सुजीत सिंह जी के लिखल तीन गो भोजपुरी कविता

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बाह रे जमाना…

बाह रे जमाना इ त,
हद हो गइल।
मेहरारू के आगे माई,
रदद् हो गइल।।

छोह मउगी से प्यार,
माई पावे दुत्कार।
माई बाटे मोहताज,
मेहर मुरीया के ताज।

ममतामयी माई आज,
बद्द हो गइल।
मेहरारू के आगे माई,
रदद् हो गइल।

दाल भात चली रात के…

माड़ो मटकोर गीत बेटी के बारात के,
काथा पूजा होई दाल भात चली रात के।

दुअरा पर भीरल हलुआई काम करताटे,
रखल बा डराम लइका पानी ओमे भरताटे।

जे बा से बेयस्त समय नइखे मुलाक़ात के,
काथा पूजा होइ दाल भात चली रात के।

डगरिन कहेली नेग मानर के पुजाइ चाहीं,
कहता बहिन सोना माटी के कोराइ चाहीं।

इहे बाटे रसम सगरो गाँव आ देहात के,
काथा पूजा होइ दाल भात चली रात के।

माई…

हमरा हियरा के तेहिं,
उदगार माई रे।
तोरा बिन लागे दुनिया,
आन्हार माई रे।

ममता के मूरत,
तुहीं सीरत के खजानवा।
जिनगी के राह तुहिं,
तोहसे जहानवा।

तेहिं हमरा ला बारे,
उपहार माई रे।
तोरा बिन लागे दुनिया,
आन्हार माई रे।

सुजीत सिंह(शिक्षक)
कन्या मध्य विद्यालय अपहर
ग्राम-सलखुआ
पो-अपहर
जिला-सारण
9661914483

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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