संजीव कुमार जी के लिखल भोजपुरी कहानी चमकी

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रे भाग भाग, चमकी आवता, इहे कहत रमुआ घर कि ओर भागल, देखा देखी सब लइकन भी भागे लगलन। चमकी नाम के भूत गांव में फैल गईल रहे, सब लोग आपसे में बतियावे की गांव में चमकी बहुत घूम रहल बा, कौनो कौनो जगहिया पर ई भूतवा कईं गो लइकन सन के मुआ देहले बा, ई बड़ के नइखे पकड़त, ई खाली लइकन सन के धरत बाटे, एक बार ध लेता त मुआइये के छोड़ता। अब गांव में सब लोगन में एगो डर बइठ गइल, चमकी भूतवा के। गांव में लइकन भी अकेले-अकेले कहि नइखन सन जात, सब एक दूसरे के संगे जात बाड़न सन।

“अलख निरंजन, अलख निरंजन….” आवाज एगो घर दरवाजा पर आइल।

तोहरा दुवारे पर एगो साधु आइल बा, बच्चा दरवाजा खोल, कुछ भिक्षा दे द, साधु आवाज लगईलन।

आवत हइ बाबा, तनी ठहरी, अंदर से आवाज आइल, रमुआ के माई, थरिया में चाउर, थोड़का दाल, तनिमनी आलू लेके अइलि, और साधु बाबा के दे दिहली। साधु बाबा भिक्षा ले लिहलन, औरि एक टके रमुआ के माई किओर देखलन, रमुआ के माई के उदास देखी के कहलन, तनी 5 गो लवंग लियाओ दुलहिन। रमुआ के माई 5 गो लवंग लेके अइली। बाबा आसन लगा के बइठ गइलन, लवंग मंतर पढ़ी के डललन, एगो लवंग से बाकी के सटवलन, सटे लागल।

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“बुझाता, ई गांव पर कौनो भूतनी के साया बा, जौन लइकन सन के मारे के चाहत बिया, ई बहुत खतरनाक बिया, बड़बड़ाये लगलन। रमुआ के माई सुन के परेशान हो गइली, अगल बगल के लोग के बुला दिहली।

अब सब लोग बाबा से एकर निदान पूछे लगलन। त बाबा बतइलन कि, “5 किंटल चाउर, एक किंटल दाल औरि सब्जी सब लागी, हमनी के 4 गो औरि बाबा लोग आई, चेला चपाटी सब रहीहसन, औरि एगो गांव में जग हो जाई, सब भूत बयार भूतनी सब भाग जइह सन।

जाए के बेरा सब बाबा लोग के पांच हजार एक रुपैया दक्षिणा, कपड़ा-लाता, सब देवे के पड़ी। सोच ल लो , ना त ई भूत भूतनी, बयार के कहर बड़ी खतरनाक बा, तहरा लोग के लइकन पे नजर बा, ई केहु के ना छोड़िह सन, सब के मुआ दिह सन। हम जात बानी, तहनी लोग, जलदिये हमरा बता दिह, हम दु दिन मंदिर पर बानी।” कहत बाबा चल दिहलन।

संजीव कुमार जी
संजीव कुमार जी

गांव के लोग अब चिंता में पड़ गईल की अब ई भूत भूतनी के चक्कर मे कम से कम पचास हजार लाग जाइ,कहवा से आई, सब कोई चंदा भी दी, तबो त ना हो पाई। गांव के लोग के आपन आपन बच्चन के भी चिंता रहे , से सब कोई राय कइल की बच्चन के ई भूत भूतनी सब से बचावे खातिर, बाबा के बात मान लेवल जाव, जब रही जीव त फेर खाई घीव, इहे सोच के पइसा इकट्ठा होखे लागल, राम खेलावन के पइसा जमा करेके जिम्मेवारी दिआइल। अब राम खेलावन, घरे घरे जाइके चंदा के रुपया जोरे लगलन। रुपया घटे लागल त रामखेलावन, सोचलन की स्कुलिया में मास्टर साहब लोगन से भी कुछ चंदा, जग के नाम पर लिया जाव। इहे सोच के सबेरे स्कुलिया में पहुच गइलन। संजीव मास्टर साहब कुर्सी पर बईठल रहनी।

