सौरभ कुमार जी के लिखल भोजपुरी कविता बेटी

सौरभ कुमार जी
सौरभ कुमार जी

तुही ता हमार ताकत होउ ये माई
हमरा के कोखिये में मत मारा ये माई
आइब एह दुनिया में तोहर नाम रौशन करब
दुःख दर्द सहब केहू से कुछ ना कहब
सह के दुःख दर्द तोहर दामन ख़ुशी से भरब ये माई
हमरा के कोखिये में मत मारा ये माई

हमहू ता तोहार खून हाई एहपर तू बिचार करा $$
जन खून से हमार तू आपन सोलहो श्रृंगार करा $$
बाबू के समझावा तू तनी उनका के लाड करा $$
बहुत अनर्थ हो जाई मत बंद रक्त के संचार करा $
आपन अंदर के छुपल शक्ति के पहिचान करा
जग में फैईलल इ कुरीति के बहिस्कार करा
हमरा के बचावे खातिर बन जा दुर्गा काली चंडी ये माई
हमरा के कोखिये में मत मारा ये माई

रूखी शुखी खाईब हरदम ख़ुशी मंगल के गीत गाईब
संतान होखे के आपन हर पथ पर फर्ज निभाईब
बाबूजी चलिहे सीना तान बन के सानिया कल्पना इंद्रा
झासी जइसन नाम कमाइब
बाबू के गर्दन झुके न अइसन समाज बनाईब रे माई
हमहू ता तोर खून हाई हमरा के मत कोखिये मारा ये माई
बेटी कुछ सवाल करात बिया माई से

अगर ना रही बेटी ता इ बेटा के का होई ???
का लड़का लड़की के जगहा पर लाइका लाइका से वियाह होइ ???
कइसे बच पाई इ दुनिया कइसे मानव के बिज संचार होइ ??
कइसे बनिहे मानव जोड़ा कइसे जीवन नईया पार होइ ??
एह पर तानी बिचार करा ये माई
हमहू तोहार खून हाई हमारा के मत कोखिये मारा ये माई

ना रही बेटी ता केकर मांग बहोरबु ??
कुल वधु के जगहा पर कुल वर पाइबू ???
सुन रही भाई के कलाई के से राखी बंधवाइबु ??
अजर अमर वाला बजरी कहाँ से खियाईबु ??
नारी में भारी शक्ति बा तानी तू ज्ञान करा ये माई
हमहू तोहर खून हाई हमरा के मत मार ये माई

बेटिये ता सिता रूपी माँ दुर्गा काली प्रेम रूपी राधा हई
ज़हर के जे अमृत बनावली भक्ति रूप में मीरा हाई
बेटिये ता अँधेरा में चमके वाला हीरा हाई
एकर जन आपमान करा इनकरा के मत दूत कारा ये माई
हमहू ता तोहरे खून हाई हमके मत कोखिये मारा ये माई ।।।।

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