रामपति रसिया

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भोजपुरी कवि नथुनी प्रसाद कुशवाहा उर्फ रामपति रसिया का जन्म उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद में तमकुहीराज तहसील के गांव मोरवन में वर्ष 1948 में हुआ है । रसिया जी भोजपुरी के गीतकार भी हैं । स्व. धरीक्षण मिश्र आपके गुरू थे । गरीबी में तपे रामपति रसिया की रचनाएं गंवई मन की पीड़ा को बखूबी व्यक्त करती जान पड़ती हैं । रसिया जी वर्तमान में सेवरहीं कस्बे के पास शिराजनगर में पाकड़ के पेड़ के नीचे गरीब बच्चों को पढ़ाते हैं । लोकरंग 2010 में हमने इन्हें सम्मानित किया है । उनकी रचनाओं की कुछ झलकियां यहां दी जा रही हैं-

सभे परेसान बाटे कहीं-न-कहीं से
केहू धनवान बा त बाटे निसन्तानी
देवे वाला नइखे केहू मुअलो पर पानी
जीवन कठिन बाटे चलला सही से
सभे परेसान बाटे …..

काहें मन करेल गुमान हो, बिहान देखि पइब की नाहीं
सपना समान बा जहान के बजरिया
सम्भरि के धर पांव देखि के डगरिया
नाही बाटे कवनो ठेकान हो, बिहान देखि पइब की नाहीं

उपरा डिबल बाटे बाज, नाज मति कर.. छोड़.. चिरई
कबले छिपल अपने खोतवा में रहबू
केकरा से मनवां के दुखवा के कहबू
छुटि जाई धरती के राज, नाज मति कर.. छोड़.. चिरई ।

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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