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जगदीश खेतान जी के लिखल भोजपुरी कहानी इंसानियत

घड़ी के एलारम बाजे लागल। हम हड़बड़ा के उठलीं आ बइठ गइलीं। आजे हमार बी.काम के फाइनल परीक्षा खतम भइल रहे।परीक्षा समाप्त होते भर...

जगदीश खेतान जी के लिखल भोजपुरी कहानी चार गो भूतन से...

आयी पढ़ल जाव जगदीश खेतान जी के लिखल एगो बेहतरीन भोजपुरी कहानी चार गो भूतन से भेंट:- रउवा लोग अपने जीवन मे भूत, प्रेत, चुड़ैल...

जगदीश खेतान जी के लिखल गुड़ भेली आ महिया

गुड़ के नमवे से समझ लेईं कि येमे केतना गुड़ होला।गुड़ मुख्यतः गन्ना के रस से बनेला। गुड़ खजूर के आ ताड़ के पेड़े...

जगदीश खेतान जी के लिखल भोजपुरी कविता कबले होब फेल

बबुआ तू कबले होब फेल? का कहीं बहुत तोहका झेललीं, अब हम ना पाईब तोहें झेल। कइसे पढबऽ कबले पढब्ऽ। का-का पढबऽ ई समझा दऽ डागडर बनब कि...

जगदीश खेतान जी के लिखल भोजपुरी कहानी आंख

प्रयाग विश्वविदयालय यूनियन पत्रिका 1962 मे हिंदी मे प्रकाशित कहानी का भोजपुरी अनुवाद।। हम येगो आन्हर मंगन हईं जे आपन पेट जियावे खातीर...

जगदीश खेतान जी के लिखल सरस्वती बंदना

कई देतीं हमरो उद्धार ये सुरसती माई। रोई रोई करीलां मनुहार ये सुरसती माई। रउवा रामबोला के तुलसीदास बनवलीं अमर ग्रन्थ रामचरित मानस लिखवइलीं निपट गंवारे के कालीदास...

जगदीश खेतान जी के लिखल भोजपुरी हास्य कहानी आंख के आन्हर

ई सन 1971 के बात ह।पाकिस्तान आ भारत मे लड़ाई शुरु हो गईल रहे।पूरा देश मे येगो उत्साह छा गईल रहे।हर जगह येही के...

जगदीश खेतान जी के लिखल भोजपुरी कविता हमहूं लूटीं तेहू लूट

हमहूं लूटीं तेहू लूट। दूनो पहिने मंहग सूट। उपर वाले के भी खियाव। अपने पीअ आ उनके पियाव। अईसे जो कईले जईब त रिश्ता हरदम रही अटूट। हमहूं लूटीं तेहू...

जगदीश खेतान जी के लिखल मोबाइल महिमा

नया खेलवना आईल बा। येकर नाम मोबाइल बा। बजता खेते खरीहाने मे। बाग बगईचा सीवाने मे। बजता होटल मयखाने मे। आफिस मे आ जेलखाने मे। येकर अइसन नसा चढल बा येही...