जयशंकर प्रसाद द्विवेदी जी के लिखल अनही तिखर हो गइल

जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

हो भँवरा !
बाँझ भइल बगिया
उठस लागे रगिया
आ बिगरल पगिया हे।
उचटल नेहिया तोहार
अनही तिखर हो गइल॥

हो भँवरा !
चनवों चोन्हाइल
तनिका न अघाइल
सोझवें लुकाइल हे।
हुलसे ना जियरा हमार
सुधिया बिखर हो गइल॥

हो भँवरा !
रसवा चोरावल
जाँगर ठेठावल
मधुरस बनावल हे।
बिखिआइल देखि भिनुसार
हियरा रुखर हो गइल॥

जयशंकर प्रसाद द्विवेदी जी के लिखल भोजपुरी गीत कवन नजीर देहलु गोरिया

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