जय-जय सब भारतवासी के | संग्राम ओझा “भावेश”

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परनाम ! स्वागत बा राउर जोगीरा डॉट कॉम प, आईं पढ़ल जाव दू गो भोजपुरी कविता जय-जय सब भारतवासी केजवना से तौबा कइले रहनी, भोजपुरी कविता के लेखक बानी संग्राम ओझा “भावेश” जी। पढ़ीं आ आपन राय जरूर दीं कि रउवा संग्राम ओझा “भावेश” जी लिखल भोजपुरी कविता कइसन लागल आ रउवा सब से निहोरा बा कि अगर रउवा सब के रचना अच्छा लागल त शेयर क के आगे बढ़ाईं।

जय-जय सब भारतवासी के

सभ्यता संस्कृति के देश रहे,अब त कुछु अउरे शुरु भइले,
सोने के चिडीयाँ भी उड़ गइल,ना जाने कहाँ विश्वगुरु गइले,
लोक लाज के भुल गइल सभे,पश्चिम सभ्यता अपनावता,
फैशन में फाटल कपड़ा पहिन के,आधा देही देखावता,
सब जान के जहर पिये सबहीं,इहाँ रुप लेला अविनाषी के,
जय जय भारत-जय जय भारत,जय जय सब भारतवासी के –१

जय-जय सब भारतवासी के
जय-जय सब भारतवासी के

राजनिति के बिहड़ रुप,जन मानस के झकझोरत बा,
चोर,लुटेरा,साधु,सन्त ई केहु के ना छोड़त बा,
शासक होला बढ़ीयाँ जब,विकास होला सम्राज्य के,
चाहें विरोधी निमन होखे त,काम करावेला ताज से,
राज्य देश के छोड़ ,माया से फरका जे धुनि रमावेला,
मोक्ष के खातिर जग छोड़ेला,अपनो घर ना आवेला,
बाकिर आज सब उल्टा बा,सत्ता मिले साधु-सन्यासी के,
जय जय भारत-जय जय भारत,जय जय सब भारतवासी के –२

बिगडल नइखे अबहीं कुछ,अबहूँ से चली सुधार होखो,
जेतना देश में भरल बुराई,पहिले ओह पर वार होखो,
देश के बाद में छोड़ी ,पहीले अपना पर विचार होखो,
रउरा सुधरब त देश सुधरी,सब ऐकरा ला तइयार होखो,
प्यार से काम चलाई त,जरूरत पड़ी ना ‘संग्राम’ फाँसी के,
जय जय भारत-जय जय भारत,जय जय सब भारतवासी के –३

जवना से तौबा कइले रहनी

पडे ना देब ओकर छाया हो,
अब फेर भइल उहे गलती,
बेवकुफ बानी की बेहाया हो?

हम प्रित में धोखा पवले रहनी,
तब मन हमार बउराइल रहे,
काहे के कइनी प्रित उनसे,
का माथा में हमरा समाईल रहे?
वादा रहे खुद से प्रित ना होई,
अब समझ ना पाई माया हो,
फेरु नया प्यार में धरा गइनी,
बेवकुफ बानी की बेहाया हो?

उनकर कुछ गलती याद आवे,
त प्रित से मन मोर काँप जाला,
बाकिर इनकर बा काम अनोखा,
सब संका के हमरी ढ़ाँप जाला,
हमरा नियरा ई रहस हरदम,
जइसे होखस मोर साया हो,
हम नया प्यार में धरा गइनी,
बेवकुफ बानी की बेहाया हो?

उनकर धोखा औरी इनके वफा,
बीचें में हम अटकल बानी,
प्रित ना करे के रहे कबो,
कइनी हम,फेर भटकल बानी,
उनके सुरत देखी ख़ीस बरे,
इनके जब देखी,आवे दया हो,
फेरु नया प्यार में धरा गइनी,
बेवकुफ बानी की बेहाया हो?

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