Home Tags भोजपुरी कविता

Tag: भोजपुरी कविता

तारकेश्वर राय जी के लिखल तू कलाकार बिघना, हमहू कलाकार

कलाकारी से हमरा नियर इंसान तू गढ़ल | इंसान के गढ़ गढ़ तू सृष्टि में आगे बढ़ल || बिघना के इ कलाकारी देखी | नर मादा के...

संजय कुमार मौर्य जी के लिखल चार गो भोजपुरी कविता

ईमान सबका लगे ईमान सबका लगे ओरा गइल बा लाज कवनों ठंइया हेरा गइल बा अब केहूए त झण्डा उठइबे करी अनीति से करेजवा पीरा गइल बा ई देश,...

विवेक सिंह जी के लिखल भोजपुरी कविता नारी सम्मान

शक्ती के स्वरूप से, नारी के पत्वारी बा! एकरा के कमजोर मत समझअ, ई देश-दुनिय पे भारी बा! सब के हित मे सोचे, ई नारी के शुबिचारी बा! जे ममता...

संजय कुमार मौर्य जी के लिखल तीन गो कविता

यह सभी रचनाएं भोजपुरी काव्य संग्रह आखर आखर जिंदगी से लिया गया है जिसके रचनाकार संजय कुमार मौर्य जी हैं। नाव लेके मिटा देला केहू नाव...

माई क इज्जत

बोले वाला भोजपुरी हई | ई बोली गर के माला ह || नेह से बोलब त पूड़ी मिठाई | फूहड़ गवईया खातिर भाला ह || जनमते सुनली इहे...

देवेन्द्र कुमार राय जी के कुछ भोजपुरी रचना

भोजपुरी कविता भोजपुरीया के ठाट भोजपुरीया जब प्रेम से बोले हर बात लागे मधुआईल, आवते भोजपुरीया के ताव में हर बतीए लागे बघुआईल।। भोजपुरी के चले जब गोला सभ...

दहेज प लिखल तारकेश्वर राय जी के दू गो कविता

दहेज बाप देखीं बेटा के, बोली लगवले बा | देवे वाला ख़ुशी से, गर्दन झुकवले बा || मोल भाव होता, देखीं सपना के || शान से बेचता, केहू...

भोजपुरी कविता जनमावे वाली माई

मॉस के लोथा के, आकार देहलस माई | आपन खूनवा से सींच के, जनमवलस माई || बोले, बतिआवे, ...

देवेन्द्र कुमार राय जी के लिखल कुछ भोजपुरी कविता

भोजपुरी कविता काशी धाम काशी के का कहीं कहल ना जाव स्वर्ग के समान सांच गंगा में नाव। पावन पुनीत जल एहीजे भेंटाई जीनीगी बितावे के असली ह...

तारकेश्वर राय जी के लिखल भोजपुरी कविता फगुवा ह फगुवा

पुरनकी पतईया, फेड़वा गिरावे | जइसे गिरहथ, कवनो खेतवा निरावे || नईकी पतइया बदे, जगहा बनावे | जायेके बा एक दिन, इहे समझावे || चईती...

तारकेश्वर राय जी के लिखल तीन गो भोजपुरी कविता

भोजपुरी कविता फैसन के हावा बहल बा अइसन, एगो पछिमा हावा | फार के कपड़ा, पहिरल जाता नावा || कपड़ा पहिरल जाला, तन ढ़ाके के | पहिरल जाता...

देवेन्द्र कुमार राय जी के लिखल भोजपुरी कविता दारा राग

सुनी सभे आपन बा बतावतानी घर के प्रेम प्रीत राग सुनावतानी। भोरे पराती रोजे सुनाई बीबी भैरवी पंचम में गाईं। सातो सुर आ सातो थाट हरदम खोजे मेहरि घाट। जे...

तारकेश्वर राय जी के लिखल भोजपुरी कविता सालो भर प त...

घूमे आ बचवन के घुमावे आई रिश्ता आ नाता चिन्हावे आई ढेका जांत पीढ़ा आ मचिया एकरा के देखावे आई मम्मी पापा अंकल आ ऑन्टी , नाता एकरा सिवा...

देवेन्द्र कुमार राय जी के लिखल तीन गो भोजपुरी गीत आ...

महंगाई महंगाई अईसन कईले बा बेहाल कि नुन रोटी हो गईल मोहाल। माई के दूध सुखल बचवा के अतडी़ हमरा कमासुत के झुरा गईल गतरी, आगे बुझात नईखे होई...

देवेन्द्र कुमार राय जी के लिखल भोजपुरी कविता मुंह कहवां बोरीं

कह ए भोजपुरिया भईया हीक भ भोजन कहां झोरी कमाईल त मिलत नईखे कह मुंह कहवां बोरीं? कतना दिन ले आस लगवनी कुछ कटि जाई दिन मोर तुहीं कह...

डॉ. हरेश्वर राय जी के लिखल भोजपुरी कविता आइ हो दादा

सपना देखनीं भोरहरिया आइ हो दादा, मुखिया हो गइल मोर मेहरिया आइ हो दादा । हमरा दुअरा उमड़ रहल बा सउँसे गाँव जवार, लाग रहल बा देवीजी के नारा बारम्बार, डीजे बाजता...

देवेन्द्र कुमार राय जी के लिखल भोजपुरी कविता बेटा ह कि...

चालीस बरीस प अईसन भईल जमले बेटा बुढ़ऊ के अंगनाई, थरीया ढोल मजीरा बाजल बाजल सोहर में खुब शहनाई । ...

हरेश्वर राय जी के लिखल भोजपुरी कविता कमाइ दिहलस पपुआ

पढ़ि लिखि के का कइल भईया पढ़वईया, कमाइ दिहलस पपुआ खाँचा भर रुपईया। मंत्री बिधायकजी के खास भइल बड़ुए, गऊआँ के लफुअन के बॉस भइल बड़ुए, आ मुखियाजी के काँख के भइल...

डॉ. हरेश्वर राय जी के लिखल भोजपुरी कविता हमार जान ह...

हमार सान ह हमार पहचान ह भोजपुरी, हमार मतारी ह हमार जान ह भोजपुरी| इहे ह खेत, इहे खरिहान ह इहे ह सोखा, इहे सिवान ह, हमार सुरुज ह हमार चान...

हरेश्वर राय जी के लिखल लूटीं लूट मचल बा

लूटीं लूट मचल बा सगरो लूटीं लूट मचल बा। बाढ़ लूटीं, सूखा लूटीं राहत के लूटीं मिठाई, भूख लूटीं, पियास लूटीं लूटीं थोड़की महंगाई। वोट लूटीं, नोट लूटीं लूटीं चकाचक नारा, रैली...