हरेन्द्र कुमार जी के लिखल भोजपुरी उपन्यास सुष्मिता सन्याल कऽ डायरी

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हरेन्द्र कुमार जी के लिखल भोजपुरी उपन्यास सुष्मिता सन्याल कऽ डायरी
हरेन्द्र कुमार जी के लिखल भोजपुरी उपन्यास सुष्मिता सन्याल कऽ डायरी

साँच कहानी से भी विचित्र होला। काहे कि-साँच बोले आ सुने के ताकत आदमी में ना होला। झूठ खातिर कवनो मापदण्ड नइखे-एही से झूठ हमेशा पूर्ण होला।

लेकिन साँच हमेशा अर्द्धसत्य होला काहे कि साँच कहावे खातिर ओकरा सामाजिक मापदण्ड के मुताबिक होखे के पड़ेला। तऽ इ कहानी भी अर्द्धसत्य ही बा।

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भोजपुरी में लिखे खातिर हमार आपन स्वार्थ निहित बा। हमरा दूसरा कवनो भाषा में लिखे में हमेशा डर लागल रहेला। आ भोजपुरी माई के गोद जइसन बा। हम जानतानी कि भले माई से दूर बानी, बहुत दूर, लेकिन उनके पास जाइब त उ हमरा के डटहीन ना हमार गल्ती माफ कर दीहन।

-हरेन्द्र कुमार

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