कन्हैया प्रसाद रसिक जी के लिखल भोजपुरी गीत जिनिगी

कन्हैया प्रसाद तिवारी रसिक जी
कन्हैया प्रसाद तिवारी रसिक जी

जिनिगी जंग ना ह जे जीतल जाव
जिन्दगी पतंग ना ह जे खिंचल जाव
जिनिगी त दरिया के बहत पानी ह
एह से सुनर समाज के सिंचल जाव

सुख दुख के ँचा खाला से ना रूकेला
आफत के ताप से जिनिगी ना सूखेला
रसिक पो भरोसा रखऽ गलत ना बतइहें
जिनिगी तऽ बाँस ह नववला पो ना टूटेला

आपन अनकर के भेद मिटाव
सभ केहु के अपने सवांग बताव
ढ़ेला फेंकेवाला के हाँथ दुखा जाई
सभ लो के अपना करेजा में सटाव

अनघा बिटोरला के का जरूरत बा
आँख तरेरला के का जरूरत बा
सभ काम मीठ बोलले से होता त
जहर घोरला के का जरूरत बा

फूल खिलने दे अड़ंगा मत डाल
ऐ जिन्दगी ! तू अपनी आदत बदल ले

रउवा खातिर:
भोजपुरी मुहावरा आउर कहाउत
देहाती गारी आ ओरहन
भोजपुरी शब्द के उल्टा अर्थ वाला शब्द
कइसे भोजपुरी सिखल जाव : पहिलका दिन
कइसे भोजपुरी सिखल जाव : दुसरका दिन
कइसे भोजपुरी सिखल जाव : तिसरका दिन
कइसे भोजपुरी सिखल जाव : चउथा दिन
कइसे भोजपुरी सिखल जाव : पांचवा दिन
कइसे भोजपुरी सिखल जाव : छठवा दिन
कइसे भोजपुरी सिखल जाव : सातवा दिन
कइसे भोजपुरी सिखल जाव : आठवाँ दिन

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