भोजपुरी के पानी : संगीत सुभाष

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बजड़ा से बचपन उपजाईं, जौ से जोश जवानी।
माँटी से माँटी के कविता, भोजपुरी के पानी।
हम्मर नइखे कवनो सानी,
रउरा मानीं भा ना मानीं।

गेहूँ के गदराइल बाली गावे गीत गुमान के।
सरसो के बुकवा लागल तन तूरे कठिन पखान के।
धान धँउस ना सहलसि, दिहलसि कबहूँ कवनो भाँति के,
रहर रहनिरखवार ठाढ़ करि ँचा पगड़ी शान से।
मकई माथे टीका कइलसि छाती भइल उतानी।

मटर टरे ना देत बचन के कबहूँ कवनो काल में।
चन्नन माथे चमचम चमके चना बेंचि हर साल में।
गावे गीत गरब से गोंएड़ हाथ मिला के चँवर से,
सतुआ, भूजा, लिट्टी से बल आवे भुजा विशाल में।
उपजे उमगि उमंग कियारिन, हरख खेत खरिहानी।

जलन पिसाला रोज जाँत में, ओखरि कटुता डारि के।
कूचल जाला रोजे रोजे हनि हनि मूसर मारि के।
गन्ना गरब मिटावे सहजे रस आपन सब बाँटि के,
नेह छोह के मड़ई गहगह इरिखा द्वेष बिसारि के।
दुअरा देव बिराजे, अङना में तुलसी महरानी।

टुनटुन घंटी बरधा गरवा धुन गावेला प्रीत के।
कूदत फानत बिटवा आवे चिक्का कुश्ती जीत के।
जेठ दुपहरी पीपर छइयाँ, माघे कउड़ा बारि के,
जुटे पड़ोसी बतिआवे सब दुखम सुखम ‘संगीत’ के
धुँआ बनेला उड़ि के भागे बिपति, बिकार, हरानी।

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