भोजपुरी लघुकथा किरिया | दिलीप पैनाली

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परनाम ! स्वागत बा राउर जोगीरा डॉट कॉम प, आज रउवा के सामने बा दिलीप पैनाली जी के लिखल भोजपुरी लघुकथा किरिया पढ़ीं सभे आ शेयर करीं।

“बताईं सभन आज के ई सभा काहे ला बोलावल गइल बा”खटिया का पाटी के दहिना हाथ से धऽ के बइठते जगधारी पाँडे जदुनंदन तेवारी से पूछले?

काका जब से बनियापुर मेला के बैलहटी लागल शुरू भइल बा, हमनी घोर बिपति में पड़ गइल बानी”जदुनंदन कहलें।

काहे हो, मेला का कारण एह गाँव पर बिपति!

हँ काका सउँसे गांव लमहर बिपति में पड़ गइल बा। रउआ त बँगाल ध लेनी, पहिले परबे तीजे आवतो रहनी तऽ अब साफे ना आईं।अबकि सात बरिस बाद राउर आगमन भइल बा। राउर आइल सुन सभ बिरादर राय कइलसऽ जे रउए हमनी के एह बिपति से मुक्ति दिआवे के उपाय बता सकऽतानी। काहे कि अबहीं ले हर गाढ़ बिपति में रउए सहायक होत आइल बानी।

दिलीप पैनाली जी
दिलीप पैनाली जी

त सुनी ई बिपति कइसन बा ” जब से ई बैलहटी शुरू भइल बा, गांव के जतना हीत लोग बा सभे आपन बैल लिहले दुआर पर हाज़िर हो जाता। ओह लोग के खिआवल ओह लोग का बैल के खिआवल, माने गंजने गंजन। जवन गवत आठ नव महिना चलत रहल ह छवो महिना नइखे चलत। एकही गो दुआर पर पाँच गो सात गो बैल, ना बान्हे के दवर ना सुते के दवर। बहिनउरा से, ममहर से, फूफूहर से, समधियाना से, सढूआना से,समधी का समधी का समधियाना से, माने मत पूछीं मउअत सक्षात मउअत

“हँ हो ई त बड़ बिपति बुझाता। त का सब केहू एह बिपति से पाछ छोड़ावल चाहऽता, ना केहू अइसनो बा जेकरा एह से कवनो असुविधा नइखे” जगधारी पाँडे पूछलें?

ना ना सभे हरान परेशान बा! रउए कवनो उपाय करीं।

जगधारी पाँडे काफी समृद्ध व्यक्ति रहस, सैकड़न बिगहा के जोतवइया। लेकिन अब गांव छोड़ देले रहस। बँगाले में लइका लोग का लगे रहे लागल रहस। गांव का लोग के समस्या सुन बहुत सोंच बिचार कइके कहलें “अगर सारा गांव किरिया खा लेवे कि हमनी कवनो संबधी के, जे बैल ले के बैलहटी में आई, अपना दुआर पर ना रखेम सऽ, त एह बिपति से बाचल जा सकऽता”। का कहनाम बा रउआ सभन के?
सारा गांव एक स्वर में कहलस” हँ हमनी किरिया खा के कहऽतानी जे बैलहटी में बैल बेचे आइल संबंधी के अपना दुआर पर ना राखेम सऽ।”
सब लोग अपना अपना जगही ई खबर दे दिहलस, तबे के किरिया खा के बनल परंपरा आज ले चलत बा।

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