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दीपक तिवारी जी के लिखल भोजपुरीया समाज

दीपक तिवारी जी
दीपक तिवारी जी

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जब घोरिये के पीये के बा हमनीन के लाज,
कइसे के बाँची भोजपुरीया समाज

करेला खराब केहू होला बदनाम हो,
दूसरे के माथे मढा़ला इल्जाम हो
कइसे के कइल जाव एकरा प नाज
कइसे के बाँची भोजपुरीया समाज………….

सभकर जिमेवारी बा सभ कर ई फरज,
हाथ जोड़ के सभका से करs तानी अरज
भाषा प अपना जनि गिरे दी लो गाज
कइसे के बाँची भोजपुरीया समाज………….

सोची लो विचारी लो का करे के बाटे,
रोज रोज देखी के करेजा हामार फाटे
कहियाँ ले उजड़ी फुहरपन के राज
कइसे के बाँची भोजपुरीया समाज………….

अशलीलता के जाने होई कब कहियाँ ले पतन,
आ कहियाँ सुरक्षित होई भाषा भोजपुरी रतन
काँहें आदत से अपना लोग नइखे आवत बाज………….
कइसे के बाँची भोजपुरीया समाज

घर परिवार आपन भइल जाता दूरा,
एकर असर हमनी प पड़ता बुरा
सभ केंहूँ मिल के उठावे के आवाज………….
कइसे के बाँची भोजपुरीया समाज

सभे इंसान हउँए थोड़ बहुत ज्ञान बा,
भोजपुरी भाषा आपन जान परान बा
कुछ अइसन कइल जा की ऊपर होखे ताज…………..
कइसे के बाँची भोजपुरीया समाज

भइल जवन भूल जा कइलs का करनी,
अबो से आव बसाव आपन घरनि
मन के मइलियाँ के अबो से लs माँज
कइसे के बाँची भोजपुरीया…..

आपन अपने जनि इजतियाँ उछालs,
घरवा के अपना अब तू ही सम्भालs
अबो से तनिका तू करs लिहाज………….
कइसे के बाँची भोजपुरीया-समाज

एके बचाव तू अपना बचाव में,
दीपक तिवारी रहs एकरे तू छाँव में
आपन करालs तू ढंग से इलाज……………
कइसे के बाँची भोजपुरीया-समाज

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