500+ भोजपुरी मुहावरा आ ओकर माने /अर्थ | Bhojpuri Idioms with meaning

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500 सौ से ज्यादा भोजपुरी मुहावरा आ ओकर माने /अर्थ : जोगीरा डॉट कॉम के लगातार सार्थक कोशिश रही कि आपन गौरवशाली अतीत के फेर से परिभाषित कऽ के भोजपुरी के छवि के आपन देस के साथे-साथ दुनिया के बाकी हिस्सा में भी पुनर्जीवित कईल जाव। ई काम में रउरा सब के सहयोग के साथ जरुरी बा, एह से रउरा सभे से निहोरा बा की “जोगीरा डॉट कॉम” से जुड़ी आ आपन भासा भोजपुरी के आगे बढ़ावे में टीम जोगीरा के मदद करीं।

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जरूर देखीं: भोजपुरी शब्दकोश : Bhojpuri Dictionary

500+ भोजपुरी मुहावरा आ ओकर माने /अर्थ | Bhojpuri Idioms with meaning
500+ भोजपुरी मुहावरा आ ओकर माने /अर्थ | Bhojpuri Idioms with meaning

आखिर ह का भोजपुरी मुहावरा
मुहावरा अपना भोजपुरी भाषा के एगो अभिन्न अंग ह, एकरा बिना भोजपुरी भाषा भा साहित्य पूरा नइखे होसकत। भोजपुरी भासा के बोल चाल में मुहावरा के प्रयोग खूब होला।

परिभाषा: अइसन वाक्यांश जवन आपन साधारण अर्थ छोड़ के कवनो विशेष मतलब आ अर्थ की ओर ले जाव भा व्यक्त करो ओकरा के मुहावरा कहल जाला।

हमरा कम उमेद बा की केहू भोजपुरी अपना गावं-घरे में बूढ़ पुरनिया से मुहबरा ना सुनले होइ, लेकिन अब भोजपुरी मुहावरा के उपयोग कम होखत जा ता।

भोजपुरी मुहावरे और उनके अर्थ – Bhojpuri Idioms with meaning

  1. अँइठि के चलल – गर्व से चलना, अकड़ के चलना।
  2. अँखिगर भइल – अँखिगर (दिव्य दृष्टि वाला), मंत्र तंत्र जानने वाले ओझा
  3. अँखि देखारे कइल – प्रत्यक्ष काम करना।
  4. अँखिफोर भइल – चालाक या बुद्धिमान होना।
  5. अँखि मटकउअलि कइल – आँखें मटकाना, इशाराबाजी करना।
  6. अँगुरी देखावल – निंदा करना।
  7. अंडा सेवल – प्रतीक्षा करना।
  8. अँवटि घालल – परेशान करना।
  9. अँवासल – नवीन कोरी वस्तु विशेषतया मिट्टी के बर्तन का प्रथम प्रयोग करना
  10. अकिलि के पूरा भइल -अकिलि – अक्ल (अ.) मूर्ख होना।
  11. अकेल घर में छकेला मार – अकेले घर में खूब मौज़ उड़ाना।
  12. अखड़ेरे जान गइल – मुफ़्त में प्राण जाना।
  13. अखरल – दुख अनुभव करना।
  14. अछरंग लॉगावल – दोषारोपण करना।
  15. अधभेसरि भइल – मूर्ख होना।
  16. अनखुन खोजल – ज़बरदस्ती बहाना ढूँढ़ना।
  17. अनभल ताकल – बुराई चाहना।
  18. अनेरिया भइल – व्यर्थ होना, किसी काम का न होना।
  19. अंत ना पावल – भेद न पाना।
  20. अफनाइल – छक जाना।
  21. अरकल बथुआ बिटोरल – निरर्थक वस्तुओं का संग्रह
  22. अलहदी भइल – सुस्त होना।
  23. अल्हड़ भइल – अनुभव शून्य होना।
  24. ऑन का बल पर फउकल – किसी दूसरे का सहारा पाकर बहुत बढ़ -चढ़ कर बोलना।
  25. ऑसॉरा दिहल – आश्रय देना, वचन देना।
  26. आँखि आइलि – आँखों को उठना।
  27. आँखि के पुतरी भइल – अत्यंत प्यारा होना।
  28. आँखि खुलल – आँख खुलना, बुद्धिमान होना।
  29. आँखि देखावल – आँख दिखाना, धमकी देना
  30. आँखि नीचे कइल – लज्जा करना।
  31. आँखि फेरल – मित्रता तोड़ना, प्रतिकूल होना।
  32. आँखि में राखल – यत्न से रखना।
  33. आँखि से भादो खेपल – कमज़ोरी दिखलाना।
  34. आँट लिहल – भेद लेना।
  35. आँवक में आइल – क़ब्जे में आना।
  36. आग पाछ जानल – भूत भविष्य जानना।
  37. आगि बरिसल – बहुत गर्मी पड़ना, लू चलना।
  38. आगी में मूतल – आग में पेशाब करना, अत्याचार करना।
  39. आगो मागो कइल – मूर्खता करना।
  40. आन्ही उठावल – हलचल करना।
  41. आन्ही भइल – तेज़ होना।
  42. आपन खून भइल – अपने वंश का होना, सगोत्री होना।
  43. आपन घर भइल – आराम की जगह होना; संकोच का स्थान न होना।
  44. आफति ढाहल -उपद्रव मचाना।
  45. आम दरफ भइल – आम दरफ = आमद -रफ़्त। घनिष्टता होना।
