इयाद के झरोखा से एगो मीठ सपना : अभियंता सौरभ भोजपुरिया जी

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सुना$ ना हमरा आज भी याद बा जब हमनी के पहिलका बेर एक दूसरा के नयन के जरिये मिलल रहनी सन । सावन के महीना रहे करिया करिया मेघ आसमान में खेल खेलत रहल । पूरा धरती अइसन लागत रहे जैसे कवनो दुल्हन हरियर चुनरी ओढले होखे ।

अचानक से तेज़ हवा बहे लागल आ तहार चुनरी हमरा ऊपर गिर गईल । तहार उ खुद में सिमट गईल भी याद बा हमरा । उ आँख से बात करे के सहमती जतावल । सच पूछ ता जब से तोहके देखले बानी ना जाने अईसन काहे लागत बा कि तुही हमरा सपना के शाहजादी हाउ। जइसे पपीहरा चातक चिरई खाली स्वाती नक्षत्र में बरखा के पानी पियेला ना त सालभर निर्जला व्रत राखे ला ।

पहिलके नजर में हमहुँ उ चातक जइसन कठीन व्रत के प्रन कर लेहनी की अगर जीवन साथी बनाइब ता सिर्फ़ अउर सिर्फ तोहके ना ता आजीवन कुँवार रहेम तब से जाने ई आँख सिर्फ तोहके ही ढूँढत बा ।

धन्यबाद केकर आ कईसे करी उ समय के आ की तहर उ दुपटा के जवना के चलते हम तहरा के देखनी । देखते ही अइसन भुझाइल की जईसे हमार कवनो वर्षो से भुलाईल अनमोल चिझ मिल गईल होखे ।

अभियंता सौरभ भोजपुरिया जी
अभियंता सौरभ भोजपुरिया जी

हमरा ता भरोसे ना होखे की हम चाँद के अतना नजदीक से देख रहल बानी तू करिया करिया बदल आउर हवा के तेज़ झोखा आम के बगीचा में परी जइसन लागत रहलु । गुलाब के पंखुडी जइसन होठ लागत रहे कुछ कहे खातीर सूर्ख हो रहल बा । हमरा दिल में समुंदर जइसन लहर के झोखा आवे लागल । डर भी लागत रहे की तू कही कुछ गलत मत समझ जा !

हमरा समझ से ई शायेद पहिला नजर के प्यार रहे । मन कबो कहे की हम जा के आपन हाल बता दी तोहके ?? कबो घबराये की ना ई अभी चन्द पल के मुलाकात में तू कइसे केहु के अपना मान लेबु$$$ इहे सोच रहनी की तबले तहार पायल के छम छम सुनाई पडल हम सहम गइनी ।

तोहर चाँद जइसन चेहरा पर हँसी देख के हमारा हिम्मत आइल अइसन लागल की तू हमरा के देखे खातीर अतना करीब आईल बाड़ू । तहार झील जइसन गहीर आँख में आपन चेहरा देख के कुछ देर खातिर हमरो चेहरा सुर्ख हो गईल भा ई कहा कि हमहुँ लाजा गइनी ।

तू जब आपन हाथ आगे बढ़वलु ता हम सब समझ गइनी आ सोच लेहनी की तोहके आपन जीवन साथी बना के सात जन्म ले देखत रही । तोहर जल्दी जल्दी में आपन पता देहल सरमा के भाग गईल । सब कुछ याद बा हमरा $$$$$$$।

ओह दीन के बाद ता हमार दुनिया ही बदल गईल । रात में खुला आसमान के नीचे घूमे लगनी रात – रात भर तारा जोनही गिनि आ खुद से बात करे लगनी । चाँदनी रात में तहरा नाम के कविता लिखीं । गर्मी के घाम गुद गुदाये लागल । दुनिया गुलाबी हो गईल ।आँख से नींद चुरा ले ले रहलु तू । ख्यालो ख्यालो में घंटो पैदल घुमत गीत गुन गावत रही ।

ऐ जी सुनी ना # इहे पहिलका शब्द रहे तोहार जब पहिलका बेर हमरा से तू बोलले रहलु । आज 25 साल हो गईल हमनी के प्रेम के बंधन में बधाई । लाजा मत ला हई एगो छोट तोहफा हा । हमेसा जीवन में गुलाब लेखा रही हा जवन टूट के भी दू गो दिल प्रेमी आत्मा के मिलावे ला ।

तबले पानी के तेज धार देह पर पड़ल आ उनकर तेज़ आवाज …..

ए जी का सुतल सुतल बारात बानी कुल बेटी पतोह सुन के हँसत बाड़ी सन नन्नन्न। घाम कापर पर ले आ गईल आ इनका गुलाब धइले बा हूँ ऊऊऊ जाइ होने खेत में कटिया कराई मलकिनी कहली । तबले देखनी की धत तेरी के ई ता हम सपना देख रहनी हाँ।।

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