कलम उगलत बा आग

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कलम उगलत बा आग, का लिखीँ?
हमार देश के का बा हालात, क लिखीँ?

सिसकत बा मानवता, कवनो कोना मेँ पड़ल।
जकड़ले बा पईसा के मकड़जाल, का लिखीँ?

इंसानियत कौड़ियन के खातिर मर रहल बा!
केहु नइखे जानत कब,
कौड़िया इंसान से हो गइल बड़ बा।

तिलमिला के मर रहल बा,
संवेदना टुकड़ा-टुकड़ा मेँ एहिजा।
मौत भी जी के मरत बा, का लिखीँ?

कलम उगलत बा आग, का लिखीँ?
हमार देश के का बा हालात, का लिखीँ?

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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