मिथिलेश ‘मैकश’ जी के गमछा / गमछी बारे में लिखल एगो आलेख

मिथिलेश 'मैकश' जी के गमछा / गमछी बारे में लिखल एगो आलेख
मिथिलेश 'मैकश' जी के गमछा / गमछी बारे में लिखल एगो आलेख
मिथिलेश 'मैकश' जी के गमछा / गमछी बारे में लिखल एगो आलेख
मिथिलेश ‘मैकश’ जी के गमछा / गमछी बारे में लिखल एगो आलेख

एगो अइसन चीज ह जवना के जेतने बराइ कइल जाव ओतने कम बा। कुछ लोग एकरा के गमछा भी कहेला आ कुछ लोग एकरा के गमछी भी कहेला। बिहार भा यु.पी पूर्वांचल धइले मये देश मे देखे के मिल जाइ। जइसे आसाम के जवन उजरका गमछा होले ,ओकरा के लोग (आसामी) बड़ी इज्जत से गरदन पे डाल के चलेला, जइसे सरदार आपन पगरी बान्हेंला , जइसे राजस्थानी लामा चउरा मुरेठा बान्हेंला , ओसही अपना की ओर खासकर भोजपुरिया क्षेत्र मे देहा देहि आ घरे घरे देखे के मिल जाइ की कइसे एगो भोजपुरिया गमछी से लिलारी बान्हेंला।

भले आज बड़ बड़ लोग गमछी के आधुनिक तौलिया के इस्तेमाल करत बा ,बाकी देखल जाव त सब कुछ के उपाय एकहि गमछी मे बा । देखी रउवा के हम एकर एक से एक फायदा जोड़वावत बानि।

1. अगर रउवा एगो गमछा ले लि त रुमालो के भी काम कर दी। असल मे बड़का लोग गमछा रखे मे लजा लो एहिसे कई टुकि मे काकाट के रुमाल के तौर पर इस्तेमाल करत बारन लो।

2. चाहे गरमी होखे भा सर्दी , तौलिया के सुखावे मे बड़ी समय लागेला ; उहे गमछा के धो के रसरी पे टांग दी आधा घण्टा के अंदर सुख के टनटना जाला।

3. आपन बुढ़ पुरनिया लोग कहेला की जहां भी बारात जइहा त एगो गमछी जरूर ले ले जइहा । काहेसे की जीन्स पायट आ सुट बुट पेहनके कब ले टाईट रहबs। गमछी रही त टन से बदल ल। अगर कुर्सी, खटिया ना मिलल समियाना मे ,त नीचे भुईया गमछी बिछा ल। बड़ी आराम मिली।

4. जेठ के महीना मे कही जे घर से निकलबा त साच कहत बानि झुरा के करीया ही जइबा। सब फेरा लवली फेल हो जाइ। उहे एगो गमछी रही त छाता नियन काम करी।

5. मान ल रेडीमेड पाएट किल लेलs आ उ ढीला हो गईल आ ओहि दिन कही जग परोजन मे जाये के बा त , का समय बा की फेर तुरंत दोकान जइबा। ओकरा से त बढ़िया बा की गमछी के बेल्ट लेखा बान्ह ल आ ऊपर से टीशर्ट चाहे कुर्ता डाल ल। के देखता की अंदर का पेहनंले बारs।

6. कहीं जे नेवता मे गइलs आ छाना बाना मिलल त बान्ह ल गमछा मे। कहां बार बार झोरा खोजल फिरबs। दु दु गो झोरा के बराबर बा एगो गमछा।

7. एगो अगर साथ मे गमछी रही त रउवा नेहाए धोवाए के कवनो दिकत ना होइ। चाहे रउवा गंगा जी के किनारे नहाइल चाहत बानि चाहे कही भी। झट से गमछा पेंहि पट से नहा लि। फेर गमछा के मूड़ी पे डाल दि। झंडा नियर फहरात फाहरात रास्ता भर मे घरे आवत तक सुख जाइ।

8. कई गो ट्रेन मे त कन्फर्म सीट जइसन काम करेला गमछा । ना होखे त देख लिहि जन- साधारण एक्सप्रेस मे , जेकरा सीट ना मिले उ दु गो लोहा के बीच मे गमछा के झुलुआ नियन बान्ह के मज़ा से झुलत जगहा तक पहुच जाला।

9. कहीं कुछ टांगे के बा त गमछा के रसरी के तौर ले इस्तेमाल आराम से कर सकत बानि। टाँगना मे एकरा नियन कवनो दोसर चीज नइखे।

10. अब हर जगह त छिपा लोटा त लेके ना नु घूम सकत बानि।एहिसे अगर सतुआ साने के बा चाहे आगी प के लिट्टी के गर्दा झारे के बा त गमछा बिना सब अधूरा लागेला। गंगा जी के किनारे लोग बड़ी पसन से गमछा पे सतुआ सांन के खाला।

गीनावल जाव त मए फ़ेसबुक के पेज भर जाइ एकर बखान कइला पs । फिर भी जेतना बुझाइल ह ओतना लिखनी ह। हमरा त गमछा प बड़ी नाज बा। ढ़ेर लोग भले मज़ाक उरावत होखे मगर असलियत इहे बा की जब कहीं फसबs त पाका याद करबs की सब जगह रुमाल काम ना करी। एहि से जहा जइहा गमछा ले जइहा।

रउवा खातिर:
भोजपुरी मुहावरा आउर कहाउत
देहाती गारी आ ओरहन
भोजपुरी शब्द के उल्टा अर्थ वाला शब्द

देखीं: भोजपुरी के पुरनका फिलिम

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