शायद अब लोग समझ जाव : निर्भय नीर

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परनाम ! स्वागत बा राउर जोगीरा डॉट कॉम प,अपना हिन्दू धरम के कुछ रीती रिवाज आ मानता के बारे में बता रहल बानी निर्भय नीर जी । रउवा सब से निहोरा बा कि पढ़ला के बाद आपन राय जरूर दीं, आ रउवा निर्भय नीर जी के दिहल जानकारी अच्छा लागल त आगे शेयर जरूर करी।

शायद अब लोग समझ जाव कि पहिले हमनी के पूर्वज लोग:

(१) दिसा फिरे आ नहाए वाला घर अपना मकान के बहरी काहे बनवावत रहत रहे।

(२) केश कटवा के भा मृतक जरा के अइला पर बिना कुछू छूअले बहरिए नहा के अपना धर के भीतरी काहे ढूकत रहे।

(३) अपना गोड़ के चपल भा जूता घर के बहरिए काहे खोल देत रहे।

(४) घर के बहरी राखल पानी से गोड़ धो के तबे घर के भीतरी जात रहे।

(५) जन्म आ मृत्यु के बाद घर वालन के १० भा १३ दिन ले काहे कवनो समाजिक काम से वंचित राखल जात रहे।

(६) मृत्यु भइला पर घर में काहे भोजन ना बनत रहे।

(७) मृतक भा दाही के कपड़ा काहे मुरघटिया में फेंक दियात रहे।

(८) खाएक बनावे से पहिले काहे नहाइल जरुरी होत रहे।

(९) नहइला के बाद काहे लोग कवनो अशुद्ध वस्तु भा व्यक्ति से कोसो दूर रहल जात रहे।

(१०) फजिरहीं नहा धो के काहे अगरबत्ती, धूप, शंख आ घंटी बजा के पूजा-पाठ कइल जात रहे।

हमनी अपना पुरखा पुरनिया के ई कुल्ही पारंपरिक नियमन के ढकोसला बूझ के छोड़ दिहनी स आ पछिमी सभ्यता के धंधा के चक्कर में पड़ गइनी स।

आज करोनवा के वायरस धन्यवाद के पात्र बाड़न स कि हमनी पुरखा पुरनिया के खत्म भइल ई कुल्ही नियमन के याद करवा के एकर महत्त्व समझवलस।

हिन्दू धर्म, ज्ञान आ परंपरा के मामला में हमेशा समृद्ध रहल बा। आजु समय बा अपना आंँखि पर पड़ल परदा के हटावे के आ अपना बच्चन आ परिवार में ई उम्दा, उँच संस्कार देवे के।

तऽ आई सपथ लीं कि आज से हमनी ए सनातन धरम के कुल्ह नियमन के पालन करब स आ सभ से करवाएब स।

भोजपुरी रुपांतरण: निर्भय नीर

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