लवकान्त जी के लिखल भोजपुरी व्यंग खदेरन के पाठशाला, मुद्दा बा चुनाव

परनाम ! स्वागत बा राउर जोगीरा डॉट कॉम प , रउवा सब के सोझा बा लवकान्त जी के लिखल भोजपुरी व्यंग खदेरन के पाठशाला ( Bhojpuri vyang khaderan ke pathshala) , एह पारी के मुद्दा बा चुनाव, पढ़ीं आ आपन राय जरूर दीं कि रउवा लवकान्त जी के लिखल खदेरन के पाठशाला के इ कड़ी कइसन लागल आ रउवा सब से निहोरा बा कि शेयर जरूर करी।

(बताशा के पटक के ओकरा छाती प ठेहुना धंसा के लबेदा मुक्के-मुक्के मार रहल बा, बताशा ओकर झोंटा ध के टंगाइल बा, खदेरन ओकनी के छोड़ावे के कोशिश करता, मास्टर साहेब के प्रवेश, खदेरन भाग जाता अपना सीट पर, मास्टर साहब ओह दुनु के हटावत बारें)

मास्टर साहेब- हटो, चलो छोड़ो …..ई का WWF का मंच बना रखा है तुम सब क्लास को, हटो नहीं तो मंगा के डंटा बदोह देंगे दुनु के।

(दुनु हट जातारें स)

मास्टर साहब- काहे एक दूसरा को लतिया रहे थे तुम लोग।

बताशा- हम कहाँ एकरा के लतियावत रहनी ह, इहे हमर छाती के बाती भस्कावत रहे।

मास्टर साहब- काहे रे लबेदा, ढ़ेर पहलवान भये हो।

लबेदा- ई हमरा के गारी दी त छोड़ देम का , बत्ता लेखा ओदार देम ध के ?

मास्टर साहब – फेर, सहूर से बोलो नहीं तो बलखोइया छोड़ा देंगे मारते-मारते। काहे जी बताशा, काहे गाली बक रहे थे।

बताशा- (दांत के खून पोंछत) ई पहिले उल्टा सीधा कहलक तब नु हम गारी बकले बानी।

मास्टर साहब- गोल गोल बताशा मत पाड़ो , साफ-साफ बोलो मामला का है, शुरुआत कैसे हुआ?

ढ़ोंढ़ा- मारसाएब हम बताई का ?

मास्टर साहब – हं बताओ बाकी किसी का पक्ष मत लेना।

लवकान्त जी के लिखल भोजपुरी व्यंग खदेरन के पाठशाला
लवकान्त जी के लिखल भोजपुरी व्यंग खदेरन के पाठशाला

ढ़ोंढ़ा – ठीक बा, सबसे पहिले हमनी के चुनाव पर चर्चा करत रहनी, खदेरन कहलें की चुनाव में मतदान जादा से जादा होखे ह खातिर हमनी के एगो नुक्कड़ नाटक तइयार करके गांवां-गांईं खेलल जाई।

मास्टर साहब – अरे बकलोल सब अभी त तुम सब भोट देने का उमीरो में नहीं है तब काहे एतना टेंशन ले रहा है?

खदेरन- हमनी के भले अभी 18 के नइखीं बाकी समाज खातिर जिम्मेवार बने के अभिये से नु सीखे के होई।

मास्टर साहब- बईठो, इतना बड़का-बड़का बात बोलते हो , नेता बनोगे क्या? चलो जी ढोंढा तुम आगे बताओ।

ढ़ोंढ़ा- एहिसब बात में लबेदा कहलस ह की हमर बाबूजी कहत रहलें की अबकी के भोट जाति-पार्टी से ऊपर उठ के काम करेवाला फूल छाप वाला विकास बाबू के दियाई। त बताशा कहलस ह की हमनी के घरे त सभे महागठबंधन के दिही।
मास्टर साहब – हं त ठीक त बोला बताशा, हमहू महागठबंधन छाप पर ही मोहर मारेंगे।

चिरकुट- ए मारसाएब अब मोहर मारेवाला जमाना गइल अब evm में बटन दबावे के होला।

(सब लड़िका हंसत बारें स)

मास्टर साहब – हमको भी पता है evm, जादा चकबन्दर मत बनो समझे न , नहीं तो एतना डांटा गिराएंगे की गिनती नहीं कर पाओगे , बुझाया!! हं जी लबेदा, बताशा के बात में लड़ाई करने का का बात था?

लबेदा- ओकरा बाद हम कहनी की जाति-पार्टी से ऊपर उठबे तब नू ,तोर दादा त कहत रहलें की चालू जी हमनी के गांव खातिर कुछ ना कइलें बाकी जातिभाई के नाते उनके के नु भोट दियाई। तब बताशा कहता कि आ विकास बाबू तोरा माई के भतार बारें का की उनके के भोट देबे। एहि बात पर हम एकरा के हुंकनी ह।

मास्टर साहब- एक एक बित्ता के हुए नहीं कि लगे राजनीति पर बहस करने, अरे अभी पढ़ाई-लिखाई में ध्यान रखो।

चिरकुट- मारसाएब, आज के राजनीति के लेके राउर का विचार बा?

मास्टर साहब – हम त देख रहे हैं कि जनता बहुत बेवकूफ हो गई है, एकदम अनपढ़े वाला काम कर रही है , यादव है त यदवे को भोट देगा, मुसलमान है त मुसलमाने को, कोइरी है त कोइरिये को, लाला है त लाले को, भुंझार है त भुंझारे को आ पंडी जी हैं त पंडिये जी को…भले उसके जाति का नेता कौनो काम किया हो चाहे नहीं। हम सब कब तक गुलाम वाला सोच रखेंगे जी अब जो विकास का बात करे उसही को भोट देना चाहिए।

चिरकुट – बाह मारसाएब, पहिला बार राउर बात हमरा अच्छा लागल।
(फेर ठहाका उठता)
मास्टर साहब- हमरा बात बुझने के लिए दिमाग होना चाहिए।

खदेरन – ओइसे मारसाएब अबकी केकरा के भोट देब?

मास्टर साहब – हम त फालना बाबू को ही भोट देंगे आखिर जातभाई नू हैं।

खदेरन – अबगे नू रऊआ जाति पर भोट देला खातिर सभे के बेवकूफ आ अनपढ़ कहत रहीं, आपना बेरा भुला गईनी। जबकि राउर फलना बाबू अपना कार्यकाल में एगो चापाकलो ना लगववलें।

मास्टर साहब – आउर कुछो किये चाहे नहीं हमारा नोकरी त वही न लगवाए….

लबेदा – उहो मात्र तिने लाख में

खदेरन – आ सर्टिफिकेटो जालिये बा।

(सब लड़िका हंसत बारें स, घंटी बाज जाता)

मास्टर साहब – शुक्र मनाओ की घंटी बाज गया नहीं तो आज तुमसबको सोंटवस्ते बिजोड़, हम अपना बदली करा लेते है इस स्कूल से ना त तुमलोग नोकरी खा जाओगे, भागो अब।

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