भोजपुरी भाषा हमारी धरोहर | महादेव कुमार सिंह

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भोजपुरी भाषा दुनिया के कई देशों मे बोली जानेवाली एक बहुत महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय भाषा है। इस भाषा की प्रमाणिक जानकारी सातवीं शताब्दी के आसपास परिलक्षित होती है लेकिन यह उससे भी प्राचीन प्रतीत होता है। इस भाषा को दुनिया के पाँच से भी अधिक देशों में बोली जाती है और इस भाषा को बोलने वालों की संख्या करीब दस करोङ से भी अधिक है। भोजपुरी भाषा की मिठास ने दुनिया के बहुत से देशों के श्रोताओं को अपनी ओर आकर्षित किया है और आज इस भाषा के प्रेमी ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा जैसे दुनिया के कई देश में मिल जायेंगे।

महादेव कुमार सिंह जी
महादेव कुमार सिंह जी

आज हमें अपनी भोजपुरी पर गर्व है लेकिन हमारे अपने ही वतन में अबतक इसकी पहचान नही मिल पाई है। भोजपुरी भाषा के प्रकाश से दुनिया आनंदित हो रही है लेकिन अपने ही घर में यह अपनी पहचान और सम्मान के लिए लालायित है। हमें अपनी भाषा के सम्मान के लिए जागरूक होने की आवश्यकता है और निःसंदेह इसे संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाना चाहिए।

हमारे भोजपुरी कलाकारो, लेखको एवं कवियो के अलावे प्रमुख विद्वानों को भी आगे आकर इस भाषा के विकास और इसकी पहचान के लिए कार्य करना चाहिए क्योकि भाषा और सांस्कृतिक समृद्धि हमारी आर्थिक समृद्धि में सहायक होती है। अपनी मातृभाषा का सम्मान माँ के सम्मान जैसा होता है।

आज हमारे देश के कई प्रांत ऐसे है जो प्राथमिक स्तर की शिक्षा अपनी मातृभाषा में देते हैं जिससे बच्चे को समझने में सहुलियत होती है। देश के कई प्रांत ऐसे भी है जिनकी एकता का बुनियाद भाषा के आधार पर टिकी है लेकिन हम धीरे-धीरे अपने विरासत में मिली अपनी भाषा और सास्कृतिक धरोहर को भूलते जा रहे है लेकिन हम कदापि यह न भूलें कि भोजपुरी भाषा हमारी धरोहर है। हमें भोजपुरी भाषा के हक और सम्मान के लिए मिलजूल कर काम करना चाहिए।

हमें अपने सुनहरे भविष्य के लिए भोजपुरी फिल्मों एवं भोजपुरी गानो मे गंदे शब्दो के इस्तेमाल से भी परहेज करना चाहिए। हम यह न भूलें की गंदे गाने बनानेवालों के घर की माँ, बहने और बहु, बेटियाँ तथा श्रोताओ के घर की माँ बहने और बहु बेटियाँ कोई पराये है बल्कि सभी अपने और इसी समाज के है। इसलिए गंदे गानों से बचने में ही हम सबकी भलाई है।

विश्वविख्यात इस भाषा के लोकप्रियता एवं समृद्धि में भोजपुरी सिनेमा एवं भोजपुरी पत्र-पत्रिकाओं के योगदान को भी हम कदापि भूला नही सकते। आज भी हमारे भोजपुरी पत्र-पत्रिकाओं के संपादक एवं कर्मठ संचालक मंडल दिन-रात अपना खून-पसीना बहाकर इस भाषा के विकास हेतु सतत प्रयत्नशील हैं। भोजपुरी भाषा के प्रति श्रद्धा स्नेह और इसकी मधुरता की वजह से हमारे संपादक एवं संचालक मंडल निःस्वार्थ भाव से अपनी सेवा दे रहे हैं।

हमार भोजपुरी

भोजपुरी आपन माटी के खशु बू
फइल गईले सगरी जहान में
जस, सोहरत, सम्मान पईलस
फीजी, मारीशस आऊरो सरुीनाम में

सहज मधरु रस भरल ई भाषा
कोईललया जईसन सदुुं र बोल
सनु -सनु के खूब झूमें मनवााँ
होरी, चईता, गावे लोग

बङ पावन हमरी ई धरती
परकट भईलें साक्षात ववधाता
श्री राम, कृष्ण के चरण रज से
धन्य भईलें धरती माता

गगुं ा मईया के आाँचल के छाँईया
हरी-भरी हमरी भोजपरुरया परदेश
सखु -दखु लमलके सहेले लोगवा
रहेले चाहे देश-ववदेश

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