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सुजीत सिंह के लिखल तीन गो भोजपुरी गीत

मेडल लेवे में आगारी बेईमान,मक्कार,चोर,झूठा,घुंसखोर आउर लमहर भ्रष्टाचारी बा, लेकिन महानता आ समाजिकता के मेडल लेवे में आगारी बा। आज ले जेकरा से केहू के कवनो भलाई...

सुधर जा पड़ोसी – भोजपुरी गीत

बहुत हो गइल अब तS पड़ोसी सुधर जा सुधर जा सुधर जा हो.... तंग कर ना जन हमके बेसी सुधर जा सुधर जा सुधर जा हो.... कर...

आखिर केतना

हंसी हंसी कबले केतना बात सही हमनी दुनिया के एकतरफा घाट सही हमनी सहकल बहकल लोगवा के बा सह पर सह आखिर कबलें केतना मात...

डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना के भोजपुरी गीत ‘तीत मीठ’

केहू से हम तीत मीठ बतियाई काहे बिना कान से सुनले पतियाई काहे झूठ साँच के खेल हवे आगी जइसन बेमतलब के आपन हाथ जराई...

किरिनियाँ कले-कले कहाँ चलि जाले?

सारी सोनहुली सबेर झमका के, सँवकेरे रूप के अँजोर छिटिका के, जाये का बेर ढेर का अगुताले- किरिनियाँ कले-कले कहाँ चलि जाले? चलत-चलत बीच रहिया में हारल, दुपहरिया तेज...

देस हमार

पहिल जोति फूटे पूरुब से, भइल जगत उजियार बजे भैरवी किरन बेनु पंछी के बजे सितार माथ चढ़ावे किरन बेनु पंछी के बजे सितार माथ चढ़ावे चरन...

नाव खुले माँझी रे

पंछी चहके डेरात, कुनमुनात र्छवरा बा, फुलवा महके डेरात, गुनगुनात भँवरा बा, कुलबुलात भोर लुका, कुहरा के पहरा बा, कुहा खुल माँझी रे, नाव खुल होसियार, धार, लहर,...

आदमी

आदमी के हाथ में जब नाथ बाटे तब कवन चिंता प्रलय के साथ बाटे। उठ रहल आवाज-’’अब त हाथ रोक गोड़ में विज्ञान के अब कील ठोक ना...

कुहुकि-कुहुकि कुहकावे कोइलिया

कुहुकि-कुहुकि कुहकावे कोइलिया, कुहुकि-कुहुकि कुहुकावे।। पतझड़ आइल, उजड़ल बगिया, मधु ऋतु में टुसिआइल फुलुंगिया। इन हरियर-हरियर पलइन में, सुतल सनेहिया जगावे कोइलिया।। कुहुकि.....।। खिसिकल मधु-ऋतु, उठल बजरिया, चुवल कोंच, झर गइल...

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