने मुझे निर्माता बना दिया।
और सब के साथ हम फिल्म निर्माण से जुड़ गये।

आज आपका नाम इंडस्ट्री में बड़े सम्मान से लिया जाता है, कलाकार भी आप की फिल्में करना चाहते हैं, इस बारे में क्या कहना चाहेंगे?

चैबे जी:
सबसे पहले फिल्म इंडस्ट्री को धन्यवाद। रही कलाकारों की बात उनका भी बहुत-2 धन्यवाद जो मेरे साथ लगन के साथ कार्य
करते है जिसके परिणाम अच्छे आते है और मेरी भी कोशिश पूरी होती है कि निर्माण टीम चाहे वो स्पोट बाय हो सभी को सम्मान देना मेरी प्राथमिकता है जिसके परिणाम स्वरुप मुझे अच्छे परिणाम देखने को मिलते है यही मेरा मन्त्र है

आखरी सवाल, भोजपुरी फिल्मों के नायक (हीरो) व प्रोडयूसर को ही फायदा है, चरित्र अभिनेताओं का बुरा हाल है, लोग काम कराके वाजीब पैसा
नहीं देते, कुछ लोगों का कहना है?

चैबे जीः देखिये, मैं सिर्फ अपनी बात कहना चाहूँगा, एक सुन्दर और भव्य महल के निर्माण में इन्जिनियर से लेकर मजदूर तक का अपने-अपने स्तर से सबका सहयोग महत्वपूर्ण है, अगर सबका सहयोग, श्रम व समर्पण न हो तो महल का निर्माण सम्भव नहीं है। अपने-अपने श्रम के अनुरूप
उन्हें पारिश्रमिक भी मिलना चाहिए। किसी का हक मारकर कोई राजा हुआ है क्या? मैंने नागीन मे छोटे से छोटे कलाकार को पैसा दिया है।

बहुत-बहुत धन्यवाद चैबे जी, आपने अपना समय दिया और अपने विचारों से दर्शकों को अवगत कराया, धन्यवाद, धन्यवाद।

निर्माता धीरेन्द्र चैबे से एक मुलाकात

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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