ह्रदयानन्द विशाल जी के लिखल भोजपुरी कविता आ गीत

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लाचारी गीत

बितता फगुनवा ए रामा
अइले ना साजानवा हो
बिरह अगिनिया से
जरता बादानवा हो
बितता………

सापना मे देखिले की
सइयाँ अइलन घरे
निनिया के टुटते
चिहा जानी डरे
पिया के जोहिले बटिया
छछने पारानवा हो
बितता………

कगवो उचारे नाही
करिले नीहोरा
दुध भात खा गइल
खोरा के खोरा
इहो महटियावे नतिया
करता बाहानवा हो
बितता………

के जाने करेजा हमार
बाड़न कावना हाल मे
मानवा रमल रहे
ह्रदया विशाल मे
बिंदिया बोलावे रहि रहि
खनके कांगानवा हो
बितता………

फागुन मे बुढ़ऊ लो बाड़ा गच बा जी लाचारी गीत

बुढ़ लो के जँतले बा बुढ़ारी
हो अब का तनिहें पिचकारी
बुढ़………

चानी पर के बार जेकर
हो गइल नापाता
उहे लोगवा नवकन से
बेसी छरियाता
साठ पर सठियइले ई मुआरी
हो अब का तनिहें पिचकारी
बुढ़………

हिनकर अँइठल अउरी हमरा
देखल नइखे जात हो
चभर चभर मुह चले
एकहु नइखे दाँत हो
सुनते दिहन काटल काटल गारी
हो अब का तनिहें पिचकारी
बुढ़………

हिनके देखअ चलल बाड़न
लाठी ले के ठेगत
इनहु के उहे किरवा
बाटे उदबेगत
ह्रदयानन्द होली मे हइ लाचारी
हो अब का तनिहें पिचकारी
बुढ़………

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कवि ह्रदयानन्द विशाल जी
कवि ह्रदयानन्द विशाल जी

बाप के नाव साग पात बेटा के नाव…कविता

घरवे के लोगवा सरहले बा
ई पुताली चढ़ल गाछा बा
आगे चलके इहे बैल हो जाई
अबहीं बबुववा बाछा बा
आगे………

माई के एक लोटा पानी ना देला
बापे के मारे पर जाला
काम के नाम जब सुन लेला त
मुहवे एकर झोंकर जाला

नाथ ना एकरा आगा बाटे
पगहो ना एकरा पाछा बा
आगे चलके इहे बैल हो जाई
अबहीं बबुववा बाछा बा
आगे………

संस्कार सब एकरे भीतर
कुट कुट के भरल बा
दिन भर एही के चरचा करे
ई जेकरा सोझा परल बा

पानी पी पी के सभे गरियावे
एकर रहन एतना आछा बा
आगे चलके इहे बैल हो जाई
अबहीं बबुववा बाछा बा
आगे………

हे भगवान मुदइये के तूँ
औलाद अइसनका मति दिहअ
ह्रदया विशाल कहे देबे से
पहिले माई बाप के हति दिहअ

सब कुछ रहते लंगटे घमेला
खुँटी पर टंगले ई काछा बा
आगे चलके इहे बैल हो जाई
अबहीं बबुववा बाछा बा
आगे………

बितल बाति के भुलवा दीं हँसि के कविता

केहु नइखे संसार मे सुखी
सभे मुसीबत मे फँसल बा
रोवला से दुख घटी नाही
एसे जरुरी हँसल बा
रोवला से………

जइसन करनी ओइसन भरनी
लिखे वाला लिख गइल
ओकरा कावना बाति के डर
जे प्रेम करे के सिख गइल

नजर दउरा के रउवे देखीं
बैमानी के धन कहीं रसल बा
रोवला से दुख घटी नाही
एसे जरुरी हँसल बा
रोवला से………

केतनो दुखिया बानी त का ह
हँसि के मन बहलावत रहीं
सदा रहीं खुशहाल भीतर से
दोसरो के गुदरावत रहीं

पानी से दाबे के कोशिश करीं
ममिला जबले गर्मसल बा
रोवला से दुख घटी नाही
एसे जरुरी हँसल बा
रोवला से………

ह्रदयानन्द विशाल कहेले
हम से दुखिया के बाटे
तरस खा के उहो रो दिहल
हमरा के चिन्हले जे बाटे

आनका ओठे मुस्कान सजावे
उहे लोग हिया मे बसल बा
रोवला से दुख घटी नाही
एसे जरुरी हँसल बा
रोवला से………

बिरह गीत

सइयाँ मोर बसेले विदेश ए सखी
हम घरे काटिले कलेश
सइयाँ………

कहु कहु कागवा कहिया
मिली समाचार शुभ
रेंगनी के काँट जस
गड़े सेजिया चुभ चुभ
देता बिरह वेदना हमार
पुरा देंहियाँ लेश, हो पुरा
सइयाँ………

अन पानी सुझे नाही
माहुर मुह भइल
आवे नाही निनिया उड़ि के
चान भिरी गइल
अबकी ना अइहे त
करबि जा के केश, हो करबि
सइयाँ………

ताना जमाना के
हलि जाता हाड़ मे
ह्रदया विशाल बाड़न
रुपिया के जोगाड़ मे
अरब के दरब हमरा
भावे ना भावेश, हो भावे ना
सइयाँ………

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