  46. आमे मछरी भेंट भइल – असंभव कार्य का संभव हो जाना।
  47. आल्हा गावल – अपना वृत्तांत सुनाना।
  48. आस टूटल – आशा भंग होना।
  49. आसन जमल – बैठने में स्थिर भाव आना।
  50. आसन डिगल – चित्त चलायमान हो जाना।
  51. आसन दीहल – सत्कारार्थ बैठने के लिए कोई वस्तु रख देना या बतला देना।
  52. आसामी बुझल – अपने वश का समझना।
  53. आहि दाओ भइल – मेहरा होना।
  54. इमान से कहल – सच कहना।
  55. उकठल – सूख जाना।
  56. उघटा पुरान कइल – गाली गलौज़ करना।
  57. उजड्ड भइल – मूर्ख होना।
  58. उटुकार कइल – उभाड़ना।
  59. उड़त चिरई के हर्दी लगावल – बहुत चालाक होना।
  60. उडॉक भइल -चालाक होना।
  61. एक पेट के भइल – सहोदर भ्राता होना।
  62. ओठ बिदोरल – होंठ बिचकाना; मूर्खता प्रदर्शित करना।
  63. ओनइस भइल – कम होना।
  64. कंजड़ भइल – कंजड़ = जाति विशेष। कंजूस होना, दरिद्र स्वभाव का होना।
  65. कंठ खुलल – आवाज़ निकलना।
  66. कंठागर कइल – कठस्थ करना।
  67. किंकुरी मारल – सिकुड़ जाना, हतोत्साह होना।
  68. कुँआँ में भाँग घोराइल – किसी वर्ग या गाँव के सब लोगों का मतिभ्रष्ट हो जाना।
  69. कुँइआँ में गिरल – आचरण -भ्रष्ट होना, पतनोन्मुख होना।
  70. केंचुलि बदलल – पोशाक बदलना।
  71. कउआ उचरल – कौए का घर पर आकर बार -बार काँव -गाँव शब्द उच्चारण करना; आगंतुक अतिथि की सूचना मिलना।
  72. कउआ कान ले गइल – केवल सुनी सुनाई बात पर बिना किसी जाँच पड़ताल के विश्वास करन लेना।
  73. कउआ हंकनी भइल – मूर्ख होना।
  74. कचरकूट कइल या भइल इच्छापूर्ण भोजन करना, अत्यधिक भोग विलास करना।
  75. कनखियावल – इशारा करना।
  76. करकच कइल – वितंडाबाद करना।
  77. करकर कइल – शोर करना, झगड़ा करना।
  78. करज उतारल – उधार बेबाक करना।
  79. करियवा बादरि भइल – लाभ होना।
  80. करेजा भइल – प्यार होना, हिम्मत होना।
  81. कलई खुलल – भेद खुलना।
  82. कस में कइल – वश में करना।
  83. कसरि आह भइल – मामूली तबीयत खराब होना।
  84. कसरि निकालल – बदला लेना।
  85. कॉपार खाइल – सिर खाना।
  86. कॉपार भारी भइल – सिर दर्द होना।
  87. कॉपारे सनीचर चढ़ल – अभागा होना।
  88. कॉवॉर दिहल – वह खाना जो कुत्ते आदि को दिया जाता है।
  89. कॉसाई का खूटा बान्हल – निष्ठुर के पाले पड़ना।
  90. कॉसाई भइल – दुष्ट प्रकृति का होना।
  91. कागद के घर भइल काग़ज़ की नाव होना।
  92. कान अँइठल – सज़ा देना।
  93. कान ओड़ल – ध्यान -पूर्वक किसी बात को सुनना।
  94. काकाटल – बढ़ कर होना।
  95. कान फुकवावल – शिष्य होना।
  96. कान में रुई डालल – अनसनी कर देना।
  97. काम कइल – मतलब निकालना।
  98. काम बनल – बात बनना।
  99. काम में नाधल काम में लगाना।
  100. कारकुन भइल कारकुन = (फ़ा.) प्रबंधकर्ता।
  101. किछु कइ दिहल – जादू टोना कर देना।
  102. किरिन फुटल – सूर्योदय होना
  103. कुकुरहो कइल – कुत्तों सा झगड़ा करना।
  104. कुचुराई कइल – निंदा करना।
  105. कुठाँवे मारल – मर्म -स्थान पर मारना।
  106. कुफुत कइल या नाधल – आफ़त करना
  107. कुफुत में डालल – आफ़त में डालना।
  108. कुस्ती खाइल – कुश्ती में हार जाना।
  109. कुस्ती मारल – कुश्ती मारना।
  110. कोदो देके पढ़ल – कोदो (एक प्रकार का निम्न श्रेणी का अन्न) गुरु को देकर पढ़ना। मुफ्त में पढ़ना।
  111. कोल्हू के बयल भइल – बहुत कठिन परिश्रम करने वाला होना
  112. खंडलिचि देखल – खंडलिचि = खंजन पक्षी
  113. खसी चॉढ़ावल – बकरे को बलिदान चढ़ाना।
  114. खाँचड़ भइल – मूर्ख होना
  115. खोइछा भरल – आँचल के कोने में चावल, मिठाई, हल्दी आदि मंगल द्रव्य डालना।
  116. खखुआ के चढ़ि बइठल – क्रुद्ध होकर टूट पड़ना।
  117. खटराग गइल – झंझट करना
  118. खटराग लगावल या बढ़ावल – झंझट लगाना या बढ़ाना।
