जगन्नाथ जी के लिखल भोजपुरी गज़ल संग्रह लर मोतियन के

भोजपुरी गज़ल संग्रह लर मोतियन के
भोजपुरी गज़ल संग्रह लर मोतियन के

ग़ज़ल, जेकरा नावे में मिसिरी मतीन मिठास बा, गुलाब अइसन गमक बा, सुबास बा, उर्दू काव्य के सबसे जनगर आ पनिगर रूप ह। आजु के जुग में जब छंद-बद्ध कविता एक तरह से अलोपित हो रहलि बा, ग़ज़ल के लोकप्रियता के ई आलम बा की उर्दू के त बात छोड़ी हिंदी, भोजपुरी, मगही, मैथली आ अउरी क्षेत्रीय भाषा में भी ग़ज़ल छूटी के लिखा राहिल बा।

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ग़ज़ल के शुरुआत कइसे भइल, ठीक-ठीक ना कहल जा सक. बहुत लोग बहुत तरह के बात कहेला। कवनो एक मत नइखे हो सकल आजु ले एकरा पर। अइसे ग़ज़ल फारसी में, जेकरा कोखी एकर जनम भइल, रोदकी का समय से पावल जाले। उर्दू के पहिला ग़ज़ल कहनिहार सुल्तान कुली कुतुबशाह के मानल जला।

ग़ज़ल के शाब्दिक अर्थ होला-माशूक से बातचीत कइल। आशिक आ माशूक के बातचीत के आधार प्रेम छोड़ी के अउर का हो सकेला ? एह से ग़ज़ल के मुख्य विषय प्रेम मानल जाला। साँच पूँछी त ग़ज़ल मन के भावना आ प्रेम के कामना के अभिव्यक्ति ह। मन के भावना आ प्रेम के कामना असीम होले। एकनि के कवनो सिमा में नइखे बान्हल जा सकत। एही से ग़ज़ल कबो-कबो दार्शनिक आ आद्यात्मिक रूपों ले लेले। ग़ज़ल मूलतः व्यक्तिवादी काव्य ह।

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