भोजपुरी लघुकथा बथुआ के साग | अब्दुल ग़फ़्फ़ार

परनाम ! स्वागत बा राउर जोगीरा डॉट कॉम प, आईं पढ़ल जाव भोजपुरी लघुकथा बथुआ के साग, कहानी के लेखक बानी अब्दुल ग़फ़्फ़ार जी। पढ़ीं आ आपन राय जरूर दीं कि रउवा अब्दुल ग़फ़्फ़ार जी लिखल भोजपुरी लघुकथा ( Bhojpuri Laghukatha ) कइसन लागल आ रउवा सब से निहोरा बा कि अगर रउवा सब के रचना अच्छा लागल त शेयर क के आगे बढ़ाईं।

लड़े ला त आंख, दरद करेजवा में काहे होला हो!’

भोजपुरी लघुकथा बथुआ के साग | अब्दुल ग़फ़्फ़ार
भोजपुरी लघुकथा बथुआ के साग | अब्दुल ग़फ़्फ़ार

शफ़ीक़ मियां के आलू के खेत, पांड़े जी के गेंहूं के प्लाट के सटले रहे। शीतलहरी के मौसम में ललमुनिया, चंदा आ हुस्ना हाली हाली दुनो खेतन में बथुआ के साग खोंटत रहे लोग।

अबहिन तीनों जाने के डलिया में बथुआ के साग आधा आधा भरल रहे तब्बे रसमुनिया के ई सवाल पर बाकी दुनो सखी लोग के ठकुआ मार गईल।

चंदा कहली – कहाँ आंख लड़ा लिहलू हो सखी!

ललमुनिया के बोलला से पहिले हुस्ना बोल पड़ली – अरे राजू काका के लइका सुनिलवा होई!

ललमुनिया झट से कहलस – ना ना ऐसन कौनो बात नैखे। ऐसही पूछनी ह$।

चंदा – आकी मिसिर जी के लईका शशिरंजन हंवे!

ललमुनिया – ना हो, तोहनी त$ पीछही पड़ गईलु लोगिन।

हुस्ना मुस्किया के कहली – आकी खुरसेदवा ह$!

ललमुनिया भड़क के कहलस – ओकर टांका त$ तोहरा से भिड़ल हवे।

हुस्ना – ल$ सुन ल$। आपन बोझा दोसरा के मुड़ी पर!

ललमुनिया – हम जानत नइखी का शशिया चंदा के कौन कौन समान कीन कीन के देवे ला आ खुरसेदवा के मोटसाइकिल पर बैठ के तु कहाँ कहाँ घूमे लू!

अब्दुल ग़फ़्फ़ार जी
अब्दुल ग़फ़्फ़ार जी

चंदा के पारा चढ़ गईल – खबरदार ललमुनिया, ई सब फालतू बात जबाने पर फेर ना आवे के चाहीं। ना त$ हमसे बाऊर केहू ना होई। नइखे बतावे के त$ मत बताव$ बाकिर हमनी पर इल्जाम मत लगाव$।

हुस्ना आपन सफाई में कहली – अरे एक दिन मिल में गेहूं पहुंचावखातिर अम्मा खुरसेदवा से कहली त$ हम गेहूं के बोरा पकड़ के पीछे बैठ गईनी। त$ हमार ओकरा से टांका भिड़ गईल! तु त$ बड़ी लंगटिन बाड़ू हो। अब हमनी के तोहरा संघे कब्बो ना रहल जाई।

चंदा मामला बिगड़त देख कहली – वैसे ऐह घड़ी गांव में ईहे दू तीन गो लईका त$ हिरो निकलल बाड़न सन। दूसर त$ केहू लवकत नईखे। सुनिलवा जैसन जुल्फी, खुरसेदवा जैसन देह दवांसा आ शशिया जैसन पढ़ाकु लईका दोसर गाँव में खोजला से ना मिली।

चंदा के ई बात पर तीनों जाने ठठा के हंस दिहल लोग आ माहौल हल्का हो गईल।

मुन्हार हो नियराइल रहे बाक़ी ऐह लोगिन के बतकही ना ओरात रहे। तीनों जाने के डलिया बथुआ के साग से भर गईल रहे बाकिर ऐह लोगन के बकर बकर बकबकाइल चालूए रहे।

तब्बे ललमुनिया के नजर पांड़े जी पर पड़ गईल – अरे पांड़े काका आवत बाड़न हो। चल $ चल$ भाग$ लोगिन- पांड़े जी दूरे से चिल्लाए लगलन – कौन हवे सन रे! सगरी गेहूं लथार दिहले सन! रूक$ सन – रूक$ सन।

आज तोहनी के छोड़ब ना।

हाली हाली तीनों सखी डरेड़े डरेड़े भाग चलल लोग आ पांड़े जी चिल्लात गरियावत तीनों लईकनी के पाछे पाछे कुछ दूर ले दौड़ के हांफ के बैठ गईलन।

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