वाह! रे चिरईयाँ

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वाह! रे चिरईयाँ तोहर,कईन नसीब बा?।
उडी चली जाए उहवे,जहवासे प्रित बा।।….१

रोजे रोजे खोता बदले,रोजे रोजे ठाव हो।।
राखे जमिनियाँ पर, कभी कभार पाव हो।

बनावे ठेगाना सुन्दर,लागे जवन गाँव हो।।
बसमे तोहरा दुनियाँ के,सगरी चिज बा…….२

बुढवाँ लईकवन तहरा से ,प्यार बहुते करे।
केहु खियावे दाना, केहु पंख पकडे।।

केहुसे बैर नाही केहुसे मित(प्रित,टिस) बा…………३

दुश्मनसे हसी हसी बात करेके, ना तहे जरुरी।
बाटे नाही बन्धन कवनो,नाही कवनो मजबुरी।।

कर सरहद ओहरदोहर निश दिन उडी उडी।।
चले खातिर रहियाँ,नाही कवनो लीख बा…………४

डा. रबि भूषण प्रसाद चौरसिया

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