गोड़ लगतबानी मास्टर साहब, परनाम” रामखेलावन।

खुश रह रामखेलावन, का बात बा हो , सबेरे सबेरे आइल बाड़, संजीव मास्टर साहब पूछनी।

अब रामखेलावन सगरी बतिया बतइलन, बात सुनी के संजीव मास्टर साहब एतना हसलन, एतना हसलन की सब मास्टर साहब लो, और लइकन सब चिहा के गुरु जी के देखे लागल लोग। राम खेलावन कहलन, मास्टर साहब, हमनी के गांव पर आफत आइल बा, हमनी के लइकन के भूत भूतनी से खतरा बा, आ रउआ जोर जोर से हसत बानी।

“त हसी ना त का करी, बताव, भूत प्रेत, ई सब झूठ ह, ई सब ना होखेला, आ ई सब जग करब त भूत प्रेत ना भागी, जेतने पढ़ब, ओतने तहार ज्ञान बढ़ी, त तू सब समझ पइब, बुझल की ना….”

अब सुन ल पहिले सब गांव के लोग, लइका स्यान, बुढ़, जवान सब के बुला लाव, आज हम कुछ तहनी के बताइब”, संजीव मास्टर साहब कहलन।

थोड़ देर में गांव के सगरी लोग स्कूल के फील्ड में जौरीया गइल लोग। संजीव मास्टर साहब अब सबके समझावै लगलन,” सुन लोग, ई चमकी कौनो भूत प्रेत या भूतनी या बयार, ई कुछो ना ह, भूत प्रेत ई कुछ ना होखेला, ई सब मन के भरम हवे, ई सब मन मे ना रखे के, लोग चांद पर से जाके चल आइले लो, आ तहनी लोग अंधविश्वास में फसल बाड़ लोग, त सुन लो, ई चमकी एगो बुखार ह, जवन कुपोषण के कारण होखेला, कुपोषण के माने, बच्चन के ठीक से खाना नइखे मिलत, एहीसे त सरकार कुपोषण दूर भगावे खातिर, स्कूल में दोपहरिया में सब लइकन के खाना खियावल जाला, आंगनवाड़ी पर भी लइकन के रोज खाना मिलेला, अंडा भी मिलेला अब त दूध भी मिलत बा, जब लइका ठीक से खाना खाई, त ओकरा कुपोषण ना होइ।

त जवन बच्चा, कुपोषित बा, ओकरा चमकी बुखार होखे के ज्यादा सम्भावना होखेला, एहिसन बच्चा जब धूप में जाइ, त चमकी बुखार हो जाई,खूब तेज बुखार, बच्चा उलूल जुलूल हरकत करी, ओकर देह ऐठाये लागी, ओकरा देहिया में ग्लूकोज कम होइ जाइ, चिउटी कटला पर ना बुझाई, देहिया कापे लागी, बदन में ऐठन होखे लागि, दाँत किटकिटाए लागि।”

ई सब जब दिखे, त समझ जइह की ई भूत प्रेत ना ह, ई त चमकी बुखार ह, एकर इलाज कौनो बाबा औरि ओझा के लगे नइखे, एकर इलाज नजदीकी अस्पताल में बा, एहीसे जब भी अइसन होखे, तुरन्त अस्पताल ले जाइके, डॉक्टर से इलाज करवावे के चाही, समझल लोगन” अब गांव के लोग के समझ मे आइल कि चमकी एगो बीमारी ह कौनो भूत प्रेत ना हवे।

रामखेलावन औरि गांव के लोग, मंदिर में बाबा के लगे गइल लोग, बाबा के गोड़ लाग के कहल लो, “बाबा हमनी के अब चमकी भूत भूतनी ई सब से अब कौनो डर नइखे, हमनी सब समझ गइल बानी सन, बचाव में ही सब बीमारी के इलाज बा, अब कौनो जग ना होइ,अब उ चंदा के रुपया से गांव में एगो छोट मोट अस्पताल खोलल जाइ, ताकि लोग के ई सब बीमारी से बचावल जा सके।

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