जलज जी के लिखल दू गो बाल कविता

परनाम ! स्वागत बा राउर जोगीरा डॉट कॉम प , रउवा सब के सोझा बा जलज कुमार अनुपम जी के लिखल तीन गो बाल कविता, पढ़ीं आ आपन राय जरूर दीं कि रउवा जलज कुमार अनुपम जी के लिखल बाल कविता कइसन लागल आ रउवा सब से निहोरा बा कि एह कविता के शेयर जरूर करी।

गाँधी बाबा
गाँधी बाबा गाँधी बाबा
देश के बापू गाँधी बाबा
गोरा भगवलें देश बचवलें
बन के अइलें आँधी बाबा
गाँधी बाबा गाँधी बाबा।

राजकुमार बोलावे गइलें
उनके साथे बापू अइलें
आके सत्याग्रह कइलें
निलहन से मुकुती दिलवइलें
गाँधी बाबा गाँधी बाबा।

सपना राम राज के बुनलें
आ सुराज के सपना देखलें
सत्य अहिंसा के राही बन
असहयोग के राह देखवलें
गाँधी बाबा गाँधी बाबा।

मर के अमर कहइलें गाँधी

सच के राह देखइलें गाँधी
सद्विचार उनकर बा जिन्दा
जग उजियार बनवले गाँधी।
गाँधी बाबा, गाँधी बाबा
बनके आइलें गाँधी बाबा।

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गनित भयंकर

पापा के पैना
मास्टर साहेब के डर
हिम्मत एतना
केहू से जाई लड़
बस, हालत खराब करे
गनित के सवाल
अंकगनित, बीजगनित
ज्यामिति बवाल
गनित ना माथे परे
लागेला भयंकर
हाथ जोड़ धेयान लगाईं
इयाद आवस शंकर।

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घोघो रानी केतना पानी
दिन में दउड़े रात बेचैनी
पइसा ला परेशान जवानी
थकल भुखाइल जिनगी पूछे
घोघो रानी केतना पानी।

जब से आइल बा रसायन
तबसे नयकी पीढ़ी भुलाइल
सोआरथ बस सब नाता बाटे
अपनापन नपाता बाटे
खतम भइल सब बात पुरान
घोघो रानी केतना पानी।

बूढ़शाला में बुढ़ऊ गइलें
घर से बोहिआवल गइलें
अब केकरा से सुनी कहानी
घर से गइली बुढ़िया नानी
घोघो रानी केतना पानी।

जलज कुमार मिश्रा जी
जलज कुमार मिश्रा जी

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