भोजपुरी कविता जनमावे वाली माई

तारकेश्वर राय जी के जनमावे वाली माई
तारकेश्वर राय जी के जनमावे वाली माई

मॉस के लोथा के, आकार देहलस माई |
आपन खूनवा से सींच के, जनमवलस माई ||
बोले, बतिआवे, संस्कार, देहलस माई |
खूबी रिश्ता, नाता, के चिन्हवलस माई ||

बबुआ के खइला से, जुड़ात रहे माई |
ओकरा ख़ुशी बदे, जान के मुड़ात रहे माई ||
बाबूजी के खुनुष से, बचावे वाली माई |
निपढ़ रहके पोथी पढ़े के, उकसावेवाली माई ||

माई क सिरतिया, सुरतिया से बढ़ के |
ममता लुटवले हिय, ई बढ़ चढ़ के ||
माई क सुरतिया, अंखिया में बसल |
चाहे उमरिया, समइया में धसल ||

संतान के बचावे बदे, जइसे हिरणी शेर से लडेले |
देशवा के आन खातिर, तलवार तोप से भिडेले ||
जब जिनगी रोवावे, आ रोवावे दुनिया हरजाई |
केहू ना मिले तब बड़ा याद आवेले माई ||

बोले सिखवलस जवन माई, जनमल चुप होखे सिखावता |
गिनती सिखावेवाला के, गीन गीन दुःख देखावता ||
माई क लोर बाबू , कबो बाँव न जाई |
भेटाई तोहके बढ़ के, ई जोश जब ना रह जाई ||

झूठ बा पूजा पाठ, बरम बाबा चंडी माई के पुजाई |
भाग जईहे सुरसती, लक्षमी जहाँ माई खुझाई ||
जवन तू बोवताल, देख ल निमन से ये भाई|
लखता जनमल तोहार, कटब उहे बांटी आ बटाई ||

तारकेश्वर राय
ग्राम + पोस्ट : सोनहरियाँ, भुवालचक्क
गाजीपुर, उत्तरप्रदेश

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