भोजपुरी बालगीत

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रउवा सब के सोझा बा भोजपुरी बालगीत

भोजपुरी बालगीत
भोजपुरी बालगीत

हमरा पता बा की ई भोजपुरी बालगीत पढ़ के राउर आपन लइकाइ मन पर जाइ, ई बाल गीत रउवा जरूर अपना लइकाई में इया, माइ भा नानी से सुनले होखब आ एह मे से बहुत सारा गीत खेले के बेरा गावत भा बोलत होखेब।

त आयी पढ़ल जाव  भोजपुरी के कुछ बालगीत आ अपना लइकाई के फेर से इयाद कइल जाव

चंदा मामा, आरे आवऽ पारे आवऽ
नदिया किनारे आवऽ
सोना के कटोरिया में दूध भात ले ले आवऽ
बबुआ के मुँहवा में घुटुक।

ओका – बोका
तीन – तड़का
लउवा – लाठी
चंदन – काठी
चनना के नाँव का ?
इजई, बिजई
पान, फूल, तितली
पुचुक।

कबड्डी के बोल

आव ऽ तानी कबड्डी
डेरइऽ जनि हो
हाथ गोड़ टूटी
कपार तोहार फूटी
लड़िकपन छुटी, लड़िकपन छुटी…..

कबड्डी में लबड्डी पाताल में पुआ
मालिन बिटया खेलत होइहें जुआ

चल कबड्डया ऐना, तोर माई बीने बेना
एगो हमरो के देना, एगो हमरो के देना

आम छू, आम छू, कौड़ी बादाम छू

एक मुट्ठी गरई, छल-छल करई
कवन बेटा मोर पहुँचा धरई

चल कबड़िया आइले, तबला बजाइले
तबला का ताल पर मुँघरू बजाइले

अंधी लगावे के गीत

आव रे चिरइया, वन खोंतवा लगावऽ ।
तोहरा खोंता में आग लगो, बाबू के सुतावऽ

आव रे खेदन चिरइया, गुलगुल अंडा पारऽ
तोहरा अंडा में आग लागो, बाबू के खेलावऽ

आव रे निनरिया नीनर वन से,
बबुआ आईल ममहर से।
लेंडवरिया में से आव, बँसवरिया में से आव
बबुआ का आँखया पर बइठ के सुताव

गीत
ए बिलाई मउसी
कोदो के चलउसी
बिलरा बेराम बा
हमरा कवन काम बा ?

कनिया दू गो धनिया दऽ
जीरा मरिच के फोरन दऽ
अइले तहार भाई
मोटरी सकेत करऽ

काली माई करिया
भवानी माई गोर
टूटही मड़इया में करेली अँजोर

सात भईंस के सात चभक्का
सोरह सेर घीव खाँ रे
कहाँ गइले तोर बाघ मामा
एक टक्कर लड़ जाँ रे

जाड़ के दिन में घाम मांगावे खातिर गीत

राम जी राम जी घाम करऽ
सुगवा सलाम करे
तोहरा बलकवा के जाड़ लागत बा
कमरी ओढ़ के बिहान करेला
पुअरा फेंक-फूक तापत बा ।

मटर के भूँजा पटर-पटर
तीसी के भूँजा चाई
कानी आँख में दीया बरे
उगऽ हो गोसाईं !

जाड़ लागे जरनी बयार बहे पापी
तातले खिंचड़िया खिअइह ए काकी

गीत
राजा रानी आवेले, पोखरा खोनावेले
पोखरा के आर-पारी इमली लगावेले
इमली का गाछ पर नौ सौ अंडा
अंडा गिरे रेत में, मछरी का पेट में
ई संवरकी धवलक, बात बनवलक
बसिया भात पर बेना डोलवलक
बुढिया माई, बड़ चतुराई
सभका के खाँड़ा टूकी, अपने अढाई !

किरिया उतारे के गीत

बकुला-बकुला कहाँ जा ताड़ ऽ ?
मूरई का खेत में
सेर भर सतुआ लेले जा
गंगा में दहववले जा
गंगा में के बँटा-बूंटी
लोहे के मचान
सभ कर किरिया उतरिहें भगवान

एक मुट्ठी सुतरी
हजार किरिया उतरी

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