रही रही के जिअरा में लागे ला

रही रही के जिअरा में लागे ला ठेस जी.
नौकरी के चक्कर में छुट गईल देश जी.
बहरा में रहत बानी हम मन मार के.
दर्शन दुर्लभ हो गईल गवुआ-जवार के.
मत पूछी शहर में जिनगी के लीला.
भोकत बा हमरे पर हमरे घर के पिला.
भाई हो जब से छुट गईल गवुआ के हवा.
जिनगी के आधार तबसे बनल दारु-दवा.
नइखे घोटात अब शहर के फर्जी घिवुआ.
थान के ताजा ढूध खातिर मलछ्त बा जिवुआ.
बस याद बन के रही गईल दलिया बघार के.
दर्शन दुर्लभ हो गईल गवुआ-जवार के.
मन पड़े जब कबो बचपन के दिनवा.
नाचे लागे आखिया के आगे हर सीनवा.
येहीजुग पॉप मुजिक के फूहड़पन में
आदमी घेरा गईल.
आपन बिरहा, चैता फगुआ गीत जाने
कहा हेरागईल.
सुख-चैन सबकुछ आपन बिक गईल कबाड़ में.
अपने के खोजत बानी ये शहर के भीड़-भाड़ में.
आदमी करत बा गुलामी येहिजुग कुकुर-सियार के.
दर्शन दुर्लभ हो गईल गवुआ-जवार के.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

18 − 6 =