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Tag: भोजपुरी कहावत

आन्हर गुरू बहीर चेला माँगे गुर ले आवे ढेला

गुरू आन्हर होखे आ बाहीर चेला होखे त काम बिगड़ जाला। गुरू चेला से गुड़ माँगत बड़े, चेला बाहीर बा तगुड़ के जगह...

आन देस के बकुआ आन देस में बकलोल

एक देस के आदमी दोसरा देस के रीती रिवाज से अनजान रहेला। उहाँ गइला पर ओकरा मूरुख बने के अधिक सम्भावना रहेला। 'बकुला' विदेशी...

आधा माघे कमर काँधे

भोजपुर क्षत्रे में माघ के आधा महीना बाद जाड़ा काम होखे लागेला। जवना कमर के लोग मुड़ी पर से ओढ़ेला ऊ कमर आधा माघ के...

आदमी में नउआ पंछी में कउआ

धूर्तता के ओर इसरा बाटे। आदमी में नउआ पंछी में कउआ के मतलब भइल आदमी में नाई (हजाम) आ पक्षी में कउआ के...

आगे नाथ ना पाछे पगहा

अइसन कहावत निरकुंश आदमी के बारे में कहल जाला। निरकुंश आदमी आहे साँढ़ अइसन स्वछन्द होला जेकरा नाक में ना नाथ होला ना...

आग लागल त कुँआ खोनाइल

खतरा से पहिले सावधानी के जरूरत होला। जदी कहीं आग लाग जा आ आग बुतावे खातिर लोग कुँआ खोने लागे त कुँआ तेयार होखे...

आँख के पुतरी

आपन आँख के पुतरी केकरा प्यारी न लागेले। आँख के पुतरी जइसन प्यारी अापन संतान होला। भोजपुर में बेटी आँख के पुतरी जइसन प्यारी...

अबरा के मेहरारू गाँव भर के भउजाई

कमजोर के मेहरारू से सभे माज़क करेला। अइसन बुझाला जे सारा समाज ओकर देवर लागत होखे आ ओसे माज़क कइल आपन अधिकार बुझात...

अबर घोड़ी के साँझे पेयान

जदी घोड़ी कमजोर होखे त निर्धारित समय से पहिले जतरा सुरु करे के परेला, काहें कि ओकरा धीमा चाल पर कवनो भरोसा ना रहेला...

अन्हरा सियार के पाकूहो दूलम

जीविका उपारजन करे के समरथाय ना रहला पर जिंदगी जिये खातिर साधारन चीज़ो दुर्लभ हो जला। सियार जदि अन्हर हो जाए त ओकरा पीपर-पकड़ी...

अनका के पाँडे दिन देले अपने चलेले भदरा में

दोसरा के उपदेस देबे के बेर सभे शिष्ट बन जला, बाकिर अपना बेर सभ शिष्टता भुला जाला। "परोपदेशे बेलायम्: शिष्टता सर्वे ...

अड़धेङ्गया के मारल

देखे मे स्वस्थ बाकिर काम से जी चुरावे वाला का ओर इसारा बा। ई उक्ति आलसी आदमी खातिर बा। अड़धेङ्गया लकवा से मिलत-जुलत एगो...

अकेले चना भाँड़ ना नू फोरेला

जीवन के हर क्षेत्र में सहजोग के ज़रूरत परेला काहे कि आदमी के शक्ति सीमित बा। कठिन कार्य के सम्पादन में सहजोग...

अकिला बुआ

ज़रूरत से ज्यादे चालाकी देखावे वाला पर व्य्ग्य बाटे। भोजपुरी प्रदेश में अकिला बुद्धिमती आ बुआ बाप के बहिन के कहल...

अंडा सिखावे बच्चा के चेंव चेंव कर

अल्पज्ञ जब कवनो विद्वान के सामने उपदेश करेला त ऊ हास्यास्पद बन जला जइसे मूक अंडा चे-चे करे वाला बच्चा के बोले के ढंग...

नाच ना जाने ऑंगनवे टेढ़ – भोजपुरी कहावत विश्लेषण

शारदानन्द प्रसाद के 'नाच ना जाने ऑंगनवे टेढ़' भोजपुरी लोकोक्ति भा कहावत के दोसरका संग्रह ह जवना में कहावतन के विवेचन भोजपुरी में कइल...

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