सिरिजन तिमाही भोजपुरी ई-पत्रिका के पहिलका अंक रउआ सोझा बा

सिरिजन के समहुत अंक रउआ सभ के स़मने परोसत एगो संकोच भरल गर्व के अनुभव हो रहल बा । भाषा अभिव्यक्ति के एगो माध्यम ह, अभिव्यक्ति विचारन के प्रस्तुति , विचारन के प्रस्तुति चेतना के संप्रसारण के एगो छोट प्रयास होला।

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सिरिजन तिमाही भोजपुरी ई-पत्रिका के पहिलका अंक
सिरिजन तिमाही भोजपुरी ई-पत्रिका के पहिलका अंक

संचार माध्यम के व्यापकता आ बहुलता वैश्विक सम्पर्क के प्रेरणा दिहले बा । भाषा के चलते विश्व में व्यापक परिदृश्य से संपर्क स्थापित कइल जा सकता । इहे सोच अउर कामना से अंतरष्ट्रीय स्तर पर आपन विचार, अपना भाषा के माध्यम से व्यक्त कइल जा, इहे हमनीं के मूल मतलब बा ।

भोजपुरी भासा के परचार परसार के पाछे कवनो दुराग्रह भा पूर्वाग्रह नइखे, बलुक एगो नाजुक निहोरा बा । अपना भासा के गौरव जानि के अपने दायित्व के निबाहल जा सके, इहे सोच “सिरिजन” के रूप में सबके उत्प्रेररत कइलस।

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