रूपईया आऊर सोहरत कऊना काम के

परनाम ! स्वागत बा राउर जोगीरा डॉट कॉम प, रउवा सब के सोझा बा महादेव कुमार सिंह जी के लिखल भोजपुरी कहानी रूपईया आऊर सोहरत कऊना काम के, पढ़ीं आ आपन राय जरूर दीं कि रउवा महादेव कुमार सिंह जी के लिखल भोजपुरी कहानी ( Bhojpuri Kahani) कइसन लागल आ रउवा सब से निहोरा बा कि एह कहानी के शेयर जरूर करी।

इ दुनिया बङ तेजी से बदल रहल बा। रूपईया आऊर सोहरत के गरमी कमजोर से कमजोर आऊर बुङबक से बुङबक इंसान के ताकत आऊर उमंग से ओकराके भर देला। इ रिश्ता-नाता के बीच में भी जबसे रूपईया पईठ गईल तबसे अपन सगे-संबंधी में भी दरार पङे लागल।

महादेव कुमार सिंह जी
महादेव कुमार सिंह जी

ई रूपईया मे चम्मुक जईसन गुण आऊर शक्ति बा। आजकल एकरे परभाव से संबंध बनेला आऊर एकरे कुपरभाव से संबंध बिगङ जाला। पईसा के खेल बङ निराला बा, मरद-मेहरारू के बीच झगङा, बाप-बेटा के बीच झगङा, भाई-भाई के बीच मनमोटाव एही सब चलत रहेला, देखल जाई त ई पईसा का-का न करावेला? अगर पईसा के तमाशा देखेके होई त कउनो पेंशनधारी के इहाँ जाके देखी सब समझ में आ जाई।

अगर पेंशनधारी बाबूलोग के एगो से जादे औलाद होखे त ऊहाँ जाके देखी कि, उनके हाँङी में कइसेके खिचङी पकेला। बहुते कम लोग अईसन बारन जिनके नौकरी से सेवा-निवृति के बाद भी उनके औलाद मान-सम्मान के साथ रखेलन। कबो मोका मिले त गाँव-घर में घूमके पेंशनधारी बङ बुजुर्ग से जाके तनिक भेंट मुलकात करी, रऊरा लोगके दुनियादारी आऊर संबंध सब समझ में आ जाई। हमरा कहेके मतलब इ बा, कि पईसा के काऱण लोग एकसे एक करम आऊर एकसे एक कुकरम करे खतिरा तईयार रहेलन जबकि ऊनका पता बा कि केतनो हाय-मईया कईला से कोई फायदा नईखे।

ई धरती पर लोग जेतना भी कमईहें सबके सब एहीं पङल रह जाई। ई जेतना भी महल अटारी, सोना-चानी, कागज के रूपईया आऊरो एकसे एक कार (लोहा आऊर प्लास्टिक के कचरा) जेकरा पर लोग खूब गुमान करेलन सबकुछ एही पर धरलके धरल रह जाई। ई शान-शोकत आऊर सोहरत बस कुछे दिन के खेल बा आदमी के साथ कुछो न जाला, छीना-झपटी, चोरी, घूसखोरी ई सब पाप, लोग अपन बाल- बच्चा के मोह मे पङके करेलन, बाकी एकर कोई गारंटी नईखे कि बुढापा में उनकर बेटा-पुतोह उनकाके सेवा करी। ई जान ली कि आदमी के बुढापा सीमर के सुखल पेंङो से बेकार होला, जिनके आस-पास एगो छोटकी चिङई भी जाये से कतराले। बेटा चाहे जईसन होखे बाकी माई-बाप हमेशा ऊनके भलाई चाहेलन, त चाहेलन कि बेटा बहुत रूपईया कमाये आऊर खूब सोहरत हासिल करे।

केहु, केहु के योग में त अईसन बाप-महतारी बारन जे चाहेलन कि दुनिया के सब धन-दौलत हङप के बेटा, पोता के बाद अगिलका पीढी दर पीढी के खातिर जमा कर दी। उनका ई पता नईखे कि पुत्र अगर कुपुत्र हो जाई त बङका से बङका खजाना खाली होये मे तनिको देर ना लगी। कईएक घर अईसनो बा जिनके इहाँ सब भरल-पुरल बा, बेटा सब विदेश में रहेलन बाकी माई-बाबू के समय पर दूगो सुखल रोटीयो देबेबाला नईखे। बचपन में जे बाप-महतारी खुद न खाके एक-एक कौर आपन दिलके टुकरा खातिर बचाके रखेलन उनका ई पता नईखे कि रूपईया आऊर सोहरत खातिर बेटा ऊनकराके छोङ-छाङके विदेश में बस जईहें। अईसन रूपईया आऊर सोहरत कऊना काम के, अईसन धनमान बेटा से अच्छा त, गरीब बेटा होला जे मेहनत-मजूरी कईके आपन बाप-माई के पेट भरेलन आऊरो मरते दम तक ऊनके साथ-साथ रहेलन। बुढापा जीवनके बङ मार्मिक आऊर बङ संवेदनशील समय होला हमनी के करतब बा कि केहु तरह बङ-बुजुर्ग के जीवन निरबाह मे कोई कसर ना छोङी।

भले ही केहु आऊर सेवा सत्कार करे चाहे न करे बाकि सच्चा पुत माथा झुकाके अपन जनम-दाता के सेवा जरूर करिहे। माई-बाबू के सेवा से बढके कोईओ तीरथ न होला। अगर सगरी तीरथ-धाम घूम- घाम अईनी आऊरो जनम-दाताके सेवा-सत्कार ना भईल त ई समझ ली कि केतनो तीरथ-धाम कर ली कोई फायदा नईखे, आऊर तीरथो कबो सुफल ना होई।

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