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भोजपुरी लेखक सभ के भेजल भोजपुरी आलेख के संग्रह कइल गइल बा।

जोगीरा डॉट कॉम के ई सतत प्रयास बा की आपन भोजपुरी भाषा आगे बढ़े आ भोजपुरी के ऑनलाइन के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगन तक पहुचावल जाव,

अगर रउवा येह पेज के पढ़ रहल बानी त रउवा सब से निहोरा बा की आपन रचना जोगीरा के जरूर भेजी, हमनी के बड़ी खुसी मिली राउर रचना अपना वेबसाइट प जोड़ के।

भोजपुरी साहित्य आ भासा के प्रसार खातिर।

जनकदेव जनक जी

हमरा नजर में प्रो वैद्यनाथ विभाकर जी, भोजपुरी साहित्य के एगो अनमोल हीरा :...

अचार, विचार आ बेवहार में कुशल प्रो वैद्यनाथ विभाकर जी के छवि हमरा दिल के आइना में झलकत बाटे, उहां लेखा स्वाभिमानी, निरभिमानी...
श्री महेंद्र प्रसाद सिंह जी

भोजपुरी रंगकर्म संस्था रंगश्री आ संस्थापक श्री महेंद्र प्रसाद सिंह

भोजपुरी भाषा (Bhojpuri Bhasa) आ साहित्य के संवर्धन आ प्रचार प्रसार में कई गो भोजपुरिया अपना स्तर से लागल बाड़े। कई लोग भोजपुरी आंदोलन...
अमरेन्द्र जी

गोधन : एगो लोक परब

गोधन आने कि गउ माता के काया से जनमल संतति आ संपति। आजु भले हमनी के गाँव-नगर में रहत बानी जा, बाकी मानुख सभ्यता...
तारकेश्वर राय जी

गोधना पऽ तारकेश्वर राय जी के लिखल आलेख

दिया दियारी के दुसरका दिन गोधना के परब मनावेला भोजपुरीया समाज । अपना जीनिगी के खुशहाल आ घर परिवार के उन्नति ख़ातिर पलायन एगो...
अमरेन्द्र जी

छठ प लिखल अमरेन्द्र जी के एगो आलेख

सुरुज चाहे सूर्य सिरिजन के देव चाहे भगवान। जिनिका अध्यात्म, संस्कृति, दरसन, विग्यान के बारे में ऋग्वेद से लेके रश्मि रथि तक कतने वैदिक...
मिथिलेश 'मैकश' जी के गमछा / गमछी बारे में लिखल एगो आलेख

मिथिलेश ‘मैकश’ जी के गमछा / गमछी बारे में लिखल एगो आलेख

एगो अइसन चीज ह जवना के जेतने बराइ कइल जाव ओतने कम बा। कुछ लोग एकरा के गमछा भी कहेला आ कुछ लोग एकरा...
महापंडित राहुल सांकृत्यायन जी

महापंडित राहुल सांकृत्यायन के मातृभाषा भोजपुरी रहे : संतोष पटेल

सबसे पहिले आजु हमके 125 वां जयंती पर आपन सरधा के फूल उहाँ का अर्पित करत बानी। बात शुरू करत बानी सुप्रसिद्ध हिंदी विद्वान आदरणीय...
रसिया जी

भोजपुरी के आधुनिक संदर्भ के काव्य संग्रह – रसिया जी के ‘ओरहन’

रसिया जी के भोजपुरी रचना के संकलन ‘ओरहन’ पर आपन बात करे से पहिले हम महान कवि थॉमस ग्रे के एगो कविता – ‘Elegy...
चम्पारण के जन कवि स्व. बृजबिहारी प्रसाद चूर जी

चंपारण के जन कवि बृजबिहारी प्रसाद चूर

चम्पारण के जन कवि स्व. बृजबिहारी प्रसाद चूर जी। कई लोगन से उहाँ के फोटो मंगनी बाकिर मिलल ना। आज उहाँ के पोती Sneha...
लव कांत सिंह जी

जातिवादी माहुर से ना बाँचल भोजपुरी गीत

कहल जाला की अगर घाव के सही समय पर सही इलाज ना दियाए त उ खतरनाक कैंसर के रूप ध लेवेला। आज भोजपुरी गीतन...
संजय सिंह जी

भिखारी ठाकुर जी पऽ लिखल संजय सिंह जी के एगो आलेख नचनिया

18 दिसम्बर 1887 । देश सुनुगत रहे । बिहार 1857 से गंगा किनारे जरत चिता के आगि में आपन भविष्य देखत रहे । रोज...
कजरी

सिमट रहल लोकराग कजरी : जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

लइकइयेँ से सुनत आवत बानी सन कि हमनी के देश क अतमा गाँवन में वास करेले। बाकि गाँवन के अतमा …? एकर उत्तर हेरे...
विवेक सिंह जी

भोजपुरी खातिर जमीनी स्तर के आंदोलन भी जरूरी बा : विवेक सिंह

जय भोजपुरी जय भोजपुरिया समाज सब भोजपुरी भाई लोग के प्रणाम। आज हम आप सबसे फिर कुछ कहे अउर सुने के चाहत बानी, अगर हमरा...
अमन पाण्डेय जी

अमन पाण्डेय जी के लिखल भोजपुरी आलेख पहचान के संकट

हर सभ्यता आपन आरम्भ अउरी चरम के एगो मापदंड लेके आवेले , जवन आरम्भ होके तरुण फिर चरम पे आवेले । चरम अवस्था के का...
विवेक सिंह जी

खाली सोशल मीडिया या कुम्भ के दिन हल्ला मचवला से भोजपुरी के उद्धार ना...

हम विवेक सिंह बिहार, सिवान, पंजवार के निवासी हई। हम रउवा सब से कुछ कहे अउर सुने के चाहतानी।। न त हम कोनो ज्ञानी...
पुरबी के सम्राट महेन्दर मिसिर

पुरबी के बेताज़ बादशाह: महेंदर मिसिर

कलकत्ता के मशहूर तवायफ सोना बाई गावत रहली। माया के नगरिया में लागल बा बजरिया, ए सुहागिन सुन हो। गीत खतम भइल, सब लोग ताली बजावल। एगो...
जगदीश खेतान जी के लिखल मोबाइल महिमा

जगदीश खेतान जी के लिखल गुड़ भेली आ महिया

गुड़ के नमवे से समझ लेईं कि येमे केतना गुड़ होला।गुड़ मुख्यतः गन्ना के रस से बनेला। गुड़ खजूर के आ ताड़ के पेड़े...
कथाकार मधुकर सिंह

सुनील प्रसाद शाहाबादी जी के लिखल कथाकार मधुकर सिंह एक परिचय

२ जनवरी १९३४ गुलाम भारत के जिला मेदनीपुर बंगाल में जनमल बालक गुलामी के बेड़ी में कsसल भारतीय समाज मे गते गते होशगर होत...
धनंजय तिवारी जी

धनन्जय तिवारी के लिखल दहेज़

रात के सब केहू सुते के तैयारी करत रहे की तबहिये, मुरारी जी के मोबाइल के घंटी बाज उठल। सब केहू के अनायास ही...
देवठान के कहनी

शशि रंजन मिसिर जी के लिखल देवठान के कहनी

कार्तिक के महिना में हमार आजी रोज भिनसारे दुआर पर शिवाला के कुआं पे नहास, ओहिजे तुलसी जी के दीया बारस आ साथे गीतो...