  119. खटिआ तूरल – निश्चित होकर आराम करना।
  120. खटिआ पर परल – दिन रात सोते रहना।
  121. खड़मंडल कइल – घर में उपद्रव होना।
  122. खद गोबर भइल – गंदा होना।
  123. खरमेटाव कइल – जलपान करना।
  124. खरवा खात पनियाँ पीयत चलल – धीरे -धीरे (गाय सा) चलना, ।
  125. खॉखाइल – बे -सब होना।
  126. खा घालल – मार डालना।
  127. खिआल आइल – याद आना
  128. खिआल कइल – खद करना।
  129. खिआल रहल – याद रहना।
  130. खिआल से उतरल – विस्मृत हो जाना।
  131. खिलल – प्रसन्न होना।
  132. खून खउलल – अत्यंत क्रोधित होना।
  133. खेत कॉमाइल – खाद आदि डालकर खेत को उपजा बनाना।
  134. खेती मॉराइल – फ़सल नष्ट होना।
  135. खेदा खेदी कइल – पीछा करना।
  136. खेलि बिगाड़ल काम ख़राब करना।
  137. खेलि बूझल – साधारण या तुच्छ समझना।
  138. खोदि खोदि के पुछल – अच्छी तरह से पूछना।
  139. गँगाजल उठावल – गंगा की क़सम खाना।
  140. गंगालाभ भइल – मृत्यु को प्राप्त हो जाना।
  141. गँठि जोराव कइल – विवाह करना
  142. गठि जोराव भइल – विवाह होना।
  143. गँव से कइल – युक्ति होना।
  144. गँव से कहल – धीरे से कहना।
  145. गउद भइल – मूर्ख होना।
  146. गटकावल – भोजन करना।
  147. गटकि गइल – निगल जाना।
  148. गड़ही के कमल भइल – निकृष्ट स्थान में उत्तम वस्तु का पैदा होना।
  149. गधभेरि भइल – गोधूली होना।
  150. गप उड़ल – झूठी ख़बर फैलना।
  151. गपचि घालल – निगल जाना।
  152. गप सड़ाका कइल – गपशप करना।
  153. गरद उड़ल – धूल में मिलाना
  154. गरदनि टीपल – गला दबा कर मार डालना।
  155. गरद फाँकल – व्यर्थ घूमना।
  156. गरह कटल – अरिष्ट दूर होना।
  157. गली गली मारल फिरल – जीविका के लिए इधर -उधर भटकना।
  158. गीति गावल – प्रशंसा करना।
  159. गुर गोबर भइल – गुड़ का गोबर होना।
  160. गुलरी के फूल परल – लोगों का विश्वास है कि यदि किसी वस्तु में गूलर का फूल पड़ जाय तो वह वस्तु कभी नहीं घटेगी अपितु बढ़ती ही जायगी।
  161. गोड़ छूटल – भयभीत होकर भाग जाना।
  162. गोड़ के धोवन भइल – अत्यंत तुच्छ होना।
  163. गोता खाइल – धोखे में आना
  164. गोधन कुटाइल – खूब पीटा जाना।
  165. गोली मारल – त्याग देना।
  166. घाँख भइल – चालाक होना
  167. घोंघा भइल – बेवकूफ होना
  168. घघोटल – उदंडता पूर्वक किसी का जवाब देना।
  169. घर उजरल – परिवार की दशा बिगड़ना।
  170. घरकच में फँसल – माया -मोह में पड़ना।
  171. घर बसल – विवाह होना।
  172. घर बिगारल – घर में फूट फैलाना।
  173. घर भरल – घर में धन इकट्ठा करना।
  174. घाठा परल – अभ्यास पड़ना।
  175. घाड़ारी परल – गहरा चिह्न पड़ना।
  176. घाम खाइल – गरमी के लिए धूप में रहना
  177. घासि छिलल – खुरपे से घास को जड़ के पास से काटना।
  178. घिधिआइल – विनय करना।
  179. घीव के दिया जरल कामना पूरी होना।
  180. घुरहू कतवारू कइल – निम्न कोटि का मनुष्य समझना।
  181. घुर्चिआह भइल – धूर्त होना।
  182. चाँपल – अच्छा भोजन इच्छापूर्वक खाना।
  183. चिंउटी के चाल चलल – बहुत धीरे -धीरे चलना
  184. चेउँ बोलल या बोलावल – नम्रता स्वीकार करना।
  185. चोंकरल – भैंस के चिल्लाने को भोजपुरी में ‘चोंकरल’ कहते हैं। व्यंग्य में चिल्लाने के लिए भी इसका प्रयोग होता है।
  186. चउलि कइल – हँसी -दिल्लगी करना।
  187. चकचोन्हर भइल – मूर्ख होना।
  188. चटक मटक भइल – स्वादिष्ट भोजन बनाना।
  189. चमइनी से पेट छॉपावल – जानने वाले से कोई बात छिपाना।
  190. चमरई कइल – नीचता करना।
  191. चमार सियार भइल – नीच प्रवृत्ति का होना
  192. चलबीधर भइल – चंचल अथवा तेज़ होना।
  193. चलि बसल – मर जाना।
  194. चॉपाट भइल – मूर्ख होना।
  195. गोधन कुटाइल – खूब पीटा जाना।
  196. गोली मारल – त्याग देना।
