विमल कुमार जी के लिखल कुछ भोजपुरी गज़ल

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तड़प प्यार के का इ होला बुझाई,
हिया में केहु के बसा के त देख$

रतिया में नींद ना रही दिन में चैन हो
नदिया में इश्क के नहा के त देख$

भहर जाइ तन खूब आई रुलाई
अँखिया से अँखिया लड़ा के त देख$

मुवाई जुदाई दरद दे के जियते
धड़कन से दूरी बढ़ा के त देख$

बदन भीड़ में मन रही तब अकेले
पर$वान प्यार के चढ़ा के त देख$

बना के जमाना के हँसी के दिवाना
दिवाना के अपना हँसा के त देख$

मरम प्यार के तोरहो तब बुझाई
दिवानों के बस्ती में जा के त देख$

हिया ना रही बस में तन ई धुआँई
कबो आग के एह पानी ना बुझाई
दिलवा के चूल्हा के जरा के त देख$

जमाना दिवाना त कहि के पुकारी
अँखिया से टप$की बेबस औ लचारी
लगा अंग से फिर भगा के त देख$

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तहरा अँखिया से कजरा चोरा लेब धनी,
करेजा में अपना तोहके बसा लेब धनी।

खुश राखबि सिकायत के मौका ना देब,
तहरा धड़कन के आपन बना लेब धनी।

संग चले में तोहर पाँव थक जाई त$,
उठा के तोहके पलक प बइठा लेब धनी।

पाँवे पायल माथे बिंदी सेनुर लगाई,
नई दुल्हन जस तोहके सजा देब धनी।

नाहीं जनलू तू हमके ना पहिचनलू,
अपना जिनगी के पगहा धरा देब धनी।

प्यार करीह$ भा जोत के आन्हर करीह$
रहीह$ नजरी के सोझा मुस्का देब धनी।

ए करेजा करेज नाहीं कतरल कर$,
ना त सोझहीं हम जिनगी गँवा देब धनी।

हरियर चूड़ी बाला औरी टिकुली ले ल$,
कहबू त हरवो हँसुलिया मँगा देब धनी।

आव$ बहियाँ के झुला में तु झुल जा,
तोहरा नखरा के दिल से लगा लेब धनी।

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तड़प प्यार के का इ होला बुझाई,
हिया में केहु के बसा के त देख$

रतिया में नींद ना रही दिन में चैन हो
नदिया में इश्क के नहा के त देख$

भहर जाइ तन खूब आई रुलाई
अँखिया से अँखिया लड़ा के त देख$

मुवाई जुदाई दरद दे के जियते
धड़कन से दूरी बढ़ा के त देख$

बदन भीड़ में मन रही तब अकेले
पर$वान प्यार के चढ़ा के त देख$

बना के जमाना के हँसी के दिवाना
दिवाना के अपना हँसा के त देख$

मरम प्यार के तोरहो तब बुझाई
दिवानों के बस्ती में जा के त देख$

हिया ना रही बस में तन ई धुआँई
कबो आग के एह पानी ना बुझाई
दिलवा के चूल्हा के जरा के त देख$

जमाना दिवाना त कहि के पुकारी
अँखिया से टप$की बेबस औ लचारी
लगा अंग से फिर भगा के त देख$

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चाल चलले बाड़$ बहुते करारा पिया।
मुखिया बनि के लुट लिह$ गाँव सारा पिया।

मधु मिसिरी बोली से टपकावत रहीह,
तू भुलाइयो के बोलीह जनि खारा पिया।

सिधरी मछरी जस सिधवा तू बनल रह,
जब देखावे के बा दिन में तारा पिया।

लगइले बझइले तू अझुरइले रहीह,
गिरे मति दीह$ लोगवन के पारा पिया।

सेटिंग गेटिंग में हव$ तू बड़ा माहिर,
एही से बनल बाड़$ सभकर दुलारा पिया।

तहरा हाव – भाव से सभे फूल जानें,
हमीं जानी कतना हव$ भटियारा पिया।

फलानवा ढेकनवा के मुँह बा सुखाइल,
तहरे नामवा के सुनि – सुनि नारा पिया।

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सियाह रतिया में जुगनू जरावे चलीं।
करेजा लहरता दिन के बुतावे चलीं।

भूख लोटता गाँवन में खोरी – खोरी,
पझाइल चूल्हा में आँच धरावे चलीं।

सोंच इच्छा के आगि में झुलसत बाटे,
साँस बाचल बा दौरीं जियावे चलीं।

सागर के छाती प,लहर पियासल फिरे,
जल नदिया के बनि,तरास मिटावे चलीं।

मन के पोखर में काई के परत परल,
प्यार के जाल उठाईं हटावे चलीं।

खिरकी खोल दीं मन में लागे दीं हवा,
भाव से भरल तिलंगी उड़ावे चलीं।

आस के बेयास मन में कुलाँचा भरो,
नाधा जोती टंगाइल उठावे चलीं।

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आँखि झुक के उठल त$ ग़ज़ल हो गइल।
झोपड़ी से इ दिलवा महल हो गइल।

देखते साँस में फेर हलचल मचल,
प्यार के उठल लहर आँखि सजल हो गइल।

मार के मुस्की मुँहवा घुमा लेलु जब
फ्यूज प्यार सौ वाट के बवल हो गइल।

रूप के ताल में मन डुबे खुब तरे,
पाँव बहकल फिरे तन कँवल हो गइल।

प्यार हमरा त तोहरे से रहले रहे
तोहरो ओर से आज पहल हो गइल।

प्रेम के रंग रंगल हवा जब चलल,
अब कठिन त$ अकेले रहल हो गइल।

केशिया जब खुलल त$ घटा छा गइल,
बूंद दिल प$ गिरल खुब फसल हो गइल।


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