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भोजपुरी कविता

भोजपुरी लेखक सभ के भेजल एक से एक भोजपुरी कविता के संग्रह कइल गइल बा। अगर रउवा येह पेज के पढ़ रहल बानी त रउवा सब से निहोरा बा की आपन रचना जोगीरा के जरूर भेजी, हमनी के बड़ी खुसी मिली राउर रचना अपना वेबसाइट प जोड़ के।

भोजपुरी साहित्य आ भासा के प्रसार खातिर।

कवि ह्रदयानन्द विशाल जी

कवि ह्रदयानन्द विशाल जी के लिखल तीन गो भोजपुरी कविता

परनाम ! स्वागत बा राउर जोगीरा डॉट कॉम प , रउवा सब के सोझा बा कवि ह्रदयानन्द विशाल जी के लिखल तीन गो भोजपुरी...
दीपक तिवारी जी

दीपक तिवारी जी के लिखल खिचड़ी प एगो कविता

परनाम ! स्वागत बा राउर जोगीरा डॉट कॉम प , आई पढ़ल जाव दीपक तिवारी जी के लिखल भोजपुरी कविता खिचड़ी , पढ़ीं...
सौरभ कुमार जी

सौरभ भोजपुरिया जी के लिखल दू गो भोजपुरी कविता

आई पढ़ल जाव सौरभ भोजपुरिया जी के लिखल दू गो भोजपुरी कविता, पढ़ीं आ आपन राय दीं की इ भोजपुरी कविता रउवा कइसन लागल,...
बब्लु सिंह जी

बब्लु सिंह जी के लिखल कुछ भोजपुरी कविता

आई पढ़ल जाव बब्लु सिंह जी के लिखल कुछ भोजपुरी कविता, पढ़ीं आ आपन राय बताइ कि रउवा कइसन लागल, रउवा सब से...
विवेक सिंह जी

विवेक सिंह जी के लिखल भोजपुरी कविता

बसंत के नशा गजब के नशा छा गईल बा ! ई बसंत जहीया से आगईल बा !! !! आपन-मन-अपने अगराईल ! कबो बधार त कबो बगईचा घुम आईल...
कवि ह्रदयानन्द विशाल जी

कवि ह्रदयानन्द विशाल जी के लिखल कुछ भोजपुरी कविता

ब्यास + गायक ए दुनू जाना मे अंतर होला जे कथा कहानी गावेला उ ब्यास गिनती मे आवेला जे खाली गाना गावेला सभे गायक ओके बतावेला हम मानतानी की कुछ...
दीपक सिंह जी

दीपक सिंह जी के लिखल भोजपुरी कविता कह के चल गइल

जेकरा कवनो लूर ना रहल, उहो कह के चल गइल साफ करत रह गइनी हमके सजी कचर के चल गइल ई ठीक बा,अइसे होला हम समझावत रह गइनीं रे बकलोल,...
संदीप कुमार सिंह जी

संदीप कुमार सिंह जी के लिखल कुछ कविता

दल बदलू नेता नेता जी के पेट हs की लमहर खेत इनकर एगो दल से काम ना चले दोसरा दल में ना जिईहन, ना भरी कहियो इनकर...
देवेन्द्र कुमार राय जी

देवेन्द्र कुमार राय जी के लिखल दू गो भोजपुरी कविता

कवन बात हम सीखीं -------------------------------- केकरा से जीनीगी के बात हम सीखीं। भईल समाज कनईल के फेंड़, उगल बा सगरो बेवहार के रेंड़। संस्कार के जलकुंभी हरिआता, चारो देने खाली...
कवि ह्रदयानन्द विशाल जी

कवि ह्रदयानन्द विशाल जी के लिखल कविता फटक के लऽ फटक के दऽ

बोलत नइखीं त बुझतारअ की सबसे लमहर घाँक बा ताहरा कवनो गरजे नइखे त हामरा कवन ताक बा काम निकल जाला तहिये से गिरगिट नियन बदल जालअ राम राम सुनला...
देवेन्द्र कुमार राय जी

देवेन्द्र कुमार राय जी के लिखल भोजपुरी कविता कईसन बिधना के रीत आ कहां...

कईसन बिधना के रीत समय अईसने बा बहकि जाला केहु, तनीए सा मिलते सहकि जाला केहु। चाहला प तनिको मिलल ना जवन, छनही में काहे बमकि जाला केहु। बिधना...
कवि ह्रदयानन्द विशाल जी

कवि ह्रदयानन्द विशाल जी के लिखल कविता भाँसा बोलीं भोजपुरिये

माई भाँसा के कदर करीं ए भइया आ जहाँ कहीं रही लेकिन भाँसा बोलीं भोजपुरिये एहि प लिखल कवि ह्रदयानन्द विशाल जी के कविता...
देवेन्द्र कुमार राय जी

देवेन्द्र कुमार राय जी के लिखल भोजपुरी बचावे के परी

लंगटा ह लंगटे रही लंगटे ई गाई माई बहिन के ई अपने गरिआई, अपना के बुझेला बड़का गवईया बेटी बहिन के ई मंच प लुटाई। इजत के बेंच...
देवेन्द्र कुमार राय जी

देवेन्द्र कुमार राय जी के लिखल कुछ भोजपुरी कविता

मुरारी कहां भेंटईहें भरल बाडे़ दुशासन सगरो चीर कहां से अईहें, करीं अरज कर जोडि़ के मुरारी कहां भेंटीहें। डेगे डेगे चीर खींचाता द्रौपदी के लाज के, भीष्म बनि देखतरुए ई दुनिया...
सौरभ कुमार जी

सौरभ कुमार जी के लिखल भोजपुरी कविता तोहार शहर से अच्छा मोरा गाँव

तोहार शहर से अच्छा मोरा गाँव $$$ तोहर शहर से अच्छा मोरा गांव $$ बा कुईया के ठंढा पानी 2 अउर पिपरा के छाव बा तोहार शहर...
देवेन्द्र कुमार राय जी

देवेन्द्र कुमार राय जी के लिखल भोजपुरी कविता हम भोजपुरीया

दुखवा कलेसवा में हिमत ना हारीला, सुखवा में कबो ना धाधाईं भोजपुरीया। सभके हो सुख चैन इहे हम मनाईला, दोसरा के दुख के संघाती भोजपुरीया। महला दुमहला के...
सौरभ कुमार जी

सौरभ कुमार जी के लिखल भोजपुरी कविता रे माई

तोहरा से मिलल ई सास तोहरे से मिलल ई जीवन रे माई, तोहरे से ई सब रिश्ता तोहरे से जुडल ई तन-मन रे माई, दुनिया ता...
सौरभ कुमार जी

सौरभ कुमार जी के लिखल भोजपुरी कविता बेटी

तुही ता हमार ताकत होउ ये माई हमरा के कोखिये में मत मारा ये माई आइब एह दुनिया में तोहर नाम रौशन करब दुःख दर्द सहब केहू...

शशिकान्त पाण्डेय जी के लिखल चार गो भोजपुरी कविता

रोज रोइला चिल्ला के करीबी ह सुन के दहाड़ के बाकी हम का करि हो समझ ना पाई छुपल हरकतवा के रिश्ता के...
विबेक कुमार पांडेय

विबेक कुमार पांडेय जी के लिखल तीन गो भोजपुरी कविता

हम ना जननी कि अइसन जुटान होइहें माई भाखा में गंगा असनान होइहें सभ चेहरा खिलल बा रंगे प्यार से सभे गले मिल रहल बा दिली...