  197. घाँख भइल – चालाक होना
  198. घोंघा भइल – बेवकूफ होना
  199. घघोटल – उदंडता पूर्वक किसी का जवाब देना।
  200. घर उजरल – परिवार की दशा बिगड़ना।
  201. घरकच में फँसल – माया -मोह में पड़ना।
  202. घर बसल – विवाह होना।
  203. घर बिगारल – घर में फूट फैलाना।
  204. घर भरल – घर में धन इकट्ठा करना।
  205. घाठा परल – अभ्यास पड़ना।
  206. घाड़ारी परल – गहरा चिह्न पड़ना।
  207. घाम खाइल – गरमी के लिए धूप में रहना
  208. घासि छिलल – खुरपे से घास को जड़ के पास से काटना।
  209. घिधिआइल – विनय करना।
  210. घीव के दिया जरल कामना पूरी होना।
  211. घुरहू कतवारू कइल – निम्न कोटि का मनुष्य समझना।
  212. घुर्चिआह भइल – धूर्त होना।
  213. चाँपल – अच्छा भोजन इच्छापूर्वक खाना।
  214. चिंउटी के चाल चलल – बहुत धीरे -धीरे चलना
  215. चेउँ बोलल या बोलावल – नम्रता स्वीकार करना।
  216. चोंकरल – भैंस के चिल्लाने को भोजपुरी में ‘चोंकरल’ कहते हैं। व्यंग्य में चिल्लाने के लिए भी इसका प्रयोग होता है।
  217. चउलि कइल – हँसी -दिल्लगी करना।
  218. चकचोन्हर भइल – मूर्ख होना।
  219. चटक मटक भइल – स्वादिष्ट भोजन बनाना।
  220. चमइनी से पेट छॉपावल – जानने वाले से कोई बात छिपाना।
  221. चमरई कइल – नीचता करना।
  222. चमार सियार भइल – नीच प्रवृत्ति का होना
  223. चलबीधर भइल – चंचल अथवा तेज़ होना।
  224. चलि बसल – मर जाना।
  225. चॉपाट भइल – मूर्ख होना।
  226. चानी कटल – खर्च करना
  227. चिरुआ भरि पानी में डूबि मरल – चुल्लू भर पानी में डूब मरना
  228. चुमल चाटल – प्यार करना।
  229. चूरि फूटल – विधवा होना।
  230. चेट गॉरॉमावल – रिश्वत देना
  231. चेला मँडल – शिष्य बनाना।
  232. चोन्हा कइल – नख़रा करना।
  233. छनकाह भइल – संदेह करने वाला होना
  234. छरिआइल – खूब रोना; क्रोधित होना
  235. छाती पर कोदो दरल – किसी को दिखला कर कोई ऐसा काम करना जिससे उसे ईर्ष्या या ताप हो।
  236. छाती पीटल – अफ़सोस होना।
  237. छिछिआइल फिरल – मारा -मारा फिरना।
  238. छोह कइल – प्रेम करना।
  239. जंगल में मंगल भइल – सुनसान में चलह -पहल का होना।
  240. जाँगर ठेठावल – घोर शारीरिक परिश्रम करना।
  241. जग जीतल – संसार जीतना, महत्त्वपूर्ण कार्य करना।
  242. जर उतरल – बखार दर होना।
  243. जरि खोदल – विनाश करना।
  244. जलंधर भइल – अत्यंत वृद्ध होना
  245. जॉनमार भइल – अत्यंत सुंदर होना।
  246. जॉपाट भइल -मूर्ख होना।
  247. जॉबान हारल – वचन देना।
  248. जॉमावड़ा भइल – भीड़ होना
  249. जान छोड़ावल – प्राण बचाना।
  250. जान जोखिम में परल – आपत्ति में पड़ना।
  251. जामा थउसल – पूँजी नष्ट हो जाना
  252. जिऑका लॉगावल – भरण -पोषण का प्रबंध करना
  253. जीअत माँछी घोंटल – सरासर बेईमानी करना।
  254. जीभी में पानी गिरल – जीभ में से पानी गिरना, लालच हो आना।
  255. जीव के गाँहक भइल – प्राण लेने पर उतारू होना।
  256. जीव चोरावल – किसी काम से भागना।
  257. जीव छोड़ल – निराश होना; साहस गँवाना।
  258. जीव दीहल – प्राण देना
  259. जीव भारी भइल – तबीयत अच्छी न होना।
  260. जीव साँसति में परल – प्राण संकट में पड़ना।
  261. जुता खाइल – बुरा -भला सुनना
  262. जूठन गिरावल – भोजन करना।
  263. जेहन खुलल – बुद्धि का विकास होना।
  264. जोड़ तोड़ लागल – समान शक्ति का होना।
  265. टरकावल – बहाना करना।
  266. टटर् कइल – चिल्लाना, शोर गुल मचाना।
  267. टापत रहल – भूखे रहना।
  268. टापि गइल – आगे निकल जाना
  269. टिबोली बोलल – व्यंग्य बोलना
  270. टिमटाम बढ़ावल या राखल – ठाट -बाट रखना।
  271. टेढुआइल – नाराज होना।
  272. टोकारी पारल – शुभ मुहूर्त पर यात्रा करने वाले व्यक्ति को टोकना।
  273. टोह राखल – देखभाल रखना।
