चिऊँटा हो चिऊँटा का खेल

चिँटा हो चिँटा का खेल : इस खेल में पाँच-सात लडके भाग लिया करते है जिनकी आयु पाँच से दस-बारह के बीच होती है। वे गोलाई में बैठ जाते है। प्रत्येक लडका एक दूसरे के कानो को अपने दाये तथा बाये दोनो हाथो से पकड कर अपनी ओर खीचता है। ऐसा करने मे ये लोग आगे और पीछे झुकते रहते है। एक दूसरे का कान जोर से खीचते हुए लडके यह ‘बोल’ बोलते है–

“चिँटा हो चिँटा
मामा के गगरिया,
काहे फोरल हो चिँटी।
मामा के झगरवा,

ए चिऊट ! तुमने मामा की गगरी क्यो फोडी ? इतना कहते ही लडके एक दूसरे का कान छोडकर मामा और मामी का झगडा छुड़ाने लगते हैं। अन्त मे लडके आपस मे ‘लाता-लूती’ करने लगते हैं और इस प्रकार से खेल समाप्त हो जाता है।

चिऊँटा हो चिऊँटा का खेल
चिँटा हो चिँटा का खेल

चिँटा हो चिँटा का यह खेल बच्चो मे बडा लोकप्रिय है। एक दूसरे का कान उमेठने में उन्हे बडो आनन्द मिलता हैओर ‘लाता-लूती’ में इसकी समाप्ति इसको पराकाष्ठा पर पहुँचा देती है। यह खेल दो लडको के बीच में भी हो सकता है। अत जहाँ भी दो-तीन बच्चे बैठ जाते है वहाँ इस खेल को प्रारम्भ कर देते है। छोडाव हो चिँटा॥”

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