भरत शर्मा निर्गुण बाड़ी मोरी अबही उमरिया

बाड़ी मोरी अबही उमरिया
आ विधाता दिनवा धई दिहलें ऐ राम…

सजना सेयान हम नदान,
त कइसे के गवनमां जाइब ऐ राम

बाबा मोरा अइसन निरमोहिया
न मन में विचरवा कइले ऐ राम

माई मोरा हिया के कठोर
त घरवा से निकाली दिहली ऐ राम

नइहर में कुछउ न सिखलीं
पिया के घर का करब ऐ राम

कुसुम रंग पेन्हली चुनरिया
त लाल रंग चादर मिलल ऐ राम…

डोलिया में हमके बिठाई के
कहार चार लागी गइले ऐ राम

सुसुकि-सुसुकि माई रोवेली
त सखी फुका फारी रोवे ऐ राम

धनी अब भइली ससुरइतीन
लउटी फिर न आइब ऐ राम
दास ऐ कबीर, निर्गुण गावेलन
गाके समझावेले ऐ राम…

भोजपुरी निर्गुण सब दिन होत न एक समाना

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