  274. ठाँव कुठाँव लागल – मर्मस्थल में चोट पहुँचना।
  275. ठकठेनि कइल – हठ करना।
  276. ठकुरई देखावल – शान दिखलाना
  277. ठटि के खाइल – खूब पेट भर खाना।
  278. ठन् ठन् गोपाल भइल – कुछ भी पास न होना।
  279. ठप भइल – बंद हो जाना; समाप्त हो जाना।
  280. ठहर दिहल – चौका लगाना।
  281. ठाट कइल – ढाँचा तैयार करना।
  282. ठाड़ा भइल – खड़ा होना; प्रतिनिधित्व के लिए पर्चा दाखिल करना।
  283. ठेकान लागल – प्रबंध होना;
  284. ठोकच बइठल – दुबला हो जाना।
  285. ठोकर खाइल – लात सहना।
  286. ठोठ मलल – नीचा दिखाना
  287. ठंडा बाजल – किसी की चलती होना।
  288. डॉक डाँक कइल – चिल्लाना; शोर करना।
  289. डाँड़ परल – नुकसान होना।
  290. डाँड़ सोझ कइल – लेटकर थकावट मिटाना।
  291. डाँफि दिहल – डरा देना।
  292. डहर धइल – चल देना।
  293. डहरि बातावल – रास्ता दिखलाना।
  294. डुगडुगी पिटवावल – खबर जनाना।
  295. डुबल उतराइल – सोच में पड़ जाना।
  296. डोरा फेंकल – प्रेम में फंसाना।
  297. डोल डाल कइल – शौच होना।
  298. डोला निकालल – दुलहिन की विदाई करना।
  299. ढिंढोरा पीटल – चारों ओर घोषित करना।
  300. ढींढ गिरल – गर्भपात होना।
  301. ढींढ़ निकलल – पेट निकलना।
  302. ढींढ़ रहल – गर्भ रहना।
  303. ढपोर संख भइल – मूर्ख होना; असत्यभाषी होना।
  304. ढब धाराइल – आदत पड़ जाना।
  305. ढिमिलात फिरल – गिरते फिरना
  306. ढिमिलिआ खाइल – सिरे के बाल उलट कर गिर पड़ना; ठोकर खाना।
  307. ढुका लागल – छिपकर देखना।
  308. तॉवरि आइल – चक्कर आना।
  309. तकथ उलटल – किसी प्रबंध का नष्ट -भ्रष्ट हो जाना।
  310. तपल – धाक जमना; प्रभाव बढ़ना।
  311. तमखल – उत्तेजित होना।
  312. तहबन सरकावल – बेइज्जत करना।
  313. तॉरॉवा चाटल – बहुत ख़ुशामद करना।
  314. तॉरॉवा धोई के पीअल – अत्यंत सेवा -सुश्रूषा करना।
  315. ताक लागावल – घात लगाना।
  316. तार समुझल – अत्यंत आवश्यक समझना।
  317. तारीख परल – तिथि नियत होना।
  318. तारु चटकल – प्यास से मुँह सूखना।
  319. ताल ठोकल – लड़ने के लिए ललकारना।
  320. ताव देखावल – आँख दिखाना।
  321. ताव लागल – प्रबल इच्छा होना।
  322. तिखारल – बार -बार पूछना, अच्छी तरह से पूछना।
  323. तिगड़मबाजी कइल – तिकड़मबाजी करना
  324. तितिर बितिर भइल – अलग -बिलग होना।
  325. तीत मीठ भइल – तीता मीठा होना।
  326. तीनि तेरह भइल – तितर -बितर हो जाना।
  327. तुफान लेसल – आफ़त करना।
  328. तेल अबटन कइल – सेवा करना।
  329. तोड़ा गनल – बहुत -सा द्रव्य देना।
  330. तोन पचकल – मोटाई दूर होना।
  331. थपरी पारल – हँसी उड़ाना।
  332. थरथरा गइल – डर जाना।
  333. थाप रहल – विश्वास होना
  334. थाह लागल – गहराई का पता लगना।
  335. थुकि के चाटल – कहकर मुकर जाना
  336. थुके सातू सानल – बहुत थोड़ी सामग्री लगाकर बड़ा कार्य पूरा करने चलना। दाँ
  337. काटल रोटी भइल – अत्यंत घनिष्टता होना।
  338. दाँत बइठल – मृत्यु के सत्रिकट होना।
  339. दउरा में डेग डालल – धीरे -धीरे चलते हैं।
  340. दम लिहल – विश्राम करना।
  341. दाहिनी बाँहि भइल – सहायक होना।
  342. दहिने भइल – प्रसन्न होना।
  343. दही में के मूसर भइल – बीच में कूद पड़ना।
  344. दाना लागल – जब किसी का नौकर खा -पीकर मोटा ताजा हो जाता है और काम करने में टाल – मटोल करने लगता है तो इस मुहावरे का प्रयोग होता है।
  345. दाब मानल – वश में रहना।
  346. दाव चूकल – मौका खोना।
  347. दाव ताकल – अवसर की ताक में रहना।
  348. दिआ बती के बेरा भइल – संध्या का समय होना।
  349. दिन काटल – समय बिताना।
  350. दिल जमल – जी लगना।
  351. दुआर के माटी कोड़ल – बार -बार द्वार पर आना।
  352. दुइ नाव पर चढ़ल – भिन्न पक्षों का अवलंबन करना
  353. दुधा के दाँत ना टुटल – ज्ञान और अनुभव न होना।
