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डॉ. हरेश्वर राय जी के लिखल भोजपुरी कविता हमार जान ह...

हमार सान ह हमार पहचान ह भोजपुरी, हमार मतारी ह हमार जान ह भोजपुरी|इहे ह खेत, इहे खरिहान ह इहे ह सोखा, इहे सिवान ह, हमार सुरुज ह हमार चान...

हरेश्वर राय जी के लिखल लूटीं लूट मचल बा

लूटीं लूट मचल बा सगरो लूटीं लूट मचल बा।बाढ़ लूटीं, सूखा लूटीं राहत के लूटीं मिठाई, भूख लूटीं, पियास लूटीं लूटीं थोड़की महंगाई।वोट लूटीं, नोट लूटीं लूटीं चकाचक नारा, रैली...

डॉ. हरेश्वर राय जी के लिखल भोजपुरी कविता आवले बोलता नयका...

हर के कलम से धरती के कागज प पसीना के सियाही से जीवन उकेरे ला किसान बाकिर ओकरे घटल रहता चाउर पिसान।ओकरे पसीना अतना सस्ता काहे बा ओकरे हालत अतना खस्ता काहे...

जगदीश खेतान जी के लिखल भोजपुरी कविता कबले होब फेल

बबुआ तू कबले होब फेल? का कहीं बहुत तोहका झेललीं, अब हम ना पाईब तोहें झेल।कइसे पढबऽ कबले पढब्ऽ। का-का पढबऽ ई समझा दऽ डागडर बनब कि...

जगदीश खेतान जी के लिखल भोजपुरी कविता हमहूं लूटीं तेहू लूट

हमहूं लूटीं तेहू लूट। दूनो पहिने मंहग सूट।उपर वाले के भी खियाव। अपने पीअ आ उनके पियाव। अईसे जो कईले जईब त रिश्ता हरदम रही अटूट। हमहूं लूटीं तेहू...

प्रिंस रितुराज दुबे जी के लिखल भोजपुरी कविता मोदी आईनी काशी

मोदी आईनी काशी हई उहा कS भारत बासी भारत के मिलता पहचान अब कशी बनता भारत के शान अबकशी करे निहोरा अब भोजपुरी के सम्मान करS पूरा देश बिदेश...

प्रिंस रितुराज दुबे जी के लिखल भोजपुरी कविता नायका बरिस

नायका बरिस लेके आईल बहार हो नाया नाया होई हजार धमाल हो | मन के भीतरिया ख़ुशी के उमंग आकाश में चमके सतरंगी पतंग |दईब करस कुछु...

प्रिंस रितुराज दुबे जी के लिखल भोजपुरी कविता भारत से इंडिया...

जवन भारत सभ्यता आ संस्कृति कऽ केंद्र होत रहे आज उऽ फूहर इंडिया हो गईल बा |जेकरा के मर्यादा आ सुनरता के जननी बुझल जात...

डॉ राधेश्याम केसरी जी के लिखल भोजपुरी कविता दुनिया कइसे बा...

आइल गरीबी जिनिगी आफत, उनकर खाली लमहर बात। सात समुन्दर, उनका घरवा , घी क अदहन रोज दियात।हमरा घर में कीच- कांच बा, नइखे घर में भूंसा-...

कइसन गांव-गिरांव हो गइल

कइसन गांव-गिरांव हो गइल अजबे चलन सुभाव हो गइल।गांव शहर में बदले लागल सिमटे लागल खेतिहर धरती जाने कहां बिलाये लागल जंगल अउरी हरियर...

भोजपुरी भासा हऽ माई के

भोजपुरी भासा के अस्मिता आ ओकरा संवैधानिक दरजा खातिर आंदोलन जारी बा। एही सिलसिला में केंद्र सरकार से अपना हक के मांग करत भोजपुरिया...

भोजपुरी कविता जब से रोटी बोर खवायल

जब से रोटी बोर खवायल ओठलाली खूबै महंगायल अब का आलू खेत बोआई सबही चोखा से भरुआयल।रोटी भात न खाये अईली ओरहन बा मउगी के आयल का चाहत बा...

छनही तोला, छनही माशा

कइसन कइसन चलल तमाशा छनही तोला, छनही माशा ||अगराइल लीहले उ तिरंगा दिल करिया बारे मन न चंगा...

भोजपुरी कविता: पटरी ना खाई

डॉ जीतराम पाठक जी के एगो कविता **********************************पटरी ना खाई **********************************अरुआइल बा बात तहार, हटाव फरका, ले अइब एने अब त पटरी ना खाई चूरी-...

अब ना करे मोर मनवा करे के मजूरी

जनकवि दुर्गेन्द्र अकारी के एगो कविताअब ना करे मोर मनवा करे के मजूरी भोरे जमींदरवा दरवा पियादा पेठावे कान्ह्वा प हरवा कुदारी चढ़ावे कतनो खटीला,...

आजुओ सावन कजराइल

आजुओ सावन कजराइल, कदमवाँ फुलाइल हो रामा...श्याम नाहीं आइल श्याम नाहीं गोकुल आइल हो रामा...श्याम नाहीं... आजुओ चनरमा वृंदावन आवे पंचम तान कोइलिया सुनावे मथुरा मुरलिया पराइल हो रामा...श्याम...

फेरु बयरिया डोले लागी – श्रद्धानन्द पाण्डेय

फेरु बयरिया डोले लागी ! फेरु भले अॅधियार गइल बा, दुर्वह मन के भार भइल बा ; जँहवाँ ले लउकत बाटे करिया सगरे संसार भइल बा। लाल किरिनिया झाँकी,...

हमेशा रहल नेह दियना बुताइल

हमेशा रहल नेह दियना बुताइल, जिनिगिया ई अबले अन्हारे में बीतल। हिया में रहल पीर अँखियनि में पानी, न जियरा के केहू सकल सुनि कहानी, न ओठनि प...

बुद्धायन

बन्दौ शाक्य कुमार, जाहि जन्म संवाद सुनि। उमड़ल हर्ष अपार, शुद्धोदन सम्राट उर ॥ 1 ॥कीन्ह दान परमार्थ, अन्न, वस्त्र, धन, सोमरस। नामकरण सिद्धार्थ, गौतम घर-परिवार...

ई प्यार जिन्दगी के

ई प्यार जिन्दगी के कतना मधुर भला बा मनुहार जिन्दगी के सौरभ भरल दिशा बा ई चाँदनी निशा बा उमगल उमंग से बा ई धार जिन्दगी के ई जिन्दगी समर्पण कतना पवित्र...

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