मास्टर साहब के मोटर साइकिल | भोजपुरी लघुकथा | राजेश भोजपुरिया

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राजेश भोजपुरिया जी
राजेश भोजपुरिया जी

परनाम ! स्वागत बा राउर जोगीरा डॉट कॉम प, आयीं पढ़ल जाव राजेश भोजपुरिया जी के लिखल भोजपुरी लघुकथा मास्टर साहब के मोटर साइकिल, रउवा सब से निहोरा बा कि पढ़ला के बाद आपन राय जरूर दीं, अगर रउवा राजेश भोजपुरिया जी के लिखल लघुकथा अच्छा लागल त शेयर जरूर करी।

रमेसर मास्टर साहेब नाया नाया हीरो होन्डा के मोटरसाइकिल किनले।बड़ा जतन से ओकरा के तोप-ढाक के राखस।एक दिना मोटरसाइकिल लेले पान खाये खातिर पान के दोकानी पर रुकले।दोकानदार से कहले कि एगो बढ़िया पान बनाव।दोकानदार पान बनावे लागल आ मास्टर साहेब अपना हीरो होन्डा के निहारत रहले।

तबे तपाक से दू गो लइका अइले सन आ मास्टर साहेब के गोड़ छू के परनाम करत कहले सन कि- का मास्टर साहेब हमनी के चिन्हत बानी?

मास्टर साहेब कहले कि ना हम त तू लोग के नइखी चिन्हत, के हव लोग?

लइका कहले सन – अरे मास्टर साहेब हमनी के नइखी चिन्हत,

रउआ हमनी के पढवले बानी जब हमनी स्कूली में रही जा।

मास्टर साहेब कहले- आच्छा-आच्छा,आउर सब ठीक बा नू?

लइकवा कहले सन – ह सब ठीक बा। रउआ नाया मोटरसाइकिल लेनी ह का?

मास्टर साहेब कहले कि- ह चार दिन पहिले किनली ह।

राजेश भोजपुरिया जी
राजेश भोजपुरिया जी

लइकवा कहले सन कि- मास्टर साहेब हमनियो के इहे मोटरसाइकिल लेले बानी जा बाकिर चाल ठीक नइखे। रउआ आपन मोटरसाइकिल के चाभी दिही ताकि एकरो चाल देखल जाय चला के।

मास्टर साहेब पहिले त सोचले की ई अजनबी लइका बाड़े सन, इहनी के चाभी कइसे दे दी मोटरसाइकिल के?

बाकिर बहुत सोचला के बाद मास्टर साहेब चाभी लइकन के देत कहले कि जल्दी आव लोग चला के हम एहिजे पान के दोकान पर खाड़ बानी।

लइकन आव देखलसन ना ताव मोटरसाइकिल पर किक मरलसन आ चल देलसन। मास्टर साहेब तिकवत रह गइले कि अब अईहसन,बाकिर उ आवेवाला थोड़े ना रहन स,उ त चोर उचक्का रहले,मोटरसाइकिल ले के भाग गइल सन।

आ मास्टर साहेब पान दोकान पर खाड़ होके उहनी के इंतजार करत रह गइले। जब मास्टर साहेब के पता लागल कि उनकर मोटरसाइकिल त चोर ले भगले सन।तब आपन माथा पिटत रह गइले।

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