  354. दुरदुरावल – तिरस्कार करना।
  355. दूध के दूध पानी के पानी कइल – ठीक -ठीक न्याय करना।
  356. दूध पूत बनल रहल – सब प्रकार के सुखी और समृद्धशाली होना
  357. देखा देखी भइल – भेंट होना।
  358. देव बरिसल – पानी बरसना।
  359. देवालि फानल – दूसरे की स्त्री से अनुचित संबंध रखना
  360. दोस दिहल – लांछन लगाना।
  361. धुंधुकारी भइल – धुंधुकारी अत्यंत दुष्ट प्रकृति का राजपुत्र था।
  362. धक से जीव भइल – डर से जी दहल जाला।
  363. धाक बइठल – आतंक छाना।
  364. धुआँ उड़ावल – नाश करना।
  365. धुनी जागावल – साधुओं का अपने सामने आग जलाना; साधु होना
  366. धुनी रामावल – साधु हो जाना।
  367. धुरि चाटल – विनती करना।
  368. धुरी में जेंवरि बरल – व्यर्थ परिश्रम करनान
  369. कवाइनि कइल – परेशान करना
  370. नथुनी उतारल – कुमारी का कौमार्य नष्ट करना।
  371. नमक मरिचि मिलावल – किसी बात को बढ़ा कर कहना।
  372. नाक पर खिसि रहल – बात बात पर क्रोध करना
  373. नाक में दम आइल – बहुत अधिक दुखी होना
  374. नाक में दम कइल – बहुत कष्ट देना
  375. नाक रगरल – मित्रत करना
  376. नाके काने पहिरल – सुरक्षित रखना
  377. नागा भइल – अंतर डालना।
  378. नागिनि भइल – बहुत ही भयंकर स्वभाव का होना।
  379. नाच नाचावल – परेशान करना।
  380. नाथि दिहल – परेशान करके दबा देना
  381. नाभ भइल – सर्वश्रेष्ठ होना
  382. निअति में फरक परल – बुराई सूझना
  383. निनाबे का फेर में परल – झंझट में पड़ना।
  384. नीच ँच देखावल – समझाना बुझाना
  385. नून के सरियत दिहल – किए हुए उपकार का बदला देना।
  386. पंचाइति कइल – झगड़े का निबटारा करना।
  387. पॉखि जामल – चालाक होना।
  388. पाँचो अँगुरी घीव में भइल – अत्यंत आनंद से रहना।
  389. पक पकाइल – व्यर्थ बोलना।
  390. पगरी उतारल – बेइज्जती करना।
  391. पतइ खरकल – आशंका की बात होना।
  392. पतल परोसल – भोजन सहित पत्तल सामने रखना।
  393. पत्थल के करेजा भइल – कठोर होना
  394. पॉरॉसाद पावल – भोजन करना।
  395. पानी में आगि लगावल – असंभव को संभव करना
  396. पानी राखल – इज्ज़त बचाना।
  397. पाम्ही आइल – मूंछ आना प्रारंभ होना।
  398. पाव लागल – प्रणाम करना।
  399. पूआ पर चीनी परल – सौभाग्य का लगातार आना।
  400. पूका फोरि के रोवल – फूट -फूट कर रोना।
  401. पेट देखावल – ग़रीबी प्रदर्शित करना।
  402. फींचल – खूब डाटना।
  403. फऊकल – उछल -कूद मचाना।
  404. फट फट कइल – कहा -सुनी करना।
  405. फुटानी छाँटल – गर्व की बातें करना।
  406. फुलल फलल रहल – धनधान्य से पूर्ण रहना
  407. फूहर पातर कहल – गाली देना।
  408. फेफरी परल – चिंता, भय, थकावट तथा दुःख आदि से मुंह सूख जाना
  409. फेनाइल – क्रोधित होना
  410. फेर में परल – परेशानी में पड़ना
  411. फेरहाई कइल – दलाली करना
  412. बक बक कइल – शोर मचाना।
  413. बजर परल – अत्यंत कष्ट का आ जाना।
  414. बतकट भइल – जवाब देने वाला होना।
  415. बम बोलल – दिवाला हो जाना
  416. बहेतु भइल – आवारा होना।
  417. बात आइल – प्रसंग आना।
  418. बात के बतंगड़ कइल – छोटी -सी बात का निष्फल होना।
  419. बात चलल – चर्चा छिड़ना।
  420. बात टारल – सुनी अनसुनी करना।
  421. बात ठहरलि – मामला तय होना।
  422. बात डालल – विषय उपस्थित करना।
  423. बात ना कइल – घमंड के मारे न बोलना।
  424. बात ना पुछल – तुच्छ समझना।
  425. बीच डलल – विभेद करना।
  426. बीच में कूदल – अनावश्यक हस्तक्षेप करना
  427. बीच राखल – भेद रखना।
  428. बे पानी के लोटा भइल – किसी के ज़रा से कहने पर ही अपना मत या विचार बदल देना।
  429. बोली बोलल – मज़ाक़ करना
  430. भेंभा बावल – फूट -फूट कर रोना।
  431. भरि आँखि देखल – अच्छी तरह देखना।
