खाली सोशल मीडिया या कुम्भ के दिन हल्ला मचवला से भोजपुरी के उद्धार ना होइ : विवेक सिंह

विवेक सिंह जी
विवेक सिंह जी

हम विवेक सिंह बिहार, सिवान, पंजवार के निवासी हई। हम रउवा सब से कुछ कहे अउर सुने के चाहतानी।। न त हम कोनो ज्ञानी हई नाही हम ज्यादा पढ़ल-लिखल बानी।।। बाकिर दिल अउर दिमाग मे एगो बात चल रहल बा। जोन हम साझा करें के चाहत बानी, सब से इहे निवेदन ब की एक बार जरूर पठी अउर जरूर बिचार करि।।

हमरा किहा भोजपुरी के एगो माहकुम्भ होला साल में एक बार। ओमें देश, प्रदेश अउर हमरा गांव, जवार, हर जगह के लोग आवे ला अउर उ कुम्भ में अपना के पवित्र करेला सब।। हम भी जानी सब काम करे नी अउर बहुत अच्छा लागे ला सब से मिल के।। स्वच्छ भोजपुरी खातिर लड़त अउर चलत ई अभियान हमरा दिल, दिमाग के उ दुनिया मे ले जाला जहा हम एगो सुन्नर, सम्पूर्ण स्वच्छ भासी अउर शिक्षित समाज के दरसन करेनी हमार हृदय खुशी के मारे पागल हो जाला।।

भोजपुरी भाषा सीखे : LEARN BHOJPURI LANGUAGE

लेकिन एक रात के बाद फिर उहे सब थोड़ा सा भी बदलाव न थोड़ा सा भी झुकाव न।। आखिर ई होत का बा हम सोचेनी, अउर सब से पूछे नी का भाई अभी अभी त हमनी के अश्लीलता के विरोध कइनी जा अउर अभिये एक रात बाद तू उहे राह पे ।। त जबाब का मिलेला ।। अरे उ त एगो प्रोग्राम रहे ओसे का होखे के ब।। केहू ओकरा के अमल थोड़ी करी।। ई सुन के हमार मन मे बहुत दुख होला, अगर हम कुछ भी समझाई या कहेनी त केतना लोग हमरा के पागल कहे लागे ला।।

365 दिन में से एक दिन के कुम्भ में नहा के त सब कोई अपना के पवित्र कर लेवे ला। बाकिर अउरी 364 दीन उहे रहे ला, आज हम सोसल मीडिया से जुड़ल बानी त बहुत कुछ देखत बानी सुनत बानी।। बाकिर ई कब तक चली।। कोनो भी संस्था होखे या कोनो भी अभियान ओकरा के चलावल सही ब भीड़ भी जुटावल असान ब।। लेकिन सब के जहन में उतारल बहुत कठिन बा,ई बात समझे के पड़ी।। काहे कि जे भी जहा से आवत ब उत वापस चल जाता। अउर अश्लीलता विरोधी उ मंच उजरल खोता नीयन ताकते रह जाता। जब ओकरा पास कोनो बरात आके ठहरत बा अउर अभद्रता भरल गाना उ मंच के कान में जब जाता।। ओकर उद्देश अउर ओकर लक्ष्य के स्कार के करि।। खाली सोशलमीडिया या कुम्भ के दिन हल्ला मचावे वाला उ भीड़।

महाकुम्भ लगाई सभे कोई भी संस्था होखे ओकरा में कोनो बुराई नइखे। जब तक महाकुंम्भ में हिस्सा लेवे वाला अउर ओमे पवित्र होखे वाला जब भी गावे आवस त उ एक बार जरूर एगो सभा आयोति करस अउर ओमे ई प्रस्ताव रखी की खालहमिनी के बोले से न होई।। एकरा के करे के भी परी।।

जइसे पहिलका काम आपन परिवार में भाई, भतीजा जेभी बा ओकरा के रोकी ।। अउर समाज के ठेकेदार सब के मिली अउर बात करि सब।। की आवे वाला समय मे हमनी के अपना से छोटकन ख़ातिर का छोड़ तानी सन।। जेकरा घरे बरात या तिलक चाहे जोन भी फँसन होता त ओमे अश्लीलता भरा गाना या आर्केस्ट्रा न करि सब।। पहिले अपना पे लागू करि अउर समाज मे भी लागु करी।। काहे कि हर गांव के तस्वीर बदल रहल बा।। पहिले त ओह सब से भी निहोरा बा जे भोजपुरिया होके भी भोजपुरी से भागता ओर ओकरा के गन्दा नजर से देखत बा।।

कोनो भी कुम्भ में नहईला अउर जय घोष कईला से ई मईल धुली ना। जब तक हर घर के लोग बदली ना।। पहिला बिरोध खुद आपना से अउर परिवार के सदस्य ओकरा बाद संघतिया सबसे रिसरेदार से तब जाके समाज के ठेकेदार से।।

जोन भी अभियान चलता उ सब ठीक ब।। बाकिर का उ अभियान के कुम्भ में नहाये वाला अउर पवित्र होखे वाला खाली ओहि जा तक रहतरे ओकरा बाद सोशल मीडिया पर आजात बारे।। करीब से देखी कोनो भी बात के।। घर घर जाई उ कुम्भ बितला के बाद फिर देखी का बदलाव ब एक रात के त बात रहे ला ।। अउर लोग का कहे ला बहुत अच्छा प्रोग्राम रहे, के कइसे गावत रहे, नाचत रहे, हसावत रहे, बाकिर ओकर उद्देश्य का रहे ई बहुत कम लोग बताई!अउर ओपे अमल भी कमे लोग करत भेटाई ।।।

विवेक सिंह पंजवार।।

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