ईया हो | आकृति विज्ञा

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हम्मे नीनि अवते न रहे
जवन पीरितिया
रतिया भर लोर बनिके
अँखियां से चूअत रहे
जवना बदे एक्को आखर
रून्हल गटई पार न क पवलसि
पूरा पलेवार
टूटहा रूद्राक्षे क माला नीयन
तीनिर बीनिर परल बा
परल कहाँ ?
फेकल बा हे!
मारल मति अपने अलंगिये
एने ओने भागतिया स।

अस लागेला कि
आन्ही बीति गईल
बकि उड़ा ले गईलि
ओ बीरिछिया के परान
जवने पर
बईठति रहे गऊरईया
कूहूंकति रहे कूजरि
बऊआत रहे तोता
पहुना के अईला के सनेस
बांचत रहे कऊआ
खीझिआईल मैना
सूति जाति रहे पटा के
कब्बो कब्बो चकया
चकई जोहत बेरि लड़ि जा
ँचकी पुलई से।

जवना के मोट सोंट ताना देखि
आपन कपार खजुआवे लिलगाई
पीठिया एकटक्के रगड़ति रहे
चन्नरवा के गभिनकी भईंसिया
ओहि आंड़े ठेप्पा के लिसान गोंजत
टिप्प मरा जा बबली।

ओहि बीरिछिआ तरे
बईठें से मजूरहा
नवकी दुलहिनिये
डल्लफ आगोरत
मार लेत रही सन दुई नीनि।
बड़की काकी खाति रहे
काका से चोरा के मीठ मान..
आ छोटका भईया
धीरे से निहारि लें
मन भरि के
परकसवा के चऊथकी दीदी के।

जेठ के चढ़लि दुपहरिया बेरि
पंडित महरी चरवाहा मुंशी फकीर
सब सुस्तावे ओहि तरे
जईसे छोटके लईकवे
लुका जाने सन
ईया के कोठरी में
चाहे माई के अँचरा में…

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