  432. भरि मुँह बोलल – अच्छी तरह से बातें करना।
  433. भरि मुँह माटी लिहल – परास्त हो जाना।
  434. भॉदॉसाँइ परल – नष्ट होना।
  435. भादो के बेंग भइल – अत्यंत मोटा होना
  436. भालु भइल – सिर के बाल का बहुत बढ़ जाना।
  437. भाव गिरल – किसी चीज़ का दाम घट जाना।
  438. भाव चढ़ल – दर तेज़ होना।
  439. माँग में कोइला दरल – विधवा होने के लिए अभिशाप देना।
  440. माँथे मउर चढ़ल – विवाह होना।
  441. मुँह खुलल – उदंडता -पूर्वक बातें करने की आदत पड़ना।
  442. मुँह खोलवावल – किसी को उदंडता पूर्वक बातें करने के लिए बाध्य करना।
  443. मुँह जोहल – सदा आज्ञा की इंतज़ारी करते रहना
  444. मुँह ताकल – पर मुखापेक्षी होना
  445. मुँह देखल – दर्पण में अपने मुँह का प्रतिबिंब देखना।
  446. मुँह देखावल – सामने आना।
  447. मुँह देखि के बतिआवल – खुशामद करना।
  448. मुँहें करिखा लागल – कलंक का टीका लगना।
  449. मुँहे माटी लागल – अपमानित होना।
  450. मुँहें मुँहें भइल – प्रकाशित होना।
  451. मन के बात मने में रहल – इच्छा परी न होना।
  452. मन के मइल भइल – कपटी होना।
  453. मन डोलल – मन का चलायमान होना
  454. मन तुरल – हतोत्साह करना।
  455. मन पाकल – दुखी होना
  456. मन फाटल – मन हट जाना।
  457. मन बढ़ल – उत्साह होना
  458. मनबढ़ भइल – धृष्ट होना।
  459. मन भारी भइल – दुखी होना।
  460. मन मानल – मन में शांति होना।
  461. मन में बसल – अच्छा लगना।
  462. मनमोटाव भइल – शत्रुता होना।
  463. मन राखल – खुश करना।
  464. मन लागल – दत्तचित्त होना।
  465. मन लागावल – चित्त देना।
  466. मनसाएन कइल – या राखल – बातचीत आदि के द्वारा इस प्रकार किसी का मन बहलाना जिससे उसे अकेले होने का कष्ट न जान पड़े।
  467. मनसुबा बान्हल – हिम्मत करना।
  468. मन से उतरल – मन में आदर भाव न रह जाना।
  469. मन से उतारल – तिरस्कार करना।
  470. मन हरिअर भइल – मन प्रसन्न होना।
  471. मन हारल – थक जाना
  472. मरम जानल – भेद जानना।
  473. माटी कइल – नष्ट करना।
  474. माटी के मूरति भइल – बेवकूफ़ होना
  475. माटी लागल – मरना।
  476. मारल मारल फिरल – व्यर्थ घूमना फिरना
  477. माल उड़ावल – धन का अपव्यय करना।
  478. माल मारल – पराया धन हड़प जाना।
  479. माला फेरल – बार-बार नाम लेना।
  480. मुअला पर कोदो दरल – परेशान आदमी को और परेशान करना।
  481. मुठि चालावल – जाद करना।
  482. मुसरचन्न भइल – मूर्ख होना।
  483. मैदान गइल – शौचादि के लिए जाना।
  484. मोट पातर भइल – वैमनस्य होना।
  485. मोटाई झरल – अभिमान चूर्ण होना।
  486. रस भिनल – मज़े का समय आना।
  487. राज रजल – आनन्द करना।
  488. राम राम के बेरा भइल – प्रातःकाल का होना।
  489. राम नाम सत्त भइल – मृत्यु को प्राप्त हो जाना।
  490. रासातल में पहुँचावल – बरबाद कर देना।
  491. रुपया गलल – व्यर्थ व्यय होना।
  492. रेखिया उठान भइल – युवावस्था को प्राप्त होना।
  493. रोवाँ गिरावल – अत्यंत दुखी होना
  494. रोवाँ ना टेढ़ कइल – कुछ भी न कर सकना।
  495. लंगोटिया यार भइल – लड़कपन का यार होना।
  496. लट्ट भइल – मोहित होना।
  497. लब लब कइल – शीघ्रता करना
  498. लरिआह भइल – पीछे लगने वाला होना।
  499. लरिक चिबुलई कइल – चंचलता करना।
  500. लरिकाहि कइल – मूर्खता करना।
  501. लहति लागल – सुअवसर का प्राप्त होना
  502. लहरदार भइल – तड़क -भड़क का होना।
  503. लाज राखल – प्रतिष्ठा बचाना।
  504. लात खाइल – मार खाना, अपमानित होना।
  505. लाम काफ बतिआवल – अतिशयोक्ति पूर्ण बातें करना।
  506. लाल बुझक्कड़ भइल – होशियार होना
  507. लिखन्त रहल – भाग्य होना।
  508. लीपि पोती के बराबर कइल – चौपट करना।
  509. लोआ पोआ भइल – अत्यंत कोमल होना।
  510. लोहा मानल – हार मानना।
  511. सँझवति देखावल – दीपक जलाना।
  512. समहुत कइल – शुभ मुहूर्त में कार्यारंभ करना।
  513. सिआरिनि फेंकरल – अपसगुन होना।
  514. सीरनेति भइल – श्रेष्ठ होना।
  515. सेनुर धोआइल – विधवा हो जाना।
  516. हँसी उड़ावल – उपहास करना।
  517. हाँका हाँकी कइल – होड़ लगाना।
  518. हाँचड़ि कइल या हाँचड़ि नाधल – हल्ला मचाना, शोर करना।
  519. हाँफि कुँहि कइल – बढ़ावा देकर काम निकालना
  520. हुँका पानी भइल – जातिगत व्यवहार होना
  521. हँकारी भरल – स्वीकार करना।
  522. हक के पहुँचावल – बरबाद कर देना।
  523. हक पर रहल – न्याय -पक्ष का अवलंबन करना।
  524. हक पर लड़ल – अपने न्याययुक्त अधिकार के लिए प्रयत्न करना।
  525. हक मराइल – स्वत्व की हानि होना।
  526. हठ कइल – जिद्द करना।
  527. हड़बड़ कइल – शीघ्रता करना।
  528. हथ छुटु भइल – मारने वाला होना।
  529. हथलपक भइल – चोर होना।
  530. हथिआवल – कब्जा कर लेना।
  531. हद बान्हल – सीमा निर्धारित करना।
  532. हबडंगर भइल – व्यर्थ होना।
  533. हरमुठइ कइल – मूर्खता करना।
  534. हॉजॉमाँ बिगड़ल – अन्न न पचना।
  535. हॉजॉमति भइल – मार पड़ना।
  536. हॉरॉइ फानल – बढ़कर होना; जुताई की कूड़ शुरू करना
  537. हॉलॉकाभइल – परेशान होना।
  538. हॉवा में उड़ल – अफ़वाह की बातों पर विश्वास करना
  539. हाँकार परल – बुलाने के लिए आवाज़ लगाना।
  540. हक मारल – किसी को उस वस्तु या बात से वंचित रखना जिसका उसे अधिकार प्राप्त हो।
  541. हड़बड़ी में परल – उतावले की दशा में होना
  542. हर हर पट पट कइल – शोर करना।
  543. हरिअरे सुझल – आनंद में मग्न रहना।
  544. हलुक भइल – बेइज्जत होना
  545. हाड़े हरदी लागल – विवाह होना
  546. हाथ काटल – विवश होना।
  547. हाथ खजुआइल – मिलने का आगम होना।
  548. हाथ खाली गइल – वार चुकना।
  549. हाथ खींचल – सहयोग न देना
  550. हाथ गोड़ चलल काम धंधे के लिए सामर्थ्य होना
  551. हाथ चाटल – सब खा जाना।
  552. हाथ चालॉवल – मारना
  553. हाथ जोरल – प्रार्थना करना
  554. हाथ झुलावत आइल खाली हाथ लौटना
  555. हाथ डालल – योग देना
  556. हाथ तंग भइल – निर्धन होना
  557. हाथ दिहल – सहारा देना।
  558. हाथ देखल – भाग्य की बातें बतलाना।
  559. हाथ देखावल – भविष्य शुभाशुभ जानने के लिए सामुद्रिक जानने वाले से हाथ की रेखाओं का विचार करना।
  560. हाथ धरइ – कोई काम करने से रोकना
  561. हाथ धोअल – नष्ट करना।
  562. हाथ पसारल – याचना करना
  563. हाथ बइठल – अभ्यास होना।
  564. हाथ बाटावल – योग देना
  565. हाथ मारल – दाव जीतना।
  566. हाथ रंगल – हाथ में मेंहदी लगाना।
  567. हाथ रोपल – माँगने के लिए हाथ फैलाना
  568. हाथ लॉगावल – कुछ वसूल करना
  569. हाथ से उठा के दिहल – खुशी से देना।
  570. हाथा बाँही भइल – झगड़ा होना।
  571. हाथे दही जामल – जब कोई किसी को मारने की धमकी देता है उस समय इन मुहावरे का प्रयोग धमकाया जाने वाला व्यक्ति करता है।
  572. हाथे हाथ लिहल – बड़े आदर और सम्मान से स्वागत करना।
  573. हाली हाली कइल – शीघ्रता करना
  574. हासे हुसे कइल – शोर करना।
  575. हाहास कइल – शोर करना
  576. हाहि मारल – कराहना।
  577. हिलिकोरा लिहल – लहराना।
  578. हिवाह कइल – साहस करना।
  579. हिसाब कइल – जो जिम्मे आता हो उसे दे देना
  580. हिसाब दिहल – लेखा समुझाना
  581. हिसाब राखल – आमदनी, खर्च आदि का ब्योरा लिखकर रखना।
  582. हीला निकलल – ढंग निकलना।
  583. हुटुक लागल रहल – चिंता होना।
  584. हुरपेटल – पशुओं का सर से धक्का देना।
  585. हुरुकल चलल – लड़खड़ाते चलना
  586. हूरि हरि खाइल – लूंस -ठूस कर खाना।
  587. होस पारावल – याद दिला देना।


स्रोत:
विभिन्न किताबों से संग्रहित।

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